दाब घनत्व और उत्प्लावन Notes

दाब घनत्व और उत्प्लावन

विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: भौतिकी – यांत्रिकी विषय-वस्तु: 11.9 दाब घनत्व और उत्प्लावन

1. परिचय

दाब, घनत्व और उत्प्लावन तरल पदार्थों और द्रवों की यांत्रिकी से संबंधित तीन महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं। दाब प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाला बल है, घनत्व प्रति एकांक आयतन का द्रव्यमान है, और उत्प्लावन वह बल है जो तरल में डूबी वस्तु को ऊपर की ओर धकेलता है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में इन अवधारणाओं से 2 से 4 प्रश्न पूछे जाते हैं। रेलवे के कार्यक्षेत्र में हाइड्रोलिक ब्रेक, बॉयलर का दाब और ट्रेन की हवाई ब्रेक व्यवस्था में दाब की अवधारणा का व्यापक उपयोग होता है।

दाब की अवधारणा को समझने के लिए बल और क्षेत्रफल का संबंध आवश्यक है। समान बल यदि कम क्षेत्रफल पर लगाया जाए तो दाब अधिक होता है, और यदि अधिक क्षेत्रफल पर लगाया जाए तो दाब कम होता है। इसी कारण तीखी सुई कम बल में भी त्वचा को भेद देती है, जबकि कुंद सुई से ऐसा नहीं होता। दाब की SI इकाई पास्कल है। एक पास्कल वह दाब है जब एक न्यूटन बल एक वर्ग मीटर क्षेत्रफल पर लगता है। रेलवे की पटरियों पर ट्रेन का भार अधिक क्षेत्रफल में फैला होता है, जिससे दाब कम होकर पटरियों पर भार कम पड़ता है।

इस अध्याय में हम दाब की परिभाषा और गणना, द्रवों में दाब के गुण, घनत्व और आपेक्षिक घनत्व की अवधारणा, उत्प्लावन बल तथा आर्किमिडीज के सिद्धांत का विस्तार से अध्ययन करेंगे। आर्किमिडीज का सिद्धांत बताता है कि किसी तरल में पूर्णतः या आंशिक रूप से डूबी वस्तु पर ऊपर की ओर एक उत्प्लावन बल लगता है, जो वस्तु द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर होता है। इसी सिद्धांत पर जलयान और जहाज तैरते हैं।

2. दाब

दाब को प्रति एकांक क्षेत्रफल पर कार्य करने वाले बल के रूप में परिभाषित किया जाता है। यदि किसी क्षेत्रफल A पर लंबवत बल F लग रहा है, तो दाब P = F ÷ A होता है। दाब की SI इकाई पास्कल है, जिसे Pa लिखा जाता है। एक पास्कल = एक न्यूटन प्रति वर्ग मीटर। दाब एक अदिश राशि है। दाब का व्यावहारिक महत्व बल और क्षेत्रफल के अनुपात में निहित है — क्षेत्रफल कम करने पर दाब बढ़ता है और क्षेत्रफल बढ़ाने पर दाब घटता है।

दाब बढ़ाने के उदाहरण हैं — तीखी सुई, नुकीली कील, चाकू की धार, कुल्हाड़ी का फल। इनमें क्षेत्रफल कम होने से दाब अधिक होता है। दाब घटाने के उदाहरण हैं — ट्रकों और ट्रेनों के चौड़े पहिये, ट्रैक्टर के चौड़े टायर, बर्फ पर चलने के लिए स्की। रेलवे के संदर्भ में ट्रेन के पहियों की चौड़ाई और पटरियों के नीचे स्लीपरों का डिजाइन दाब घटाने के सिद्धांत पर आधारित है। तरल दाब के लिए भी यही सूत्र लागू होता है, परंतु द्रव में दाब गहराई के साथ बढ़ता है, जिसे P = hdg से व्यक्त किया जाता है, जहाँ h गहराई, d घनत्व और g गुरुत्वीय त्वरण है।

उदाहरण 1: एक वस्तु का भार 200 न्यूटन है और उसका संपर्क क्षेत्रफल 4 वर्ग मीटर है। दाब ज्ञात कीजिए।

