विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: सामान्य जागरूकता – इतिहास और संस्कृति विषय-वस्तु: 20.2 मध्यकालीन भारत
मध्यकालीन भारत का इतिहास मोटे तौर पर छठी से अठारहवीं शताब्दी तक माना जाता है। इस काल को दो मुख्य भागों में बाँटा गया है – प्रारंभिक मध्यकाल (लगभग 750-1206 ईस्वी) जिसमें राजपूत, पाल, प्रतिहार और राष्ट्रकूट जैसे राजवंशों का उदय हुआ, तथा उत्तर मध्यकाल (1206-1526 ईस्वी) जिसमें दिल्ली सल्तनत का शासन रहा। इसके पश्चात् मुगल साम्राज्य (1526-1857 ईस्वी) ने भारतीय इतिहास को नई दिशा दी। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 की परीक्षा में मध्यकालीन भारत से शासकों, युद्धों, वास्तुकला और प्रशासन से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।
मध्यकाल का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक केंद्र दिल्ली रहा। 1206 ईस्वी में कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली सल्तनत की नींव रखी जो 1526 ईस्वी तक चली। इस दौरान गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैयद और लोदी – पाँच प्रमुख राजवंशों ने शासन किया। इनमें अलाउद्दीन खिलजी की बाजार नियंत्रण नीति, मुहम्मद बिन तुगलक के प्रयोग और इब्राहिम लोदी के अंतिम शासन काल में पानीपत का प्रथम युद्ध (1526) हुआ, जिसमें बाबर ने लोदी को पराजित कर मुगल साम्राज्य की स्थापना की।
मुगल काल को भारतीय इतिहास का वैभवशाली युग माना जाता है। बाबर से लेकर औरंगजेब तक के शासकों ने साम्राज्य को विस्तार दिया, परंतु बहादुर शाह जफर द्वितीय के शासनकाल में 1857 के विद्रोह के बाद मुगल साम्राज्य का अंत हुआ। इसी काल में दक्षिण भारत में विजयनगर साम्राज्य और बहमनी राज्य तथा महाराष्ट्र में मराठा साम्राज्य का उदय हुआ। मध्यकालीन भारत की प्रशासनिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य परंपराओं का गहरा प्रभाव आज भी भारतीय समाज पर दिखाई देता है।
दिल्ली सल्तनत की स्थापना कुतुबुद्दीन ऐबक ने की थी जो गुलाम वंश का संस्थापक था। गुलाम वंश के प्रमुख शासक इल्तुतमिश ने "चालीसा" (तुर्कान-ए-चिहलगानी) नामक दासों का समूह बनाया और "सिक्कों पर खलीफा का नाम" अंकित कराया। इल्तुतमिश को दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक कहा जाता है। उसकी पुत्री रजिया सुल्ताना भारत की पहली महिला मुस्लिम शासिका थी, जिसने 1236-1240 ईस्वी तक शासन किया। बलबन ने "सिजदा" और "पाबोस" की प्रथा शुरू की और राजा के सम्मान को बढ़ाने के लिए "जिल्ल-ए-इलाही" (ईश्वर की छाया) की अवधारणा दी।
खिलजी वंश: जलालुद्दीन खिलजी ने 1290 ईस्वी में खिलजी वंश की स्थापना की, परंतु उसका उत्तराधिकारी अलाउद्दीन खिलजी (1296-1316) सबसे महान खिलजी शासक था। अलाउद्दीन ने बाजार मूल्य नियंत्रण की नीति लागू की, स्थायी सेना बनाई और मंगोल आक्रमणों से दिल्ली की रक्षा की। उसने दक्षिण भारत में मलिक काफूर को अभियान पर भेजा। अलाउद्दीन ने "नवरोज" उत्सव मनाना बंद करवाया और राज्य में जासूसी प्रणाली को मजबूत किया। उसके आदेश पर कीमती वस्तुओं का मूल्य स्थिर रखा जाता था।
तुगलक वंश: गयासुद्दीन तुगलक ने 1320 ईस्वी में तुगलक वंश की नींव रखी। मुहम्मद बिन तुगलक अपने चार महत्वपूर्ण प्रयोगों के लिए प्रसिद्ध है – राजधानी का स्थानांतरण (दिल्ली से दौलताबाद), ताम्र मुद्रा का प्रचलन, दोआब में कर वृद्धि और खुरासान अभियान। फिरोज शाह तुगलक ने कृषि करों को घटाया, नहरें खुदवाईं और "दीवान-ए-खैरात" (गरीबों के लिए विभाग) तथा "दीवान-ए-बंदगान" (दासों का विभाग) की स्थापना की। तैमूर ने 1398 ईस्वी में दिल्ली पर आक्रमण कर तुगलक साम्राज्य की शक्ति को समाप्त कर दिया।
