विषय: रेलवे NTPC – सामान्य जागरूकता (आधुनिक भारतीय इतिहास) अध्याय: 13.7 गांधी युग विषय-वस्तु: असहयोग, सविनय अवज्ञा, दांडी
महात्मा गांधी के भारत आगमन (9 जनवरी, 1915) के साथ ही भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक नया युग शुरू हुआ, जिसे 'गांधी युग' कहा जाता है। दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद गांधीजी ने सत्याग्रह की शक्ति का उपयोग भारतीय समस्याओं के समाधान में किया। उनका पहला बड़ा प्रयोग 1917 में चंपारण (बिहार) में नील की खेती के विरुद्ध हुआ, इसके बाद 1918 में खेड़ा और अहमदाबाद के सत्याग्रह आए।
गांधी युग की प्रमुख घटनाएँ हैं – रौलेट एक्ट के विरुद्ध आंदोलन, जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919), असहयोग आंदोलन (1920-22), सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34) जिसकी शुरुआत दांडी यात्रा से हुई, और अंततः भारत छोड़ो आंदोलन (1942)। गांधीजी के नेतृत्व में आंदोलन अहिंसक हो गया और उसमें आम जनता, महिलाएँ और किसान बड़ी संख्या में शामिल हुए।
रेलवे NTPC परीक्षा में इस अध्याय से सत्याग्रहों के वर्ष, स्थान, उद्देश्य और आंदोलनों के परिणाम तथा गांधीजी से जुड़े प्रमुख समझौतों के बारे में प्रश्न पूछे जाते हैं। गांधीजी के आंदोलनों की तिथि-श्रृंखला को ध्यान से याद रखना आवश्यक है।
चंपारण सत्याग्रह (1917): बिहार के चंपारण जिले में अंग्रेज जमींदारों ने किसानों को नील की खेती करने के लिए बाध्य कर रखा था। राजकुमार शुक्ला के आग्रह पर गांधीजी चंपारण गए और सत्याग्रह किया। इसके परिणामस्वरूप नील की बाध्य खेती समाप्त हुई। यह भारत में गांधीजी का पहला सत्याग्रह था।
अहमदाबाद मिल मजदूर सत्याग्रह (1918): अहमदाबाद की कपड़ा मिलों में मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने के लिए गांधीजी ने भूख हड़ताल की। मजदूरों को मजदूरी बढ़ोतरी मिली।
खेड़ा सत्याग्रह (1918): गुजरात के खेड़ा जिले में फसल खराब होने के बावजूद कर माफी नहीं मिली। गांधीजी के नेतृत्व में किसानों ने कर न देने का संघर्ष किया और अंततः कर स्थगित हुआ। सरदार वल्लभभाई पटेल ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रौलेट एक्ट (1919): सर सिडनी रौलेट की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिश पर 1919 में रौलेट एक्ट पारित हुआ, जिसने सरकार को बिना मुकदमे के किसी भी व्यक्ति को बंदी बनाने की शक्ति दी। गांधीजी ने इसके विरुद्ध रौलेट सत्याग्रह चलाने का आह्वान किया।
जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल, 1919): रौलेट एक्ट के विरोध में पंजाब में आंदोलन तेज था। अमृतसर के जलियांवाला बाग में एक सभा हो रही थी, जिसमें जनरल डायर ने बिना किसी चेतावनी के गोलियाँ चलवाईं। सैकड़ों निहत्थे लोग मारे गए। इस हत्याकांड की जाँच के लिए हंटर आयोग बना, पर डायर को दंड नहीं मिला। गांधीजी ने इसके विरोध में दिए गए केसरिया (विक्टोरिया) मेडल लौटा दिए।
खिलाफत आंदोलन: प्रथम विश्व युद्ध के बाद खलीफा (तुर्की) के अपमान के विरोध में भारतीय मुसलमानों ने खिलाफत आंदोलन चलाया। गांधीजी ने इसे असहयोग आंदोलन से जोड़ा। मौलाना शौकत अली और मौलाना मुहम्मद अली इसके नेता थे।
