विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: भौतिकी – ऊष्मा ध्वनि और प्रकाश विषय-वस्तु: 12.2 तापीय प्रसार
तापीय प्रसार भौतिकी की वह अवधारणा है जिसके अनुसार पदार्थ को ऊष्मा देने पर उसके कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है और वे एक-दूसरे से दूर खिसक जाते हैं, जिससे पदार्थ के आयाम बढ़ जाते हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में तापीय प्रसार से प्रतिवर्ष 2 से 3 प्रश्न पूछे जाते हैं। इनमें ठोस, द्रव और गैसों में प्रसार के अंतर, रेखीय प्रसार गुणांक, क्षेत्रीय प्रसार गुणांक, आयतन प्रसार गुणांक तथा इनके मध्य संबंध पर प्रश्न आते हैं। इसके अलावा द्विधातु पट्टी (bimetallic strip) तथा पटरियों के बीच अंतराल से संबंधित व्यावहारिक प्रश्न भी पूछे जाते हैं।
जब किसी ठोस को गर्म किया जाता है तो उसकी लंबाई, क्षेत्रफल और आयतन तीनों में वृद्धि होती है। लंबाई में वृद्धि को रेखीय प्रसार, क्षेत्रफल में वृद्धि को क्षेत्रीय प्रसार तथा आयतन में वृद्धि को आयतन प्रसार कहते हैं। इसका कारण यह है कि गर्म करने पर अणुओं के कंपन का आयाम बढ़ जाता है, जिसके परिणामस्वरूप अणुओं के बीच की औसत दूरी बढ़ जाती है। ठोसों में अणुओं की स्थिति सुदृढ़ होती है, अतः उनमें प्रसार कम होता है, जबकि गैसों में प्रसार सबसे अधिक होता है।
इस विषय में हम रेखीय प्रसार गुणांक (α), क्षेत्रीय प्रसार गुणांक (β) और आयतन प्रसार गुणांक (γ) की परिभाषा, उनके SI मात्रक तथा उनके मध्य संबंध α : β : γ = 1 : 2 : 3 का अध्ययन करेंगे। इसके साथ ही जल का विसंगत प्रसार (anomalous expansion), द्विधातु पट्टी और विभिन्न व्यावहारिक उपयोगों को सूत्रों और संख्यात्मक उदाहरणों सहित समझेंगे। रेलवे परीक्षा में प्रसार गुणांकों के अनुपात और लंबाई में परिवर्तन की गणना वाले प्रश्न सबसे महत्वपूर्ण हैं।
किसी ठोस को गर्म करने पर उसकी लंबाई में जो वृद्धि होती है, उसे रेखीय प्रसार कहते हैं। यदि किसी छड़ की प्रारंभिक लंबाई L0 है और तापमान ΔT बढ़ाने पर लंबाई में वृद्धि ΔL होती है, तो रेखीय प्रसार गुणांक α निम्न सूत्र द्वारा परिभाषित होता है:
ΔL = α L0 ΔT
जहाँ α = रेखीय प्रसार गुणांक (प्रति °C या प्रति K), L0 = प्रारंभिक लंबाई, ΔT = तापमान में वृद्धि। α का SI मात्रक K^-1 या प्रति केल्विन होता है। अंतिम लंबाई L = L0(1 + αΔT) होती है।
रेखीय प्रसार गुणांक का मान पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है। विभिन्न धातुओं के रेखीय प्रसार गुणांक भिन्न होते हैं। उदाहरण के लिए, लोहे का α = 1.2 × 10^-5 प्रति °C, ताँबे का α = 1.7 × 10^-5 प्रति °C तथा पीतल का α = 1.9 × 10^-5 प्रति °C होता है। जिन पदार्थों में प्रसार अधिक होता है उनके α का मान अधिक होता है। यही कारण है कि पुलों, रेल पटरियों और कंक्रीट के स्लैबों में प्रसार के लिए उचित अंतराल रखा जाता है।