सैयद और लोदी वंश: तैमूर के आक्रमण के बाद 1414 में खिज्र खान ने सैयद वंश की स्थापना की। सैयद वंश के अंतिम शासक आलम शाह को 1451 में बहलोल लोदी ने पराजित कर लोदी वंश की नींव रखी। लोदी वंश के अंतिम शासक इब्राहिम लोदी को बाबर ने 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध में पराजित किया। पानीपत की लड़ाई में तोपखाने का प्रभावी उपयोग पहली बार भारत में देखा गया था।
मुगल साम्राज्य की स्थापना बाबर ने 1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी को हराकर की। बाबर ने 1527 में खानवा के युद्ध में राणा सांगा को और 1528 में चंदेरी में मेदनीराय को पराजित किया। हुमायूँ बाबर का उत्तराधिकारी हुआ, जिसे शेरशाह सूरी ने 1539 में चौसा और 1540 में कन्नौज के युद्धों में पराजित कर मुगलों से दिल्ली छीनी। शेरशाह सूरी ने "रूपया" नामक मुद्रा और "ग्रैंड ट्रंक रोड" (सड़क) का निर्माण कराया। हुमायूँ 1555 में पुनः दिल्ली की गद्दी पर बैठा परंतु 1556 में पुस्तकालय की सीढ़ियों से गिरकर मृत्यु को प्राप्त हुआ।
अकबर महान: अकबर ने 1556 में तेरह वर्ष की आयु में गद्दी संभाली। पानीपत का द्वितीय युद्ध (1556) उसके संरक्षक बैरम खाँ ने हेमू को पराजित कर जीता। अकबर ने 1576 में हल्दीघाटी के युद्ध में राणा प्रताप को हराया। उसने "मनसबदारी प्रणाली" की शुरुआत की और 1582 में "दीन-ए-इलाही" नामक धर्म की स्थापना की। अकबर के दरबार में नौ रत्न (नवरत्न) थे जिनमें बीरबल, तानसेन, अबुल फजल, फैजी, राजा मान सिंह आदि शामिल थे। अबुल फजल ने "अकबरनामा" और "आइन-ए-अकबरी" की रचना की। अकबर ने 1564 में "जजिया कर" समाप्त किया और अपनी साम्राज्यवादी नीति के तहत हिन्दू राजपूतों से मैत्री की।
जहाँगीर, शाहजहाँ और औरंगजेब: जहाँगीर ने "जंजीर-ए-आदिल" (न्याय की जंजीर) लगवाई और चित्रकला को प्रोत्साहन दिया। शाहजहाँ के काल को मुगल वास्तुकला का स्वर्ण युग माना जाता है; उसने ताजमहल, लाल किला और जामा मस्जिद का निर्माण कराया। औरंगजेब ने 1658 में गद्दी संभाली और सबसे लंबे समय तक (1658-1707) शासन किया। उसने हिन्दुओं पर पुनः जजिया कर लगाया, शिवाजी के साथ संघर्ष किया और दक्षिण भारत में विस्तार किया। औरंगजेब के काल में दक्षिण में मराठों और सिखों का प्रतिरोध बढ़ा जिससे मुगल साम्राज्य धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा।
विजयनगर और मराठा: दक्षिण भारत में 1336 में हरिहर और बुक्का ने विजयनगर साम्राज्य की स्थापना की। विजयनगर का सबसे प्रसिद्ध शासक कृष्णदेव राय था जिसने "अमुक्तमाल्यद" नामक तेलुगु ग्रंथ की रचना की। विजयनगर राज्य का प्रसिद्ध युद्ध तालीकोटा का युद्ध (1565) है जिसमें राज्य के पतन का मार्ग प्रशस्त हुआ। मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज थे जिन्होंने 1674 में रायगढ़ में अपना राज्याभिषेक कराया। शिवाजी की शासन व्यवस्था में "अष्टप्रधान" (आठ मंत्री) परिषद थी जिसके प्रधान को "पेशवा" कहा जाता था।
मध्यकालीन भारत में भू-राजस्व प्रशासन का मुख्य आधार था। शेरशाह सूरी ने भू-राजस्व व्यवस्था में सुधार किए और किसानों की भूमि को नापकर कर निर्धारित किया। अकबर ने "टोडरमल" की देखरेख में "दहसाला प्रणाली" (1580) लागू की जिसमें भूमि की माप और औसत उपज के आधार पर कर तय किया गया। मुगल काल में "जागीरदारी" और "मनसबदारी" प्रणाली प्रचलित थी। प्रशासन के क्षेत्र में "दीवान" राजस्व का प्रमुख, "मीर बख्शी" सेना का प्रमुख और "काजी" न्याय का प्रभारी होता था।
