13.4 प्रतिरोध और ओम का नियम Notes

13.4 प्रतिरोध और ओम का नियम

विषय: रेलवे ग्रुप D – भौतिकी (विद्युत और चुंबकत्व) अध्याय: 13.4 प्रतिरोध और ओम का नियम विषय-वस्तु: प्रतिरोध, ओम नियम

1. परिचय

विद्युत प्रतिरोध वह गुण है जिसके कारण चालक में विद्युत धारा के प्रवाह में बाधा उत्पन्न होती है। जब किसी चालक में विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो चालक के मुक्त इलेक्ट्रॉन परमाणुओं से टकराते हैं और उनकी गति में बाधा आती है; इसी बाधा को विद्युत प्रतिरोध कहते हैं। प्रतिरोध जितना अधिक होता है, धारा का प्रवाह उतना ही कम होता है। प्रतिरोध की SI इकाई ओम (Ω) है, जो जर्मन भौतिक विज्ञानी जॉर्ज साइमन ओम के नाम पर रखी गई है।

ओम का नियम विद्युत परिपथ का सबसे महत्वपूर्ण नियम है, जो विभवांतर, धारा और प्रतिरोध के बीच संबंध स्थापित करता है। जर्मन वैज्ञानिक जॉर्ज साइमन ओम ने सन् 1827 में इस नियम को प्रतिपादित किया। इस नियम के अनुसार, यदि भौतिक अवस्थाएँ (ताप आदि) समान रहें तो किसी चालक के सिरों के बीच विभवांतर उसमें प्रवाहित होने वाली धारा के अनुक्रमानुपाती होता है। ओम का नियम विद्युत सुरक्षा, विद्युत उपकरणों के डिजाइन और दैनिक जीवन के अनेक कार्यों का आधार है।

रेलवे ग्रुप D परीक्षा में प्रतिरोध और ओम का नियम अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। ओम के नियम का सूत्र (V = IR), प्रतिरोध की इकाई, प्रतिरोधकता, श्रेणी-समानांतर संयोजन के तुल्य प्रतिरोध तथा संख्यात्मक प्रश्न परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं। इस अध्याय में इन सभी बिंदुओं को विस्तार से और सरल भाषा में समझाया गया है।

2. विद्युत प्रतिरोध

प्रतिरोध की परिभाषा: किसी चालक में धारा के प्रवाह के विरोध करने वाली राशि को विद्युत प्रतिरोध कहते हैं। यह चालक का वह गुण है जो धारा के प्रवाह में बाधा उत्पन्न करता है।

प्रतिरोध का सूत्र: (R = \frac{V}{I}) - यहाँ (R) = प्रतिरोध (ओम), (V) = विभवांतर (वोल्ट), (I) = धारा (एम्पियर)।

एक ओम की परिभाषा: यदि किसी चालक के दोनों सिरों के बीच 1 वोल्ट का विभवांतर लगाने पर उसमें 1 एम्पियर धारा प्रवाहित हो, तो चालक का प्रतिरोध 1 ओम होता है।

प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक: - लंबाई (l): प्रतिरोध चालक की लंबाई के अनुक्रमानुपाती होता है। (R \propto l)। चालक जितना लंबा होगा, प्रतिरोध उतना ही अधिक होगा। - अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल (A): प्रतिरोध क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। (R \propto 1/A)। मोटा तार पतले तार की तुलना में कम प्रतिरोध देता है। - पदार्थ की प्रकृति: अलग-अलग पदार्थों के प्रतिरोध अलग-अलग होते हैं। - ताप: सामान्यतः चालक (धातुओं) के प्रतिरोध में ताप बढ़ने पर वृद्धि होती है, जबकि अर्धचालकों के प्रतिरोध में ताप बढ़ने पर कमी आती है।

प्रतिरोधकता (विशिष्ट प्रतिरोध): - प्रतिरोध का सूत्र: (R = \rho \frac{l}{A}) - यहाँ (\rho) (रो) = पदार्थ की प्रतिरोधकता। - प्रतिरोधकता (\rho = \frac{RA}{l}) - प्रतिरोधकता की SI इकाई ओम-मीटर (Ωm) है। - प्रतिरोधकता केवल पदार्थ की प्रकृति और ताप पर निर्भर करती है, लंबाई और क्षेत्रफल पर नहीं।

चालक, कुचालक और अर्धचालक: - चालक: कम प्रतिरोध वाले पदार्थ, जैसे तांबा, एल्युमिनियम, चाँदी। चाँदी सबसे अच्छा चालक है। - कुचालक: अधिक प्रतिरोध वाले पदार्थ, जैसे रबर, लकड़ी, काँच। - अर्धचालक: मध्यम प्रतिरोध वाले पदार्थ, जैसे सिलिकॉन, जर्मेनियम। - प्रतिरोधकता के घटते क्रम में: चालक < अर्धचालक < कुचालक।

