चुंबकीय क्षेत्र Notes

चुंबकीय क्षेत्र

विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: भौतिकी – विद्युत और चुंबकत्व विषय-वस्तु: 13.7 चुंबकीय क्षेत्र

1. परिचय

चुंबक एक ऐसा पदार्थ है जो लोहे, निकल, कोबाल्ट जैसे चुंबकीय पदार्थों को आकर्षित करता है। किसी चुंबक के चारों ओर का वह क्षेत्र जिसमें उसका आकर्षण या प्रतिकर्षण प्रभाव अनुभव होता है, चुंबकीय क्षेत्र कहलाता है। चुंबकीय क्षेत्र को चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं (बल रेखाओं) द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। ये रेखाएँ उत्तर ध्रुव (N) से निकलकर दक्षिण ध्रुव (S) पर समाप्त होती हैं। रेखाओं की सघनता जहाँ अधिक होती है, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र प्रबल होता है। पृथ्वी स्वयं एक विशाल चुंबक है, जिसके कारण कम्पास सुई हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में संकेत करती है।

चुंबक में दो ध्रुव होते हैं — उत्तर ध्रुव (N) और दक्षिण ध्रुव (S)। दो समान ध्रुव प्रतिकर्षित होते हैं और विपरीत ध्रुव आकर्षित होते हैं। यदि किसी चुंबक को दो टुकड़ों में तोड़ा जाए, तो प्रत्येक टुकड़ा एक नया पूर्ण चुंबक बन जाता है जिसमें दोनों ध्रुव होते हैं। चुंबकीय ध्रुवों को अलग करना असंभव है, अर्थात् एकध्रुवीय चुंबक (मोनोपोल) का अस्तित्व नहीं होता। रेलवे के विद्युत उपकरणों, अलार्म प्रणाली और विद्युत इंजनों में चुंबकीय क्षेत्र का व्यापक उपयोग होता है।

इस अध्याय में हम चुंबकीय क्षेत्र की परिभाषा, चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुणधर्म, चुंबकीय क्षेत्र का SI मात्रक टेस्ला, धारावाही चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र (ओर्स्टेड का प्रयोग), परिनालिका तथा पृथ्वी का चुंबकत्व का अध्ययन करेंगे। चुंबकीय क्षेत्र की अवधारणा विद्युतचुंबकीय प्रभाव और मोटर-जनित्र के अध्यायों की नींव है।

2. चुंबकीय क्षेत्र और चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ

किसी चुंबक के चारों ओर वह क्षेत्र जिसमें चुंबकीय बल का प्रभाव अनुभव होता है, चुंबकीय क्षेत्र कहलाता है। चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता को चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं द्वारा दर्शाया जाता है। चुंबकीय क्षेत्र की SI इकाई टेस्ला (T) है, जिसका नाम वैज्ञानिक निकोला टेस्ला के नाम पर रखा गया है। चुंबकीय क्षेत्र एक सदिश राशि है और इसे B से प्रदर्शित करते हैं। छोटे क्षेत्रों में गाउस (G) इकाई भी उपयोग होती है, जहाँ 1 T = 10⁴ G होता है।

चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुणधर्म:

  1. ये रेखाएँ उत्तर ध्रुव (N) से निकलकर दक्षिण ध्रुव (S) पर समाप्त होती हैं।
  2. ये रेखाएँ बंद वक्र होती हैं, चुंबक के बाहर N से S तक और अंदर S से N तक।
  3. ये रेखाएँ कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं।
  4. जहाँ रेखाएँ सघन होती हैं, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र प्रबल होता है।
  5. रेखाओं पर किसी बिंदु पर स्पर्श रेखा की दिशा, उस बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को दर्शाती है।

धारावाही चालक का चुंबकीय क्षेत्र: 1820 में ओर्स्टेड ने खोजा कि धारा प्रवाहित करने वाले तार के पास रखी कम्पास सुई विक्षेपित हो जाती है। इससे सिद्ध हुआ कि धारावाही चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। क्षेत्र की दिशा तार के चारों ओर संकेंद्रीय वृत्तों के रूप में होती है। सरल तार के लिए क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने का नियम दक्षिण हस्त अंगूठा नियम या मैक्सवेल का दक्षिणावर्त नियम है।

3. धारावाही चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र

मैक्सवेल का दक्षिणावर्त नियम (Right Hand Thumb Rule): यदि हम धारा की दिशा में अपने दाहिने हाथ के अंगूठे को रखें, तो मुड़ी हुई अंगुलियाँ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दर्शाती हैं। इस नियम द्वारा सरल धारावाही तार के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा ज्ञात की जा सकती है।

