विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (भारतीय भूगोल)
अध्याय: 14.4 भारतीय नदियाँ और झीलें
विषय-वस्तु: प्रमुख नदियाँ, झीलें
1. परिचय
भारत की नदियाँ सभ्यता, कृषि, उद्योग और धर्म की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारत में कुल लगभग 12 प्रमुख नदी तंत्र हैं, जिनमें से 14 नदियाँ 1,000 किलोमीटर से अधिक लंबी हैं। नदियों को उनके उद्गम एवं स्वरूप के आधार पर दो मुख्य भागों में बाँटा जाता है—हिमालयी नदियाँ और प्रायद्वीपीय नदियाँ। हिमालयी नदियाँ हिमनदों से निकलती हैं और सदानीरा (सदा बहने वाली) होती हैं, जबकि प्रायद्वीपीय नदियाँ वर्षा पर निर्भर रहती हैं और गर्मी में सूख सकती हैं। हिमालयी नदियाँ लंबी एवं घुमावदार रास्ता तय करके बड़े डेल्टा बनाती हैं, जबकि प्रायद्वीपीय नदियाँ सीधी घाटियों में बहती हैं।
हिमालयी नदियों में सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र प्रमुख हैं, जिनके जल से उत्तरी मैदान का निर्माण हुआ है। गंगा भारत की सबसे लंबी नदी है, जिसकी कुल लंबाई 2,525 किलोमीटर है, जबकि सिंधु की कुल लंबाई 3,180 किलोमीटर है (जिसका अधिकांश भाग पाकिस्तान में बहता है)। ब्रह्मपुत्र भारत में अरुणाचल प्रदेश से प्रवेश करती है और असम में 'सांगपो' से बहती हुई बांग्लादेश में जमुना के नाम से जानी जाती है। इन नदियों का उद्गम, लंबाई, सहायक नदियाँ और अपवाह क्षेत्र परीक्षा के प्रश्नों के प्रमुख स्रोत हैं।
भारत में अनेक प्राकृतिक एवं कृत्रिम झीलें भी स्थित हैं। वूलर भारत की सबसे बड़ी (मीठे जल की) झील है, जो जम्मू-कश्मीर में स्थित है। चिल्का (ओडिशा) भारत की सबसे बड़ी खारे जल की लैगून झील है, जबकि सांभर (राजस्थान) भारत की सबसे बड़ी नमक झील है। लोकटक (मणिपुर) अपनी तैरती झोपड़ियों (फुमडी) के लिए प्रसिद्ध है। नदियों और झीलों से संबंधित ये तथ्य RRB NTPC में अत्यंत लोकप्रिय हैं।
2. हिमालयी नदियाँ
हिमालयी नदियों का विस्तृत विवरण निम्नलिखित है:
गंगा: उद्गम गंगोत्री ग्लेशियर (गौमुख, उत्तराखंड); कुल लंबाई 2,525 किमी; भागीरथी और अलकनंदा के संगम (देवप्रयाग) के बाद गंगा कहलाती है। प्रमुख सहायक नदियाँ—यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी, सोन, चंबल (यमुना की), गोमती। बांग्लादेश में पद्मा नाम से बहती है और अंत में मेघना के साथ मिलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
यमुना: उद्गम यमुनोत्री ग्लेशियर; गंगा की सबसे बड़ी सहायक नदी; दिल्ली, आगरा (ताजमहल) से होकर बहती है और इलाहाबाद (प्रयागराज) में गंगा में मिलती है। इसकी सहायक नदियाँ—चंबल, बेतवा, केन, सिंध।
ब्रह्मपुत्र: उद्गम तिब्बत में (चेमायुंगदुंग ग्लेशियर), जहाँ इसे 'सांगपो' कहा जाता है; अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश के बाद 'सियांग/दिहांग' तथा असम में 'ब्रह्मपुत्र' कहलाती है। बांग्लादेश में 'जमुना' नाम से बहती है। भारत में इसकी लंबाई लगभग 916 किमी है, कुल लंबाई लगभग 2,900 किमी।
सिंधु: उद्गम तिब्बत (कैलाश पर्वत के पास, सिंगी खबाब); कुल लंबाई 3,180 किमी; भारत में केवल लद्दाख क्षेत्र से बहती है। प्रमुख सहायक नदियाँ—झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलुज (पंजाब की पाँच नदियाँ)।
हिमालयी नदियों की प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं:
ये हिमनदजनित हैं, इसलिए सदानीरा रहती हैं।
