विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: भौतिकी – विद्युत और चुंबकत्व विषय-वस्तु: 13.1 विद्युत आवेश
विद्युत आवेश पदार्थ का वह मूलभूत गुण है जिसके कारण विद्युत और चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न होते हैं। जब कोई वस्तु रेशम या ऊनी कपड़े पर रगड़ी जाती है, तो वह छोटे-छोटे कागज के टुकड़ों को आकर्षित करने लगती है। इसी घटना से विद्युत आवेश की अवधारणा का जन्म हुआ। आवेशित होने का यह गुण इलेक्ट्रॉनों और प्रोटॉनों की उपस्थिति के कारण होता है। प्रोटॉन पर धन आवेश तथा इलेक्ट्रॉन पर ऋण आवेश होता है, जबकि न्यूट्रॉन विद्युत रूप से उदासीन होता है। किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉनों और प्रोटॉनों की संख्या समान होने पर वह उदासीन रहता है, परंतु इलेक्ट्रॉनों की अधिकता या कमी होने पर वह आवेशित हो जाता है।
आवेश दो प्रकार के होते हैं — धनात्मक आवेश और ऋणात्मक आवेश। दो समान आवेश (दोनों धनात्मक या दोनों ऋणात्मक) एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं, जबकि विपरीत आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। आवेश का SI मात्रक कूलॉम (C) है। एक कूलॉम आवेश बहुत बड़ा आवेश होता है; एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश लगभग 1.6 × 10⁻¹⁹ कूलॉम होता है। रेलवे के विद्युत क्षेत्र में चालकों, तारों और उपकरणों के आवेशन को समझना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि सुरक्षित संचालन का आधार आवेश की सही समझ पर ही टिका होता है।
इस अध्याय में हम आवेश के प्रकार, आवेश का क्वांटीकरण, आवेश संरक्षण का नियम, कूलॉम का नियम तथा आवेशन की विधियाँ (रगड़ना, संपर्क और प्रेरण) का अध्ययन करेंगे। आवेशों के बीच लगने वाले बल की गणना करने की क्षमता तकनीशियन के लिए आवश्यक है, क्योंकि इसी से विद्युत स्थैतिक बल और उसके प्रभाव का अनुमान लगाया जा सकता है। परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें अधिकांश प्रश्न सीधे सूत्रों और नियमों पर आधारित होते हैं।
धनात्मक आवेश: जब कोई वस्तु इलेक्ट्रॉन खो देती है, तो उसमें प्रोटॉन की अधिकता हो जाती है और वह धनात्मक आवेशित हो जाती है। उदाहरण के लिए, काँच की छड़ को रेशम से रगड़ने पर काँच की छड़ धनात्मक आवेशित हो जाती है, क्योंकि यह रेशम को इलेक्ट्रॉन दे देती है।
ऋणात्मक आवेश: जब कोई वस्तु अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन प्राप्त कर लेती है, तो वह ऋणात्मक आवेशित हो जाती है। उदाहरण के लिए, ऊनी कपड़े से रगड़ी गई एबोनाइट की छड़ ऋणात्मक आवेशित हो जाती है, क्योंकि यह ऊन से इलेक्ट्रॉन ग्रहण करती है।
आवेशन की तीन विधियाँ:
रगड़कर आवेशन: इस विधि में दो अलग-अलग पदार्थों को आपस में रगड़ा जाता है। रगड़ने से एक पदार्थ के इलेक्ट्रॉन दूसरे पदार्थ में स्थानांतरित हो जाते हैं। जो पदार्थ इलेक्ट्रॉन खोता है वह धन आवेशित और जो प्राप्त करता है वह ऋण आवेशित हो जाता है। दोनों पर आवेश का परिमाण बराबर होता है परंतु चिह्न विपरीत होते हैं।