उदाहरण 1: 50 मीटर लंबी लोहे की छड़ का तापमान 20°C से बढ़ाकर 60°C करने पर उसकी लंबाई में कितनी वृद्धि होगी? (लोहे का α = 1.2 × 10^-5 /°C)
हल: L0 = 50 m, ΔT = 60 - 20 = 40°C, α = 1.2 × 10^-5 /°C। सूत्र ΔL = α L0 ΔT में रखने पर ΔL = 1.2 × 10^-5 × 50 × 40 = 1.2 × 10^-5 × 2000 = 0.024 m = 2.4 cm। अतः छड़ की लंबाई में 2.4 cm की वृद्धि होगी।
उदाहरण 2: 10 मीटर लंबी ताँबे की छड़ 0°C पर है। 100°C पर इसकी लंबाई कितनी होगी? (ताँबे का α = 1.7 × 10^-5 /°C)
हल: L = L0(1 + αΔT) = 10(1 + 1.7 × 10^-5 × 100) = 10(1 + 0.0017) = 10 × 1.0017 = 10.017 m। अतः 100°C पर छड़ की लंबाई 10.017 मीटर होगी।
जब किसी ठोस को गर्म किया जाता है तो उसके पृष्ठीय क्षेत्रफल में वृद्धि होती है, जिसे क्षेत्रीय प्रसार कहते हैं। यदि प्रारंभिक क्षेत्रफल A0 है और तापमान में ΔT वृद्धि पर क्षेत्रफल में वृद्धि ΔA होती है, तो क्षेत्रीय प्रसार गुणांक β = ΔA/(A0 ΔT) होता है। आयतन प्रसार में पिंड के आयतन में वृद्धि होती है और आयतन प्रसार गुणांक γ = ΔV/(V0 ΔT) होता है। तीनों गुणांकों में संबंध है:
β = 2α तथा γ = 3α
अतः α : β : γ = 1 : 2 : 3 होता है। यह संबंध केवल ठोस पदार्थों के लिए सटीक है। द्रवों के लिए केवल आयतन प्रसार ही महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि द्रव का अपना आकार नहीं होता।
द्रवों का आयतन प्रसार गुणांक ठोसों से बहुत अधिक होता है। उदाहरण के लिए, जल का आयतन प्रसार गुणांक लगभग 2.1 × 10^-4 /°C होता है, जो लोहे से लगभग 17 गुना अधिक है। गैसों का प्रसार सबसे अधिक होता है क्योंकि उनके अणुओं के बीच अंतराल सबसे अधिक होता है। थर्मामीटर में पारा या अल्कोहल का उपयोग इसी कारण होता है कि द्रव का प्रसार स्पष्ट दिखाई देता है।
उदाहरण 3: 0°C पर 100 cm^2 क्षेत्रफल की लोहे की प्लेट को 50°C तक गर्म करने पर उसका क्षेत्रफल कितना हो जाएगा? (लोहे का α = 1.2 × 10^-5 /°C)
हल: β = 2α = 2 × 1.2 × 10^-5 = 2.4 × 10^-5 /°C। ΔA = β A0 ΔT = 2.4 × 10^-5 × 100 × 50 = 0.12 cm^2। अतः अंतिम क्षेत्रफल = 100 + 0.12 = 100.12 cm^2।
उदाहरण 4: 20°C पर 100 cm^3 आयतन के ताँबे के ब्लॉक को 70°C तक गर्म किया जाता है। आयतन में वृद्धि ज्ञात कीजिए। (ताँबे का α = 1.7 × 10^-5 /°C)
हल: γ = 3α = 3 × 1.7 × 10^-5 = 5.1 × 10^-5 /°C। ΔV = γ V0 ΔT = 5.1 × 10^-5 × 100 × 50 = 0.255 cm^3। अतः आयतन में 0.255 cm^3 की वृद्धि होगी।
जल 4°C तक ठंडा होने पर सिकुड़ता है और 4°C से 0°C तक ठंडा होने पर फैलता है। इसी को जल का विसंगत प्रसार (anomalous expansion) कहते हैं। जल की अधिकतम घनत्व 4°C पर होती है। इसी कारण ठंड के मौसम में तालाबों की सतह पर बर्फ जमती है परंतु नीचे का जल 4°C पर तरल रहता है, जिससे जलीय जीव जीवित रहते हैं। ठंडे क्षेत्रों में जल के इसी गुण के कारण पानी के पाइप फटने की घटनाएँ होती हैं।