ये अपने साथ अधिक जलोढ़ (गाद) लाती हैं, जिससे उपजाऊ मैदान और विशाल डेल्टा (सुंदरबन) बनते हैं।
इन नदियों पर बड़ी जल-विद्युत परियोजनाएँ (भाखड़ा-नांगल, टिहरी) स्थित हैं।
इन नदियों में वर्षा ऋतु में अधिक जल प्रवाह होता है।
3. प्रायद्वीपीय नदियाँ
प्रायद्वीपीय नदियाँ मुख्यतः पठारी क्षेत्र से निकलती हैं और उन्हें उनके बहाव की दिशा के अनुसार दो भागों में बाँटा जाता है:
पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ (बंगाल की खाड़ी में मिलने वाली):
गोदावरी (1,465 किमी): 'दक्षिण की गंगा'; उद्गम त्र्यंबकेश्वर (नासिक); भारत की सबसे लंबी प्रायद्वीपीय नदी; डेल्टा आंध्र प्रदेश में।
कृष्णा (1,400 किमी): उद्गम महाबलेश्वर; सहायक नदियाँ—तुंगभद्रा, भीमा, कोयना।
कावेरी (800 किमी): 'दक्षिण की गंगा' (दक्षिण का अन्न भंडार); उद्गम ब्रह्मगिरि (तालकावेरी); शिवसमुद्रम जलप्रपात इसी पर है; डेल्टा तमिलनाडु में।
महानदी (858 किमी): 'ओडिशा का शोक'; उद्गम सिहावा (छत्तीसगढ़); हीराकुंड बांध इसी पर स्थित है।
पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ (अरब सागर में मिलने वाली):
नर्मदा (1,312 किमी): उद्गम अमरकंटक (मध्य प्रदेश); रिफ्ट घाटी (भ्रंश घाटी) में बहती है; मार्कंडेय, सरदार सरोवर बांध; डेल्टा नहीं बनाती, एस्टुअरी बनाती है।
ताप्ती (724 किमी): उद्गम मुलताई (सतपुड़ा); नर्मदा के समानांतर रिफ्ट घाटी में बहती है।
माही और साबरमती: गुजरात में बहकर अरब सागर में गिरती हैं।
लूनी: राजस्थान की एकमात्र नदी जो खारी है और कच्छ के रन में समाप्त होती है।
प्रायद्वीपीय नदियों की प्रमुख विशेषताएँ:
ये वर्षाजनित हैं, इसलिए मौसमी रूप से पानी की कमी होती है।
ये घाटों से गुजरती हैं और अधिकांश सीधी घाटियों में बहती हैं।
पूर्ववाही नदियाँ डेल्टा बनाती हैं, जबकि पश्चिमवाही नदियाँ (नर्मदा-ताप्ती) एस्टुअरी बनाती हैं।
इन नदियों पर जल-विद्युत बांध (हीराकुंड, नागार्जुन सागर, शिवसमुद्रम) बने हैं।
4. प्रमुख झीलें और महत्वपूर्ण तथ्य
भारत की प्रमुख झीलों का विवरण निम्नलिखित है:
वूलर झील (जम्मू-कश्मीर): भारत की सबसे बड़ी मीठे जल की झील; झेलम नदी द्वारा निर्मित।
चिल्का झील (ओडिशा): भारत की सबसे बड़ी लैगून (खारे जल की तटीय) झील; यहाँ प्रवासी पक्षी आते हैं; रामसर साइट।
सांभर झील (राजस्थान): भारत की सबसे बड़ी नमक झील; यहाँ सोडियम कार्बोनेट का उत्पादन होता है।
लोकटक झील (मणिपुर): तैरते हुए द्वीप (फुमडी) वाली झील; विश्व का एकमात्र तैरता राष्ट्रीय उद्यान केइबुल लामजाओ यहीं है।
डाल झील (जम्मू-कश्मीर): श्रीनगर की प्रसिद्ध झील, हाउसबोट के लिए प्रसिद्ध।
वेम्बनाद झील (केरल): भारत की सबसे लंबी झील; बैकवाटर के लिए प्रसिद्ध; नेहरू ट्रॉफी नौका दौड़ यहीं होती है।
पुलिकट झील (आंध्र प्रदेश-तमिलनाडु): दूसरी सबसे बड़ी लैगून झील।
कोलेरू झील (आंध्र प्रदेश): मीठे जल की झील।
पांगोंग त्सो (लद्दाख): खारे जल की सीमा पर स्थित झील।
ऊटी की ऊपरी झील, भीमताल, नैनीताल: पर्वतीय झीलें।
नदियों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य:
गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा (सुंदरबन): विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा।
हीराकुंड बांध: महानदी पर, भारत का सबसे लंबा मिट्टी का बांध।
नागार्जुन सागर: कृष्णा नदी पर, भारत का सबसे बड़ा चिनाई (मेसनरी) बांध।
शिवसमुद्रम जलप्रपात: कावेरी नदी पर।
