विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: गणित – संख्या पद्धति विषय-वस्तु: 1.1 संख्या पद्धति
संख्या पद्धति गणित की सबसे बुनियादी और महत्वपूर्ण शाखा है, जिसके बिना आगे के किसी भी अध्याय को समझना संभव नहीं है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में संख्या पद्धति से प्रतिवर्ष 3 से 5 प्रश्न निश्चित रूप से पूछे जाते हैं। इन प्रश्नों में प्राकृतिक संख्याओं, पूर्ण संख्याओं, पूर्णांकों, परिमेय संख्याओं, अपरिमेय संख्याओं, वास्तविक संख्याओं, अभाज्य तथा भाज्य संख्याओं से संबंधित अवधारणात्मक प्रश्न शामिल होते हैं। इन प्रश्नों को हल करना सरल होता है, बशर्ते अभ्यर्थी को संख्याओं का वर्गीकरण स्पष्ट हो।
गणित की संख्या पद्धति की नींव प्राकृतिक संख्याओं (1, 2, 3, ...) से पड़ती है। इनमें शून्य जोड़ने पर पूर्ण संख्याएँ (0, 1, 2, 3, ...) प्राप्त होती हैं। पूर्ण संख्याओं में ऋणात्मक संख्याएँ जोड़ने पर पूर्णांक (..., -2, -1, 0, 1, 2, ...) बनते हैं। पूर्णांकों में भिन्नों को मिलाने पर परिमेय संख्याएँ (जैसे 2/3, -5/7) तथा जिन संख्याओं को p/q के रूप में नहीं लिखा जा सकता, जैसे √2, π, वे अपरिमेय संख्याएँ कहलाती हैं। परिमेय और अपरिमेय संख्याओं के मिलने से वास्तविक संख्याओं का समुच्चय बनता है।
इस अध्याय में हम संख्याओं के वर्गीकरण, अभाज्य और भाज्य संख्याओं, सम और विषम संख्याओं, इकाई अंक ज्ञात करने की विधि, अंकों के स्थानीय मान तथा संख्या रेखा के मूलभूत सिद्धांतों का अध्ययन करेंगे। रेलवे परीक्षा में ट्रिक-आधारित प्रश्नों की बहुलता होती है, इसलिए संख्याओं के गुणधर्मों को याद करना अत्यंत आवश्यक है। यह अध्याय आगे के सभी अध्यायों — दशमलव, भिन्न, LCM-HCF, प्रतिशत इत्यादि — की नींव है।
संख्याओं को मुख्यतः निम्न वर्गों में बाँटा जा सकता है।
प्राकृतिक संख्याएँ (Natural Numbers): वे संख्याएँ जिनका प्रयोग गिनती करने में होता है, जैसे 1, 2, 3, 4, ... इनका सबसे छोटा अवयव 1 है। शून्य प्राकृतिक संख्या नहीं है।
पूर्ण संख्याएँ (Whole Numbers): प्राकृतिक संख्याओं में शून्य मिलाने पर 0, 1, 2, 3, ... प्राप्त होते हैं। इनका सबसे छोटा अवयव 0 है।
पूर्णांक (Integers): पूर्ण संख्याओं में ऋणात्मक संख्याएँ मिलाने पर ..., -3, -2, -1, 0, 1, 2, 3, ... प्राप्त होते हैं। इन्हें दो भागों में बाँटा जा सकता है — धनात्मक पूर्णांक और ऋणात्मक पूर्णांक।
परिमेय संख्याएँ (Rational Numbers): जिन संख्याओं को p/q के रूप में लिखा जा सके, जहाँ p और q पूर्णांक हों तथा q ≠ 0 हो, वे परिमेय संख्याएँ हैं। उदाहरण: 2/3, -5/7, 0, 7 = 7/1।
अपरिमेय संख्याएँ (Irrational Numbers): जिन संख्याओं को p/q के रूप में नहीं लिखा जा सकता, जैसे √2, √3, π, e। इनका दशमलव प्रसार अनवसानी तथा अनावर्ती होता है।
वास्तविक संख्याएँ (Real Numbers): परिमेय और अपरिमेय सभी संख्याओं को मिलाकर वास्तविक संख्याओं का समुच्चय बनता है।
अभाज्य संख्याएँ (Prime Numbers): वे संख्याएँ जिनके केवल 2 गुणनखंड होते हैं (1 और स्वयं)। उदाहरण: 2, 3, 5, 7, 11, 13। 2 सबसे छोटी तथा एकमात्र सम अभाज्य संख्या है।
भाज्य संख्याएँ (Composite Numbers): जिन संख्याओं के दो से अधिक गुणनखंड होते हैं। उदाहरण: 4, 6, 8, 9, 10। 1 न तो अभाज्य है और न भाज्य।
उदाहरण 1: 1 से 20 तक की अभाज्य संख्याओं की सूची बनाइए।
हल: 1 से 20 तक की अभाज्य संख्याएँ हैं — 2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19। इनकी कुल संख्या 8 है।
प्रत्येक अंक का स्थानीय मान उसकी स्थिति (इकाई, दहाई, सैकड़ा, हजार इत्यादि) पर निर्भर करता है। किसी संख्या का अंकित मान (face value) वह स्वयं अंक होता है, जबकि स्थानीय मान = अंक × स्थान का मान।