वृत्तीय पाश का चुंबकीय क्षेत्र: जब धारा वृत्तीय पाश में प्रवाहित होती है, तो पाश के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। पाश के तल के लंबवत चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ होती हैं। पाश का व्यवहार एक छोटे चुंबक (चुंबकीय द्विध्रुव) के समान होता है, जिसका एक तल N ध्रुव की तरह और दूसरा तल S ध्रुव की तरह कार्य करता है।

परिनालिका (Solenoid): किसी कुंडली के चारों ओर अलग-अलग फेरों में लिपटी हुई विद्युत रोधी तार की कुंडली जिसमें धारा प्रवाहित होती है, परिनालिका कहलाती है। परिनालिका के अंदर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान तथा मजबूत होता है और बाहर यह छड़ चुंबक के समान क्षेत्र उत्पन्न करती है। परिनालिका में लोहे का क्रोड डालने से उसकी चुंबकीय क्षमता अत्यधिक बढ़ जाती है, और ऐसी कुंडली को विद्युत चुंबक कहते हैं। परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र B = μ₀nI होता है, जहाँ n प्रति मीटर फेरों की संख्या और I धारा है।

उदाहरण 1: एक परिनालिका में प्रति मीटर 500 फेरे हैं और उसमें 4 एम्पियर धारा प्रवाहित होती है। यदि μ₀ = 4π × 10⁻⁷ है, तो भीतरी चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात कीजिए।

हल: B = μ₀nI = 4π × 10⁻⁷ × 500 × 4 = 4π × 10⁻⁷ × 2000 = 8π × 10⁻⁴ ≈ 2.51 × 10⁻³ टेस्ला।

4. पृथ्वी का चुंबकत्व और ध्रुवों के गुणधर्म

पृथ्वी एक विशाल चुंबक की भाँति व्यवहार करती है। पृथ्वी का भौगोलिक उत्तर ध्रुव उसके चुंबकीय दक्षिण ध्रुव के निकट स्थित है और भौगोलिक दक्षिण ध्रुव चुंबकीय उत्तर ध्रुव के निकट। यही कारण है कि कम्पास सुई का उत्तर ध्रुव पृथ्वी के भौगोलिक उत्तर की ओर संकेत करता है। पृथ्वी के चुंबकीय अक्ष और भौगोलिक अक्ष के बीच एक कोण बनता है, जिसे चुंबकीय झुकाव (declination) कहते हैं।

चुंबकीय ध्रुवों के गुणधर्म:

  1. चुंबक के दोनों ध्रुवों की शक्ति (ध्रुव प्राबल्य) समान होती है।
  2. समान ध्रुव प्रतिकर्षित होते हैं, विपरीत ध्रुव आकर्षित होते हैं।
  3. चुंबक के मध्य भाग (उदासीन क्षेत्र) में आकर्षण शक्ति सबसे कम होती है।
  4. ध्रुवों को पृथक करना संभव नहीं है, प्रत्येक टुकड़े में दोनों ध्रुव बने रहते हैं।
  5. चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण ध्रुव के पास सबसे अधिक होता है।

चुंबकों के प्रकार: स्थायी चुंबक (स्टील और एल्निको से बने) अपना चुंबकत्व लंबे समय तक बनाए रखते हैं, जबकि अस्थायी चुंबक (नरम लोहे से बने) विद्युत चुंबक में उपयोग होते हैं और धारा बंद होते ही अपना चुंबकत्व खो देते हैं। विद्युत चुंबक के चुंबकत्व को धारा बदलकर नियंत्रित किया जा सकता है, इसीलिए रेलवे के लिफ्टिंग क्रेन, घंटी और रिले में विद्युत चुंबकों का उपयोग होता है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: चुंबकीय क्षेत्र से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

संकल्पना विवरण SI मात्रक
चुंबकीय क्षेत्र चुंबक के चारों ओर बल प्रभाव का क्षेत्र टेस्ला (T)
क्षेत्र रेखाएँ N से निकलकर S पर समाप्त -
चुंबकीय फ्लक्स क्षेत्र × क्षेत्रफल वेबर (Wb)
परिनालिका क्षेत्र B = μ₀nI टेस्ला (T)
1 टेस्ला 10⁴ गाउस T

तालिका 2: चुंबकीय क्षेत्र और विद्युत क्षेत्र की तुलना

गुण चुंबकीय क्षेत्र विद्युत क्षेत्र
स्रोत चुंबक / धारावाही चालक आवेश
रेखाएँ बंद वक्र, N से S तक धन से ऋण तक
एकांक पोल/आवेश नहीं होता (मोनोपोल नहीं) होता है
मात्रक टेस्ला (T) V/m या N/C