गेरसोप्पा (जोग) जलप्रपात: शरावती नदी पर, कर्नाटक; भारत का सबसे ऊँचा जलप्रपात (293 मीटर)।
5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ
तालिका 1
नदी
उद्गम स्थल
लंबाई (किमी)
गंगा
गंगोत्री ग्लेशियर
2,525
गोदावरी
त्र्यंबकेश्वर (नासिक)
1,465
नर्मदा
अमरकंटक
1,312
कृष्णा
महाबलेश्वर
1,400
महानदी
सिहावा (छत्तीसगढ़)
858
कावेरी
ब्रह्मगिरि (तालकावेरी)
800
तालिका 2
झील
राज्य
विशेषता
वूलर
जम्मू-कश्मीर
सबसे बड़ी मीठे जल की झील
चिल्का
ओडिशा
सबसे बड़ी लैगून झील
सांभर
राजस्थान
सबसे बड़ी नमक झील
लोकटक
मणिपुर
तैरती फुमडी वाली झील
वेम्बनाद
केरल
सबसे लंबी झील
6. माइंड मैप
flowchart TD
A[भारतीय नदियाँ और झीलें] --> B[हिमालयी नदियाँ]
B --> B1[गंगा 2525 किमी]
B --> B2[यमुना]
B --> B3[ब्रह्मपुत्र]
B --> B4[सिंधु]
A --> C[प्रायद्वीपीय नदियाँ]
C --> C1[पूर्ववाही गोदावरी]
C --> C2[पूर्ववाही कृष्णा]
C --> C3[पूर्ववाही कावेरी]
C --> C4[पश्चिमवाही नर्मदा]
C --> C5[पश्चिमवाही ताप्ती]
A --> D[झीलें]
D --> D1[वूलर]
D --> D2[चिल्का]
D --> D3[सांभर]
D --> D4[लोकटक]
A --> E[महत्वपूर्ण बांध]
E --> E1[हीराकुंड महानदी]
E --> E2[नागार्जुन सागर कृष्णा]
E --> E3[भाखड़ा सतलुज]
A --> F[जलप्रपात]
F --> F1[जोग गेरसोप्पा]
F --> F2[शिवसमुद्रम]
7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)
8. सामान्य गलतियाँ
गलती: गोदावरी को भारत की सबसे लंबी नदी बताना। भारत की सबसे लंबी नदी गंगा (2,525 किमी) है; गोदावरी प्रायद्वीप की सबसे लंबी नदी है।
गलती: चिल्का को मीठे जल की झील बताना। चिल्का खारे जल की लैगून झील है; मीठे जल की सबसे बड़ी झील वूलर है।
गलती: नर्मदा को बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदी बताना। नर्मदा पश्चिम की ओर बहकर अरब सागर में गिरती है।
गलती: ब्रह्मपुत्र का उद्गम भारत में बताना। ब्रह्मपुत्र तिब्बत (चीन) में निकलती है।
गलती: जोग जलप्रपात को कावेरी पर स्थित बताना। जोग (गेरसोप्पा) शरावती नदी पर है; कावेरी पर शिवसमुद्रम जलप्रपात है।
गलती: वूलर को खारे जल की झील बताना। वूलर झेलम द्वारा निर्मित मीठे जल की सबसे बड़ी झील है।
गलती: सांभर झील का राज्य उलट देना। सांभर राजस्थान में स्थित भारत की सबसे बड़ी नमक झील है।
9. परीक्षा युक्तियाँ
नदियों को 'उद्गम + लंबाई' के साथ स्मरण रखें; हर परीक्षा में उद्गम स्थल का प्रश्न आता है।
पूर्ववाही (डेल्टा) बनाम पश्चिमवाही (एस्टुअरी) का अंतर स्पष्ट रखें।
झीलों की सूची 'सबसे बड़ी/सबसे लंबी/सबसे अधिक नमक' के रूप में याद रखें।
नदियों के नाम पर स्थित बांधों (हीराकुंड-महानदी, नागार्जुन सागर-कृष्णा, भाखड़ा-सतलुज) को जोड़कर स्मरण करें।
उपनाम याद रखें—गोदावरी (दक्षिण की गंगा), कावेरी (दक्षिण भारत का अन्न भंडार), कोसी (बिहार का शोक)।
जलप्रपातों (जोग, शिवसमुद्रम) और डेल्टा (सुंदरबन) को विशेष रूप से याद रखें।
10. निष्कर्ष
भारतीय नदियाँ और झीलें देश के जल संसाधन, कृषि और सभ्यता की रीढ़ हैं। हिमालयी नदियों की सदानीरा प्रकृति तथा प्रायद्वीपीय नदियों की मौसमी प्रकृति का अंतर समझना आवश्यक है। नदियों के उद्गम, लंबाई, सहायक नदियाँ, बहाव की दिशा तथा झीलों की विशेषताएँ परीक्षा में सर्वाधिक पूछे जाने वाले तथ्य हैं। इन्हें मानचित्र, तालिकाओं और स्मरण सूत्रों के साथ पढ़ने से स्थायी स्मृति विकसित होती है। नियमित अभ्यास से RRB NTPC में इस अध्याय से अंक अर्जित करना अत्यंत सरल हो जाता है।