हल: दाब P = F ÷ A = 200 ÷ 4 = 50 पास्कल। अतः दाब 50 पास्कल होगा।

3. घनत्व और आपेक्षिक घनत्व

घनत्व किसी पदार्थ के प्रति एकांक आयतन में उपस्थित द्रव्यमान है। घनत्व = द्रव्यमान ÷ आयतन। घनत्व की SI इकाई किलोग्राम प्रति घन मीटर है। जल का घनत्व 1000 किलोग्राम प्रति घन मीटर होता है। घनत्व को प्रतीक d या ρ से दर्शाया जाता है। घनत्व एक अदिश राशि है। विभिन्न पदार्थों के घनत्व भिन्न-भिन्न होते हैं — लोहे का घनत्व जल से अधिक होता है, इसलिए लोहा जल में डूबता है, जबकि लकड़ी का घनत्व जल से कम होता है, इसलिए लकड़ी जल पर तैरती है।

आपेक्षिक घनत्व किसी पदार्थ के घनत्व और जल के घनत्व का अनुपात होता है। आपेक्षिक घनत्व = पदार्थ का घनत्व ÷ जल का घनत्व। चूँकि यह दो समान राशियों का अनुपात है, इसलिए आपेक्षिक घनत्व एक विमाहीन राशि है। जल का आपेक्षिक घनत्व 1 होता है। आपेक्षिक घनत्व को विशिष्ट गुरुत्व भी कहते हैं। रेलवे के संदर्भ में बैटरी में प्रयुक्त अम्ल का घनत्व, बॉयलर के जल का घनत्व और ईंधन तेल की गुणवत्ता की जाँच में घनत्व का उपयोग होता है। किसी भी पदार्थ का आपेक्षिक घनत्व 1 से अधिक होने पर वह जल में डूबेगा और 1 से कम होने पर तैरेगा।

उदाहरण 2: एक पदार्थ का द्रव्यमान 200 किलोग्राम है और आयतन 0.5 घन मीटर है। उसका घनत्व ज्ञात कीजिए।

हल: घनत्व = द्रव्यमान ÷ आयतन = 200 ÷ 0.5 = 400 किलोग्राम प्रति घन मीटर। अतः घनत्व 400 kg/m³ होगा।

4. उत्प्लावन और आर्किमिडीज का सिद्धांत

जब कोई वस्तु किसी तरल में डुबोई जाती है, तो तरल उस पर ऊपर की ओर एक बल लगाता है, जिसे उत्प्लावन बल या उत्प्लावक बल कहते हैं। उत्प्लावन बल तरल के कारण होता है और यह हमेशा ऊपर की ओर कार्य करता है। वस्तु पर नीचे की ओर उसका भार और ऊपर की ओर उत्प्लावन बल कार्य करते हैं। यदि उत्प्लावन बल वस्तु के भार से अधिक है, तो वस्तु तैरती है, और यदि कम है, तो वस्तु डूब जाती है। यदि दोनों बराबर हैं, तो वस्तु तरल में संतुलित रहती है।

आर्किमिडीज का सिद्धांत उत्प्लावन बल का मात्रात्मक वर्णन करता है। सिद्धांत के अनुसार, किसी तरल में पूर्णतः या आंशिक रूप से डूबी वस्तु पर ऊपर की ओर लगने वाला उत्प्लावन बल, वस्तु द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर होता है। इस सिद्धांत का उपयोग वस्तु के घनत्व और आपेक्षिक घनत्व के मापन में होता है। लोहे का पिंड घनत्व अधिक होने से जल में डूबता है, जबकि जहाज का औसत घनत्व जल से कम होने के कारण वह जल पर तैरता है। जहाज का खोखला डिजाइन हटाए गए जल की मात्रा बढ़ाता है, जिससे उत्प्लावन बल बढ़ जाता है। उत्प्लावन के कारण ही हाइड्रोमीटर बैटरी के अम्ल का घनत्व मापता है।

उदाहरण 3: एक वस्तु को पूर्णतः जल में डुबोने पर वह 5 किलोग्राम जल हटाती है। वस्तु पर लगने वाला उत्प्लावन बल कितना होगा? (g = 9.8 m/s²)

हल: आर्किमिडीज के सिद्धांत से उत्प्लावन बल = हटाए गए जल का भार = 5 × 9.8 = 49 न्यूटन। अतः उत्प्लावन बल 49 न्यूटन है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: दाब घनत्व उत्प्लावन की राशियाँ

राशि सूत्र SI इकाई
दाब P = F/A पास्कल (Pa)
घनत्व d = m/V kg/m³
द्रव दाब P = hdg पास्कल
उत्प्लावन बल हटाए गए तरल का भार न्यूटन