उदाहरण 2: संख्या 5, 8, 6, 2 में अंक 6 का स्थानीय मान ज्ञात कीजिए।
हल: संख्या 5862 में अंक 6 सैकड़े के स्थान पर है। अतः स्थानीय मान = 6 × 100 = 600।
इकाई अंक ज्ञात करने की विधि: किसी बड़ी संख्या के गुणनफल या घात का इकाई अंक ज्ञात करने के लिए केवल इकाई अंकों पर ध्यान दिया जाता है। घातों का इकाई अंक एक चक्रीय क्रम में बदलता है। उदाहरण के लिए 4 की घातों का इकाई अंक चक्र 4, 6, 4, 6, ... है, जबकि 2 की घातों का चक्र 2, 4, 8, 6, ... है।
उदाहरण 3: 7^23 का इकाई अंक ज्ञात कीजिए।
हल: 7 की घातों का इकाई अंक चक्र 7, 9, 3, 1 है (4 चरणों के बाद पुनरावृत्ति)। घातांक 23 को 4 से भाग देने पर शेष 3 आता है। चक्र में तीसरा अंक 3 है। अतः 7^23 का इकाई अंक 3 होगा।
विभाज्यता के नियम परीक्षा में अत्यधिक उपयोगी होते हैं। 2 से विभाज्यता: इकाई अंक सम (0, 2, 4, 6, 8) हो। 3 से: अंकों का योग 3 से विभाज्य हो। 5 से: इकाई अंक 0 या 5 हो। 9 से: अंकों का योग 9 से विभाज्य हो। 11 से: सम और विषम स्थानों के अंकों के योग का अंतर 0 या 11 का गुणज हो।
क्रमागत संख्याओं का गुणनफल (n)(n+1) सदैव 2 से विभाज्य होता है तथा (n)(n+1)(n+2) सदैव 6 से विभाज्य होता है। किसी संख्या का वर्ग कभी भी 2, 3, 7 या 8 के अंक पर समाप्त नहीं होता।
उदाहरण 4: क्या 12348, 3 से विभाज्य है?
हल: अंकों का योग = 1 + 2 + 3 + 4 + 8 = 18। 18, 3 से विभाज्य है, अतः 12348, 3 से विभाज्य है।
| समुच्चय | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्राकृतिक संख्याएँ | 1 से आगे की गिनती | 1, 2, 3, ... |
| पूर्ण संख्याएँ | प्राकृतिक + 0 | 0, 1, 2, 3, ... |
| पूर्णांक | पूर्ण + ऋणात्मक | ..., -2, -1, 0, 1, 2, ... |
| परिमेय संख्याएँ | p/q रूप, q ≠ 0 | 2/3, -5/7, 0 |
| अपरिमेय संख्याएँ | p/q रूप में नहीं | √2, π, √3 |
| वास्तविक संख्याएँ | परिमेय + अपरिमेय | सभी ऊपर की संख्याएँ |
| भाजक | नियम | उदाहरण |
|---|---|---|
| 2 | इकाई अंक सम | 124, 356 |
| 3 | अंकों का योग 3 से विभाज्य | 123 (योग 6) |
| 4 | अंतिम दो अंक 4 से विभाज्य | 132 (32 ÷ 4 = 8) |
| 5 | इकाई अंक 0 या 5 | 125, 140 |
| 9 | अंकों का योग 9 से विभाज्य | 927 (योग 18) |
| 11 | सम-विषम अंकों के योग का अंतर 0 या 11 का गुणज | 121 (2 - 2 = 0) |
flowchart TD
A[संख्या पद्धति] --> B[वर्गीकरण]
A --> C[अभाज्य और भाज्य]
A --> D[स्थानीय मान और इकाई अंक]
A --> E[विभाज्यता नियम]
B --> B1[प्राकृतिक 1,2,3]
B --> B2[पूर्ण + 0]
B --> B3[पूर्णांक ऋणात्मक सहित]
B --> B4[परिमेय p/q]
B --> B5[अपरिमेय √2]
B --> B6[वास्तविक]
C --> C1[2, 3, 5, 7, 11]
C --> C2[1 न अभाज्य न भाज्य]
D --> D1[अंक × स्थान का मान]
D --> D2[घातों का चक्र 4 चरण]
E --> E1[2, 3, 5, 9, 11]
संख्या पद्धति संपूर्ण गणित की आधारशिला है। इस अध्याय में हमने प्राकृतिक, पूर्ण, पूर्णांक, परिमेय, अपरिमेय तथा वास्तविक संख्याओं के वर्गीकरण को विस्तार से समझा। हमने अभाज्य और भाज्य संख्याओं के बीच अंतर, स्थानीय मान, इकाई अंक ज्ञात करने की चक्र विधि तथा विभाज्यता के नियमों का अध्ययन किया। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में इनमें से कम से कम 3 से 4 प्रश्न अवश्य आते हैं। इन अवधारणाओं की दृढ़ पकड़ बाद के सभी अध्यायों — दशमलव, भिन्न, LCM-HCF, वर्गमूल और सरलीकरण — को समझने में सहायक होगी। नियमित अभ्यास और त्वरित पुनरावृत्ति से विद्यार्थी इन प्रश्नों को न्यूनतम समय में पूर्ण सटीकता के साथ हल कर सकता है।