पृष्ठभूमि: जलियांवाला बाग हत्याकांड, खिलाफत आंदोलन और रौलेट एक्ट के विरोध ने गांधीजी को यह विश्वास दिलाया कि ब्रिटिश सरकार के साथ सहयोग करना उचित नहीं है। 1920 के नागपुर अधिवेशन में असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव पारित हुआ।
असहयोग आंदोलन का कार्यक्रम: 1. सरकारी उपाधियों का त्याग और सरकारी सम्मानों से परहेज 2. सरकारी विद्यालयों, न्यायालयों और पदों का बहिष्कार 3. विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार और खादी का प्रचार 4. शराब की दुकानों के सामने धरना 5. चुनावों में भाग न लेना
आंदोलन की विशेषताएँ: - गांधीजी ने इसे 'असहयोग' नाम दिया, जिसमें ब्रिटिश सरकार से हर प्रकार का सहयोग बंद करना था। - इसने पहली बार देशव्यापी स्तर पर जन आंदोलन का स्वरूप लिया। - किसान, मजदूर, व्यापारी, विद्यार्थी और महिलाएँ सभी जुड़े। - बेगूसराय, एटा, मैनपुरी जैसे स्थानों में किसान आंदोलन तेज हुए।
चौरी चौरा कांड (5 फरवरी, 1922): उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के चौरी चौरा नामक स्थान पर हिंसक भीड़ ने पुलिस थाने को आग लगा दी, जिसमें 22 पुलिसकर्मी मारे गए। गांधीजी ने अहिंसा के सिद्धांत को आघात पहुँचता देख 11 फरवरी, 1922 को आंदोलन वापस ले लिया।
बारदोली सत्याग्रह (1928): गुजरात के बारदोली में कर बढ़ोतरी के विरुद्ध सरदार पटेल के नेतृत्व में किसानों ने संघर्ष किया। इस सफलता के बाद पटेल को 'सरदार' की उपाधि मिली।
साइमन कमीशन (1928): भारतीय संविधानिक सुधारों पर विचार के लिए 1927 में साइमन कमीशन नियुक्त हुआ, जिसमें एक भी भारतीय नहीं था। इसके विरोध में 'साइमन गो बैक' का नारा लगा। 30 अक्टूबर, 1928 को लाहौर में लाला लाजपत राय पर लाठीचार्ज हुआ, जिसके कारण उनकी मृत्यु हो गई। बाद में भगत सिंह और सहयोगियों ने सॉन्डर्स की हत्या की।
नेहरू रिपोर्ट (1928): मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में रिपोर्ट बनी जिसमें डोमिनियन स्टेटस की माँग की गई। गांधीजी और साइमन कमीशन के विरोध में संवैधानिक सुधार की माँग तेज हुई।
पूर्ण स्वराज्य (1929): लाहौर अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में 'पूर्ण स्वराज्य' का लक्ष्य घोषित हुआ और 26 जनवरी, 1930 को पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।
सविनय अवज्ञा आंदोलन: नमक पर लगाए गए कर के विरुद्ध गांधीजी ने सविनय अवज्ञा का प्रतीक बनाया। 12 मार्च, 1930 को साबरमती आश्रम से दांडी यात्रा प्रारंभ हुई। लगभग 78 सत्याग्रहियों के साथ 241 मील की यात्रा कर 6 अप्रैल, 1930 को दांडी (नवसारी) पहुँचकर गांधीजी ने नमक कानून का उल्लंघन किया।
गांधी-इरविन समझौता (5 मार्च, 1931): वायसराय लॉर्ड इरविन और गांधीजी के बीच समझौता हुआ – नमक कानून में ढील, राजनीतिक बंदियों की रिहार, और सविनय अवज्ञा बंद करने की शर्त। इस समझौते के आधार पर गांधीजी दूसरे गोलमेज सम्मेलन (1931, लंदन) में गए, पर वह असफल रहा।