मध्यकाल में सांस्कृतिक समन्वय की अद्भुत मिसाल देखने को मिली। अकबर के काल में "फतवा-ए-जहाँदारी" जैसे ग्रंथों में धर्म सहिष्णुता का समर्थन हुआ। कबीर, रहीम, तुलसीदास और सूरदास जैसे संतों ने भक्ति आंदोलन को नई ऊर्जा दी। मीराबाई कृष्ण भक्ति की प्रतीक बनीं। मध्यकाल में ही उर्दू भाषा का विकास हुआ और अमीर खुसरो ने संगीत, कविता और खिलौने के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया। तानसेन को संगीत का जादूगर कहा जाता है।
वास्तुकला: मध्यकालीन भारत की वास्तुकला में इंडो-इस्लामिक शैली का विकास हुआ। कुतुब मीनार (1193) कुतुबुद्दीन ऐबक ने प्रारंभ कराई और इल्तुतमिश ने पूरा करवाया। अलाइ दरवाजा अलाउद्दीन खिलजी का निर्माण है। लोदी काल में "लोदी उद्यान" बनाया गया। मुगल काल में ताजमहल, बुलंद दरवाजा, फतेहपुर सीकरी और पुराना किला जैसी इमारतें बनीं। हुमायूँ का मकबरा मुगल काल का प्रथम महत्वपूर्ण मकबरा है। मुगल चित्रकला और लघु चित्रों की परंपरा जहाँगीर के काल में चरम पर पहुँची।
| वंश | काल | संस्थापक | प्रमुख शासक |
|---|---|---|---|
| गुलाम | 1206-1290 | कुतुबुद्दीन ऐबक | इल्तुतमिश, रजिया, बलबन |
| खिलजी | 1290-1320 | जलालुद्दीन खिलजी | अलाउद्दीन खिलजी |
| तुगलक | 1320-1414 | गयासुद्दीन तुगलक | मुहम्मद बिन तुगलक, फिरोज शाह |
| सैयद | 1414-1451 | खिज्र खान | मुबारक शाह |
| लोदी | 1451-1526 | बहलोल लोदी | सिकंदर लोदी, इब्राहिम लोदी |
| शासक | शासनकाल | प्रमुख उपलब्धि |
|---|---|---|
| बाबर | 1526-1530 | पानीपत प्रथम युद्ध 1526 |
| हुमायूँ | 1530-1556 | दीनपनाह नगर निर्माण |
| अकबर | 1556-1605 | मनसबदारी प्रणाली, दीन-ए-इलाही |
| जहाँगीर | 1605-1627 | जंजीर-ए-आदिल |
| शाहजहाँ | 1628-1658 | ताजमहल, लाल किला |
| औरंगजेब | 1658-1707 | सबसे लंबा शासन, जजिया पुनः लागू |
flowchart TD
A[मध्यकालीन भारत] --> B[दिल्ली सल्तनत 1206-1526]
A --> C[मुगल साम्राज्य 1526-1857]
A --> D[दक्षिणी साम्राज्य]
A --> E[मराठा साम्राज्य]
B --> B1[गुलाम वंश - ऐबक]
B --> B2[खिलजी - अलाउद्दीन]
B --> B3[तुगलक - मुहम्मद बिन तुगलक]
B --> B4[लोदी - इब्राहिम लोदी]
C --> C1[बाबर - पानीपत 1526]
C --> C2[अकबर - मनसबदारी]
C --> C3[शाहजहाँ - ताजमहल]
C --> C4[औरंगजेब - विस्तार]
D --> D1[विजयनगर - कृष्णदेव राय]
E --> E1[शिवाजी महाराज]
मध्यकालीन भारत ने दिल्ली सल्तनत से लेकर मुगल साम्राज्य तक की राजनीतिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक यात्रा देखी। दिल्ली सल्तनत के पाँच वंशों ने भारत में इस्लामी प्रशासन व्यवस्था की नींव रखी, जबकि मुगलों ने वास्तुकला, चित्रकला, संगीत और साहित्य में अद्वितीय योगदान दिया। दक्षिण में विजयनगर साम्राज्य और महाराष्ट्र में मराठा साम्राज्य ने भारतीय संस्कृति को संरक्षित रखा। इस अध्याय में हमने राजवंशों के कालक्रम, प्रमुख शासकों, महत्वपूर्ण युद्धों और सांस्कृतिक उपलब्धियों का विस्तृत अध्ययन किया। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा के लिए मध्यकालीन भारत के शासक-उपलब्धि-युद्ध के मिलान वाले प्रश्नों को सटीक रूप से हल करने हेतु तालिकाओं और माइंड मैप की पुनरावृत्ति आवश्यक है।