उदाहरण 1: एक चालक में 6 वोल्ट विभवांतर लगाने पर 2 एम्पियर धारा प्रवाहित होती है। चालक का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। - हल: (R = V/I = 6/2 = 3) ओम। - उत्तर: प्रतिरोध 3 ओम है।

उदाहरण 2: एक चालक का प्रतिरोध 4 ओम है। उसमें 12 वोल्ट लगाने पर धारा कितनी होगी? - हल: (I = V/R = 12/4 = 3) एम्पियर। - उत्तर: धारा 3 एम्पियर होगी।

3. ओम का नियम

ओम का नियम: जर्मन वैज्ञानिक जॉर्ज साइमन ओम के अनुसार, "यदि किसी चालक की भौतिक अवस्थाएँ (जैसे ताप, दाब) समान रहें तो चालक के सिरों के बीच विभवांतर उसमें प्रवाहित होने वाली धारा के अनुक्रमानुपाती होता है।"

गणितीय रूप: (V \propto I) अर्थात (V = IR) - यहाँ (V) = विभवांतर (वोल्ट), (I) = धारा (एम्पियर), (R) = प्रतिरोध (ओम)।

सूत्र के रूपांतरण: - (V = I \times R) - (I = V/R) - (R = V/I)

ओम के नियम की शर्तें: - ताप स्थिर रहना चाहिए। - चालक की अवस्था समान रहनी चाहिए। - ओम का नियम आदर्श चालकों पर लागू होता है। - डायोड, ट्रांजिस्टर आदि युक्तियों पर ओम का नियम लागू नहीं होता।

V-I ग्राफ: - ओम के नियम के अनुसार V तथा I का ग्राफ एक सरल रेखा होती है। - सरल रेखा का ढाल (ढलान) (R = V/I) के बराबर होता है। - यदि ग्राफ सरल रेखा नहीं है तो चालक ओम का नियम नहीं मानता।

ओम का नियम के पालनकर्ता और अपालनकर्ता: - ओमीय पदार्थ: धात्विक चालक जैसे तांबा, एल्युमिनियम ओम का नियम मानते हैं। - अओमीय पदार्थ: डायोड, थर्मिस्टर, जैसे यंत्र ओम के नियम का पालन नहीं करते।

उदाहरण 3: एक परिपथ में 5 ओम प्रतिरोधक पर 2 एम्पियर धारा प्रवाहित हो रही है। विभवांतर ज्ञात कीजिए। - हल: (V = I \times R = 2 \times 5 = 10) वोल्ट। - उत्तर: विभवांतर 10 वोल्ट है।

उदाहरण 4: एक बल्ब का प्रतिरोध 40 ओम है और उस पर 200 वोल्ट विभवांतर है। प्रवाहित धारा ज्ञात कीजिए। - हल: (I = V/R = 200/40 = 5) एम्पियर। - उत्तर: धारा 5 एम्पियर है।

4. प्रतिरोध से संबंधित संख्यात्मक उदाहरण

मुख्य सूत्र: - (R = V/I) - (R = \rho l/A) - (\rho = RA/l) - विद्युत शक्ति (P = V \times I = I^2R = V^2/R)

महत्वपूर्ण बिंदु: - ताप स्थिर रहने पर किसी चालक के लिए V/I स्थिर रहता है, यही ओम का नियम है। - लंबाई दोगुनी करने पर प्रतिरोध दोगुना हो जाता है। - क्षेत्रफल दोगुना करने पर प्रतिरोध आधा हो जाता है। - चालक का प्रतिरोध ताप बढ़ने पर बढ़ता है (धातुओं में)।

उदाहरण 5: एक तांबे के तार की लंबाई दोगुनी कर दी जाए तो उसका प्रतिरोध कितना हो जाएगा? - हल: (R \propto l) के अनुसार लंबाई दोगुनी करने पर प्रतिरोध दोगुना हो जाता है। - उत्तर: प्रतिरोध दोगुना हो जाएगा।

उदाहरण 6: एक चालक में 220 वोल्ट लगाने पर 2 एम्पियर धारा बहती है। चालक का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। - हल: (R = V/I = 220/2 = 110) ओम। - उत्तर: प्रतिरोध 110 ओम है।

उदाहरण 7: यदि किसी चालक की लंबाई बढ़ा दी जाए तो प्रतिरोध पर क्या प्रभाव पड़ेगा? - हल: (R \propto l), अतः लंबाई बढ़ाने पर प्रतिरोध बढ़ता है। - उत्तर: प्रतिरोध बढ़ेगा।