द्विधातु पट्टी (bimetallic strip) दो भिन्न धातुओं — सामान्यतः पीतल और लोहा — को एक साथ जोड़कर बनाई जाती है। गर्म करने पर पीतल का प्रसार लोहे से अधिक होता है, अतः पट्टी पीतल वाले पक्ष की ओर मुड़ जाती है। ठंडा करने पर विपरीत दिशा में मुड़ती है। द्विधातु पट्टी का उपयोग स्वचालित विद्युत स्विच, थर्मोस्टेट (रेफ्रिजरेटर, आयरन), विद्युत घंटी और अतिताप सुरक्षा युक्तियों में होता है। इसी सिद्धांत पर तापमान नियंत्रण कार्य करता है।
व्यावहारिक महत्व: रेल पटरियों के सिरों के बीच अंतराल, पुल के स्टील गर्डरों के नीचे रोलर, घड़ी के पेंडुलम की लंबाई समायोजन, गरम पानी के पाइपों में मोड़ तथा विद्युत तारों को बहुत ढीला न बाँधना — सभी तापीय प्रसार के व्यावहारिक उपयोग हैं। गर्मी में विद्युत तार ढीले और सर्दी में तने हुए दिखते हैं क्योंकि धातु गर्म होने पर फैलती है और ठंडी होने पर सिकुड़ती है।
उदाहरण 5: 0°C पर 40 मीटर लंबी रेल पटरी की लंबाई गर्मी में 45°C पर कितनी होगी? (लोहे का α = 1.2 × 10^-5 /°C)
हल: ΔL = α L0 ΔT = 1.2 × 10^-5 × 40 × 45 = 1.2 × 10^-5 × 1800 = 0.0216 m = 2.16 cm। अतः पटरी की लंबाई 40.0216 m होगी, इसलिए पटरियों के बीच अंतराल आवश्यक है।
| प्रकार | गुणांक | सूत्र | संबंध |
|---|---|---|---|
| रेखीय प्रसार | α | ΔL = α L0 ΔT | α |
| क्षेत्रीय प्रसार | β | ΔA = β A0 ΔT | β = 2α |
| आयतन प्रसार | γ | ΔV = γ V0 ΔT | γ = 3α |
| उपयोग / उदाहरण | सिद्धांत |
|---|---|
| रेल पटरियों के बीच अंतराल | गर्मी में रेखीय प्रसार की क्षतिपूर्ति |
| थर्मोस्टेट | द्विधातु पट्टी का मुड़ना |
| बर्फ तैरती है | जल का विसंगत प्रसार, 4°C पर अधिकतम घनत्व |
| थर्मामीटर | द्रव का आयतन प्रसार |
| पुलों में रोलर | प्रसार से तनाव से बचाव |
flowchart TD
A[तापीय प्रसार] --> B[रेखीय प्रसार α]
A --> C[क्षेत्रीय प्रसार β]
A --> D[आयतन प्रसार γ]
A --> E[द्रव और गैसों का प्रसार]
A --> F[व्यावहारिक उपयोग]
B --> B1[ΔL = α L0 ΔT]
C --> C1[ΔA = β A0 ΔT]
D --> D1[ΔV = γ V0 ΔT]
B --> B2[SI मात्रक प्रति K]
C --> C2[β = 2α]
D --> D2[γ = 3α]
E --> E1[जल का विसंगत प्रसार]
E --> E2[4°C पर अधिकतम घनत्व]
F --> F1[रेल पटरियों का अंतराल]
F --> F2[द्विधातु पट्टी - थर्मोस्टेट]
तापीय प्रसार ऊष्मा के अध्ययन का आधारभूत भाग है जो हमें बताता है कि ऊष्मा देने पर पदार्थ किस प्रकार अपने आकार और आयतन में परिवर्तन करता है। इस अध्याय में हमने रेखीय, क्षेत्रीय और आयतन प्रसार के गुणांकों α, β, γ और उनके मध्य संबंध α : β : γ = 1 : 2 : 3 का विस्तार से अध्ययन किया। हमने जल के विसंगत प्रसार, 4°C पर अधिकतम घनत्व तथा द्विधातु पट्टी के सिद्धांत और उपयोगों को समझा। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में इस विषय से 2 से 3 प्रश्न अवश्य आते हैं। सूत्रों की सटीक पकड़, इकाई संगति और व्यावहारिक उदाहरणों की जानकारी से विद्यार्थी इन प्रश्नों को शीघ्रता और सटीकता के साथ हल कर सकता है। यह ज्ञान आगे ऊष्मा संचरण और ऊष्मागतिकी के अध्यायों में भी उपयोगी होता है।