संपर्क द्वारा आवेशन: इस विधि में किसी आवेशित वस्तु को किसी उदासीन वस्तु से स्पर्श कराया जाता है। आवेश दोनों वस्तुओं में विभाजित हो जाता है और दोनों समान प्रकार के आवेश प्राप्त करते हैं। यदि आवेशित वस्तु धनात्मक है तो उसके संपर्क से उदासीन वस्तु भी धनात्मक हो जाती है।
प्रेरण द्वारा आवेशन: इस विधि में वस्तुओं को स्पर्श कराए बिना ही आवेशित किया जाता है। जब कोई आवेशित वस्तु किसी चालक के निकट लाई जाती है, तो चालक में आवेश का पुनर्वितरण हो जाता है। निकट वाले सिरे पर विपरीत आवेश और दूर वाले सिरे पर समान आवेश इकट्ठा हो जाता है। चालक को भूसम्पर्कित करने पर आवेश स्थानांतरित किया जा सकता है। इस प्रकार संपर्क के बिना ही चालक आवेशित हो जाता है।
आवेश का क्वांटीकरण (Quantization): किसी वस्तु पर उपस्थित आवेश हमेशा मूल आवेश e (1.6 × 10⁻¹⁹ C) का पूर्ण गुणज होता है। इसे सूत्र Q = ne द्वारा व्यक्त किया जाता है, जहाँ Q कुल आवेश, n एक पूर्णांक तथा e मूल आवेश है। इसका अर्थ है कि आवेश सतत नहीं बल्कि क्वांटित (छोटे-छोटे पैकेटों में) होता है। उदाहरण के लिए, किसी वस्तु पर 3.2 × 10⁻¹⁹ कूलॉम आवेश का अर्थ है कि उस पर 2 इलेक्ट्रॉनों की अधिकता है, क्योंकि n = Q/e = 3.2 × 10⁻¹⁹ / 1.6 × 10⁻¹⁹ = 2।
आवेश का संरक्षण (Conservation of Charge): इस नियम के अनुसार ब्रह्मांड में कुल आवेश सदैव नियत रहता है। आवेश को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, केवल एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है। रगड़ने पर एक वस्तु जितना धन आवेश प्राप्त करती है, उतना ही ऋण आवेश दूसरी वस्तु पर उत्पन्न हो जाता है, जिससे दोनों का कुल आवेश शून्य रहता है।
कूलॉम का नियम (Coulomb's Law): दो आवेशों के बीच लगने वाला विद्युत स्थैतिक बल दोनों आवेशों के परिमाण के गुणनफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इसे सूत्र द्वारा इस प्रकार लिखते हैं:
F = k × (q₁ × q₂) / r²
जहाँ F बल (न्यूटन), q₁ और q₂ आवेश (कूलॉम), r दूरी (मीटर) तथा k निर्वात में समानुपाती नियतांक है जिसका मान 9 × 10⁹ N·m²/C² है। निर्वात में k = 1/(4πε₀) होता है, जहाँ ε₀ विद्युतशीलता नियतांक है। कूलॉम का नियम केवल बिंदु आवेशों के लिए सत्य है तथा बल आवेशों को मिलाने वाली सरल रेखा के अनुदिश कार्य करता है।
उदाहरण 1: दो आवेश 2 × 10⁻⁶ C और 3 × 10⁻⁶ C एक-दूसरे से 0.1 मीटर की दूरी पर रखे हैं। उनके बीच लगने वाला बल ज्ञात कीजिए। (k = 9 × 10⁹)
हल: F = k × q₁ × q₂ / r² = 9 × 10⁹ × (2 × 10⁻⁶ × 3 × 10⁻⁶) / (0.1)²
F = 9 × 10⁹ × 6 × 10⁻¹² / 10⁻² = 54 × 10⁻³ / 10⁻² = 5.4 न्यूटन।
चूँकि दोनों आवेश समान चिह्न के हैं, इसलिए बल प्रतिकर्षणात्मक है।
किसी आवेश के चारों ओर वह क्षेत्र जिसमें किसी अन्य आवेश पर बल अनुभव होता है, विद्युत क्षेत्र कहलाता है। किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता E उस बिंदु पर रखे एकांक धन परीक्षण आवेश पर लगने वाले बल के बराबर होती है। सूत्र के रूप में:
E = F/q या बिंदु आवेश के लिए E = kQ/r²
विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का SI मात्रक न्यूटन प्रति कूलॉम (N/C) अथवा वोल्ट प्रति मीटर (V/m) है। यह एक सदिश राशि है। विद्युत क्षेत्र रेखाएँ काल्पनिक रेखाएँ हैं जो धन आवेश से निकलकर ऋण आवेश पर समाप्त होती हैं। ये रेखाएँ कभी एक-दूसरे को काटती नहीं हैं तथा जहाँ क्षेत्र तीव्र अधिक होता है वहाँ रेखाएँ सघन होती हैं। एकांक आवेश पर विद्युत स्थैतिक बल F = qE होता है। विद्युत क्षेत्र रेखाओं की सघनता क्षेत्र की प्रबलता का माप है।
उदाहरण 2: 3 × 10⁻⁶ C का आवेश किसी बिंदु पर 6 N/C का विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है। उस बिंदु पर रखे 2 × 10⁻⁶ C आवेश पर बल ज्ञात कीजिए।
हल: F = qE = 2 × 10⁻⁶ × 6 = 12 × 10⁻⁶ न्यूटन, अर्थात् F = 1.2 × 10⁻⁵ न्यूटन।
| संकल्पना | परिभाषा / सूत्र | SI मात्रक |
|---|---|---|
| आवेश (Q) | पदार्थ का वह गुण जिससे विद्युत बल उत्पन्न होता है | कूलॉम (C) |
| मूल आवेश (e) | एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश | 1.6 × 10⁻¹⁹ C |
| क्वांटीकरण | Q = ne, जहाँ n पूर्णांक है | कूलॉम (C) |
| विद्युत क्षेत्र (E) | E = F/q = kQ/r² | N/C या V/m |
| कूलॉम बल | F = k q₁q₂ / r² | न्यूटन (N) |
| आवेश घनत्व | आवेश / आयतन या क्षेत्रफल | C/m³ या C/m² |
| विधि | संपर्क की आवश्यकता | आवेश का प्रकार | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| रगड़कर | नहीं (परंतु दो वस्तुएँ स्पर्श में) | एक धन, एक ऋण | काँच की छड़ और रेशम |
| संपर्क द्वारा | हाँ | दोनों समान चिह्न के | आवेशित गोला स्पर्श कराने पर |
| प्रेरण द्वारा | नहीं | मूल आवेश से विपरीत चिह्न | आवेशित छड़ निकट लाने पर चालक आवेशित |
flowchart TD
A[विद्युत आवेश] --> B[प्रकार]
A --> C[गुणधर्म]
A --> D[आवेशन की विधियाँ]
A --> E[कूलॉम का नियम]
B --> B1[धनात्मक +]
B --> B2[ऋणात्मक -]
C --> C1[क्वांटीकरण Q = ne]
C --> C2[संरक्षण नियम]
C --> C3[समान आवेश प्रतिकर्षण]
C --> C4[विपरीत आवेश आकर्षण]
D --> D1[रगड़कर]
D --> D2[संपर्क द्वारा]
D --> D3[प्रेरण द्वारा]
E --> E1[F = k q1q2 / r²]
E --> E2[केवल बिंदु आवेशों के लिए]
k का मान 9 × 10⁹ लिखना भूलना, विशेषकर जब माध्यम निर्वात के अतिरिक्त हो।Q = ne में n को भिन्नात्मक मानना, जबकि n सदैव पूर्णांक होता है।F = k q₁q₂/r² और k = 9 × 10⁹ अवश्य याद रखें।Q = ne से इलेक्ट्रॉनों की संख्या n ज्ञात करने के प्रश्न बार-बार आते हैं।विद्युत आवेश संपूर्ण विद्युत विज्ञान की नींव है। इस अध्याय में हमने आवेश के दो प्रकारों — धनात्मक और ऋणात्मक — तथा उनके आकर्षण-प्रतिकर्षण के गुणधर्मों को समझा। हमने आवेशन की तीन विधियों, आवेश के क्वांटीकरण तथा संरक्षण के नियमों का अध्ययन किया। कूलॉम के नियम की सहायता से दो आवेशों के बीच बल की गणना करना और विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करना सीखा। ये अवधारणाएँ ही आगे विद्युत धारा, विभवांतर, प्रतिरोध तथा चुंबकत्व जैसे सभी विद्युत अध्यायों का आधार हैं। रेलवे टेक्नीशियन के लिए यह समझ आवश्यक है, क्योंकि विद्युत प्रणालियों के सुरक्षित संचालन और निरीक्षण में आवेश के व्यवहार की गहरी समझ काम आती है। नियमित अभ्यास और सूत्रों की पुनरावृत्ति से इस अध्याय में पूर्ण महारत प्राप्त की जा सकती है।