तालिका 2: पदार्थों का व्यावहारिक घनत्व

पदार्थ घनत्व के गुण जल में व्यवहार
जल 1000 kg/m³, आपेक्षिक घनत्व 1 मानक
लोहा जल से अधिक डूबता है
लकड़ी जल से कम तैरती है
जहाज (औसत) जल से कम तैरता है

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[दाब घनत्व और उत्प्लावन] --> B[दाब]
    A --> C[घनत्व]
    A --> D[उत्प्लावन]
    B --> B1[P = F/A]
    B --> B2[इकाई पास्कल]
    B --> B3[क्षेत्रफल कम दाब अधिक]
    C --> C1[d = m/V]
    C --> C2[इकाई kg/m3]
    C --> C3[आपेक्षिक घनत्व]
    D --> D1[उत्प्लावन बल ऊपर]
    D --> D2[आर्किमिडीज सिद्धांत]
    D --> D3[हटाए गए जल का भार]

7. महत्वपूर्ण चित्र (SVG)

दाब की अवधारणा P = F / A बल F इकाई न्यूटन भाग क्षेत्रफल A इकाई वर्ग मीटर दाब P = F/A इकाई पास्कल स्वर्ण नियम क्षेत्रफल कम करने पर दाब बढ़ता है, क्षेत्रफल बढ़ाने पर घटता है।

उत्प्लावन बल और आर्किमिडीज सिद्धांत वस्तु जल की सतह उत्प्लावन बल (ऊपर) भार (नीचे) उत्प्लावन बल = हटाए गए तरल का भार उदाहरण: 5 kg जल हटाने पर बल = 49 N स्वर्ण नियम उत्प्लावन बल सदैव हटाए गए तरल के भार के बराबर होता है।

8. सामान्य त्रुटियाँ

  1. दाब को बल ही समझ लेना; दाब प्रति एकांक क्षेत्रफल बल है।
  2. दाब की इकाई को न्यूटन लिखना; दाब की इकाई पास्कल होती है।
  3. घनत्व के सूत्र में द्रव्यमान और आयतन को उलट देना।
  4. आपेक्षिक घनत्व की इकाई kg/m³ लिखना; आपेक्षिक घनत्व विमाहीन राशि है।
  5. उत्प्लावन बल को वस्तु के भार से जोड़ना, जबकि वह हटाए गए तरल के भार के बराबर है।
  6. तैरने और डूबने की स्थिति में उत्प्लावन बल और भार का संबंध गलत समझना।
  7. द्रव दाब के सूत्र P = hdg में गहराई के बजाय ऊँचाई के कुछ अन्य मान का उपयोग करना।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. दाब का सूत्र P = F/A और इकाई पास्कल सदैव याद रखें।
  2. घनत्व = द्रव्यमान ÷ आयतन और इकाई kg/m³ कंठस्थ रखें।
  3. आर्किमिडीज के सिद्धांत का कथन याद रखें — उत्प्लावन बल हटाए गए तरल के भार के बराबर।
  4. तैरने की शर्त याद रखें — वस्तु का घनत्व तरल के घनत्व से कम होना चाहिए।
  5. दाब बढ़ाने और घटाने के व्यावहारिक उदाहरण (सुई, ट्रैक्टर टायर) परीक्षा में पूछे जाते हैं।
  6. आपेक्षिक घनत्व विमाहीन राशि है, इस तथ्य को स्मरण रखें।
  7. द्रव दाब P = hdg में गहराई बढ़ने पर दाब बढ़ता है, यह संबंध प्रायः पूछा जाता है।

10. निष्कर्ष

दाब, घनत्व और उत्प्लावन तरल पदार्थों की यांत्रिकी के तीन स्तंभ हैं। इस अध्याय में हमने दाब को प्रति एकांक क्षेत्रफल बल के रूप में, घनत्व को प्रति एकांक आयतन द्रव्यमान के रूप में और उत्प्लावन बल को आर्किमिडीज के सिद्धांत के रूप में समझा। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में ये अवधारणाएँ सरल और निश्चित अंक देने वाली हैं। रेलवे के हाइड्रोलिक ब्रेक, बॉयलर दाब, बैटरी अम्ल का घनत्व और जहाज तथा पुल की रचना में इनका व्यापक उपयोग होता है। घनत्व के आधार पर वस्तुओं के तैरने-डूबने का निर्धारण आर्किमिडीज सिद्धांत से होता है। इन अवधारणाओं की दृढ़ पकड़ से परीक्षा में सरलता से अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।