उदाहरण 8: एक तार का प्रतिरोध 10 ओम है। उसी पदार्थ के दूसरे तार की लंबाई समान पर क्षेत्रफल आधा है तो उसका प्रतिरोध कितना होगा? - हल: (R \propto 1/A), क्षेत्रफल आधा करने पर प्रतिरोध दोगुना = 20 ओम। - उत्तर: प्रतिरोध 20 ओम होगा।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1

राशि सूत्र SI इकाई
विभवांतर (V = I \times R) वोल्ट (V)
धारा (I = V/R) एम्पियर (A)
प्रतिरोध (R = V/I) ओम (Ω)
प्रतिरोधकता (\rho = RA/l) ओम-मीटर (Ωm)

तालिका 2

पदार्थ प्रकार उदाहरण
चालक कम प्रतिरोध तांबा, चाँदी, एल्युमिनियम
अर्धचालक मध्यम प्रतिरोध सिलिकॉन, जर्मेनियम
कुचालक अधिक प्रतिरोध रबर, लकड़ी, काँच
सबसे अच्छा चालक धातु चाँदी

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[13.4 प्रतिरोध और ओम का नियम] --> B[प्रतिरोध]
    A --> C[ओम का नियम]
    A --> D[प्रतिरोधकता]
    B --> B1[R = V / I]
    B --> B2[इकाई - ओम]
    C --> C1[V = I x R]
    C --> C2[ओमीय और अओमीय पदार्थ]
    D --> D1[ρ = R x A / l]
    D --> D2[इकाई - ओम-मीटर]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

ओम का नियम - V-I ग्राफ V I सरल रेखा (ओम का नियम) ढाल = V/I = R (प्रतिरोध) ताप स्थिर रहने पर V ∝ I स्वर्ण नियम: ओमीय चालक का V-I ग्राफ सदैव सरल रेखा होता है।

प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक R ∝ l (लंबाई बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ता है) R ∝ 1/A (क्षेत्रफल बढ़ने पर प्रतिरोध घटता है) R = ρ x l / A (पदार्थ पर निर्भर) धातुओं में ताप बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ता है प्रतिरोधकता ρ की इकाई ओम-मीटर है स्वर्ण नियम: प्रतिरोधकता पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करती है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. छात्र (V = IR) के स्थान पर (V = I/R) लिख देते हैं, जिससे पूरा प्रश्न गलत हो जाता है।
  2. प्रतिरोधकता की इकाई को ओम लिख देते हैं, जबकि प्रतिरोधकता की इकाई ओम-मीटर (Ωm) होती है।
  3. ओम के नियम को सभी युक्तियों पर लागू मान लेते हैं, जबकि डायोड और ट्रांजिस्टर जैसी युक्तियों पर यह लागू नहीं होता।
  4. प्रतिरोध और प्रतिरोधकता को एक ही राशि मान लेते हैं; प्रतिरोध चालक की लंबाई-क्षेत्रफल पर निर्भर करता है, जबकि प्रतिरोधकता केवल पदार्थ पर।
  5. तार की लंबाई दोगुनी करने पर प्रतिरोध आधा हो जाता है यह मान लेते हैं, जबकि लंबाई बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ता है।
  6. धातुओं के प्रतिरोध में ताप बढ़ने पर कमी आती है यह भ्रांति रखते हैं, जबकि धातुओं में ताप बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ता है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. तीनों सूत्र (V = IR), (I = V/R), (R = V/I) रट लें, क्योंकि ग्रुप D में इन्हीं पर संख्यात्मक प्रश्न आते हैं।
  2. प्रतिरोध का प्रश्न हो तो पहले दिए गए मान पहचानें - V, I या R कौन सा ज्ञात करना है।
  3. प्रतिरोधकता का प्रश्न हो तो सूत्र (\rho = RA/l) और इसकी इकाई ओम-मीटर याद रखें।
  4. सबसे अच्छा चालक 'चाँदी' और सबसे सस्ता व्यावहारिक चालक 'तांबा' याद रखें।
  5. V-I ग्राफ के प्रश्न में सरल रेखा का ढाल ही प्रतिरोध होता है, यह नियम याद रखें।

10. निष्कर्ष

प्रतिरोध और ओम का नियम विद्युत विज्ञान की नींव हैं, जिनके बिना किसी भी विद्युत परिपथ का विश्लेषण नहीं किया जा सकता। इस अध्याय में प्रतिरोध की परिभाषा, इसे प्रभावित करने वाले कारक, प्रतिरोधकता, ओम का नियम और उससे जुड़े संख्यात्मक उदाहरणों का विस्तार से अध्ययन किया गया। परीक्षा की दृष्टि से सूत्रों को सटीकता से याद रखना तथा इकाइयों पर ध्यान देना सर्वाधिक आवश्यक है। ओम का नियम आगे के अध्यायों - श्रेणी-समानांतर परिपथ और विद्युत शक्ति - को समझने का आधार है, इसलिए इस अध्याय में पूर्ण निपुणता प्राप्त करें।