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[चुंबकीय क्षेत्र] --> B[चुंबक]
    A --> C[क्षेत्र रेखाएँ]
    A --> D[धारावाही चालक का क्षेत्र]
    A --> E[पृथ्वी का चुंबकत्व]
    B --> B1[ध्रुव N और S]
    B --> B2[समान ध्रुव प्रतिकर्षण]
    C --> C1[N से S तक]
    C --> C2[कभी नहीं काटतीं]
    D --> D1[ओर्स्टेड का प्रयोग]
    D --> D2[परिनालिका B = μ0nI]
    D --> D3[दाहिने हाथ का अंगूठा नियम]
    E --> E1[पृथ्वी विशाल चुंबक]
    E --> E2[चुंबकीय झुकाव]

7. महत्वपूर्ण चित्र (SVG)

छड़ चुंबक की क्षेत्र रेखाएँ N S रेखाएँ N से बाहर की ओर रेखाएँ S पर समाप्त चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं स्वर्ण नियम रेखाएँ N से निकलकर S पर समाप्त होती हैं।

धारावाही चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र I संकेंद्रीय क्षेत्र रेखाएँ क्षेत्र की दिशा अंगुलियों के मुड़ने की दिशा में धारा की दिशा में अंगूठा, अंगुलियाँ क्षेत्र की दिशा बताती हैं दाहिने हाथ का अंगूठा नियम B = μ0nI (परिनालिका के लिए) स्वर्ण नियम धारा की दिशा में अंगूठा रखकर क्षेत्र की दिशा ज्ञात करें।

8. सामान्य त्रुटियाँ

  1. चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं को चुंबक के अंदर N से S तक मानना, जबकि अंदर S से N की ओर जाती हैं।
  2. चुंबकीय क्षेत्र का मात्रक वेबर लिखना, जबकि वेबर चुंबकीय फ्लक्स का मात्रक है और टेस्ला क्षेत्र का।
  3. यह मानना कि चुंबक के ध्रुवों को अलग किया जा सकता है, जबकि एकध्रुवीय चुंबक का अस्तित्व नहीं होता।
  4. धारावाही चालक के चारों ओर क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने में गलत हाथ का नियम प्रयोग करना।
  5. चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को काट सकती हैं, यह भ्रम पालना।
  6. पृथ्वी के चुंबकीय ध्रुवों की स्थिति को गलत समझना — भौगोलिक उत्तर के पास चुंबकीय दक्षिण ध्रुव है।
  7. परिनालिका के अंदर क्षेत्र को असमान मानना, जबकि अंदर क्षेत्र एकसमान होता है।
  8. 1 T = 10⁴ G के संबंध को याद न रखना।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. चुंबकीय क्षेत्र का मात्रक टेस्ला और फ्लक्स का मात्रक वेबर अलग-अलग याद रखें।
  2. ओर्स्टेड का प्रयोग (धारा से कम्पास का विक्षेप) बार-बार पूछा जाता है, इसका नाम और निष्कर्ष याद रखें।
  3. दाहिने हाथ के अंगूठे का नियम धारा की दिशा में अंगूठा रखकर लगाएँ।
  4. परिनालिका के अंदर B = μ₀nI सूत्र से संख्यात्मक प्रश्नों का अभ्यास करें।
  5. क्षेत्र रेखाओं के गुणधर्मों की सूची कंठस्थ करें, क्योंकि ये सामान्य ज्ञान प्रश्नों में आते हैं।
  6. पृथ्वी के चुंबकत्व में भौगोलिक और चुंबकीय ध्रुवों के संबंध को स्पष्ट समझें।
  7. विद्युत चुंबक और स्थायी चुंबक के बीच अंतर को उदाहरण सहित तैयार रखें।

10. निष्कर्ष

चुंबकीय क्षेत्र चुंबकत्व और विद्युतचुंबकत्व का मूलभूत आधार है। इस अध्याय में हमने चुंबकीय क्षेत्र की परिभाषा, चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुणधर्म और चुंबकीय क्षेत्र का SI मात्रक टेस्ला को समझा। धारावाही चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होने की घटना (ओर्स्टेड का प्रयोग) और दाहिने हाथ के अंगूठे के नियम द्वारा क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने की विधि सीखी। परिनालिका के भीतर एकसमान चुंबकीय क्षेत्र B = μ₀nI की अवधारणा तथा पृथ्वी के चुंबकत्व के सिद्धांतों का अध्ययन किया। ये सभी अवधारणाएँ विद्युत चुंबक, विद्युत मोटर और जनित्र के निर्माण का आधार हैं। रेलवे की विद्युत प्रणालियों में चुंबकीय क्षेत्र की समझ विद्युतचुंबकीय उपकरणों के संचालन, निरीक्षण और रखरखाव के लिए आवश्यक है, इसलिए इस अध्याय की अवधारणाओं को आत्मसात करना लाभदायक है।