सविनय अवज्ञा की पुनर्शुरुआत और समाप्ति (1932-34): दूसरे गोलमेज सम्मेलन की विफलता के बाद आंदोलन फिर शुरू हुआ। 1932 में पूना समझौता डॉ. आंबेडकर और गांधीजी के बीच हुआ, जिसमें दलितों के लिए पृथक निर्वाचन की जगह आरक्षित सीटों की व्यवस्था हुई। 1934 में आंदोलन समाप्त घोषित किया गया।
1935 का भारत सरकार अधिनियम: इस अधिनियम में प्रांतीय स्वायत्तता और द्वैध शासन (dyarchy) की समाप्ति के प्रावधान थे। 1937 में प्रांतीय चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस को भारी सफलता मिली।
गांधी युग की अन्य घटनाएँ: 1. हरिजन सेवक संघ (1932) – अस्पृश्यता उन्मूलन हेतु 2. व्यक्तिगत सत्याग्रह (1940) – द्वितीय विश्व युद्ध में भारतीयों की भागीदारी के विरोध में 3. 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन – अगला अध्याय
गांधीजी के प्रमुख सत्याग्रहों की सूची: 1. 1917 चंपारण – नील की खेती 2. 1918 अहमदाबाद – मजदूरों की मजदूरी 3. 1918 खेड़ा – कर माफी 4. 1920-22 असहयोग आंदोलन 5. 1930-34 सविनय अवज्ञा आंदोलन 6. 1940 व्यक्तिगत सत्याग्रह 7. 1942 भारत छोड़ो आंदोलन
| सत्याग्रह/आंदोलन | वर्ष | स्थान/उद्देश्य |
|---|---|---|
| चंपारण सत्याग्रह | 1917 | बिहार, नील की बाध्य खेती |
| खेड़ा सत्याग्रह | 1918 | गुजरात, कर माफी |
| असहयोग आंदोलन | 1920-22 | देशव्यापी, सहयोग बंद |
| बारदोली सत्याग्रह | 1928 | कर बढ़ोतरी, पटेल |
| सविनय अवज्ञा | 1930-34 | नमक कानून की अवज्ञा |
| भारत छोड़ो | 1942 | ब्रिटिश शासन समाप्ति |
| तिथि | घटना |
|---|---|
| 9 जनवरी 1915 | गांधीजी का भारत आगमन |
| 13 अप्रैल 1919 | जलियांवाला बाग हत्याकांड |
| 5 फरवरी 1922 | चौरी चौरा कांड |
| 30 अक्टूबर 1928 | साइमन कमीशन विरोध, लाला लाजपत राय पर लाठीचार्ज |
| 12 मार्च 1930 | दांडी यात्रा प्रारंभ |
| 6 अप्रैल 1930 | नमक कानून का उल्लंघन |
| 5 मार्च 1931 | गांधी-इरविन समझौता |
flowchart TD
A[गांधी युग] --> B[1917 चंपारण]
A --> C[1919 जलियांवाला बाग]
A --> D[1920-22 असहयोग]
A --> E[1930 दांडी यात्रा]
A --> F[1942 भारत छोड़ो]
B --> B1[नील खेती विरोध]
C --> C1[रौलेट एक्ट विरोध]
C --> C2[डायर द्वारा गोलीबारी]
D --> D1[बहिष्कार खादी]
D --> D2[चौरी चौरा 1922]
E --> E1[12 मार्च 1930 साबरमती]
E --> E2[6 अप्रैल नमक उल्लंघन]
E --> E3[गांधी-इरविन समझौता 1931]
F --> F1[करो या मरो]
A --> G[प्रमुख समझौते]
G --> G1[पूना समझौता 1932]
गांधी युग भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण चरण था, जिसमें अहिंसा और सत्याग्रह के माध्यम से देशव्यापी जन आंदोलनों का संचालन हुआ। 1917 के चंपारण सत्याग्रह से लेकर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तक गांधीजी ने नील की खेती, कर, नमक और अंततः ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष छेड़ा। असहयोग, सविनय अवज्ञा और दांडी यात्रा ने भारतीय जनता में राष्ट्रीय चेतना और आत्मविश्वास भर दिया। यद्यपि इन आंदोलनों से तात्कालिक स्वराज्य नहीं मिला, पर इन्होंने ब्रिटिश शासन की नींव कमजोर कर स्वतंत्रता की राह प्रशस्त की। गांधी युग की घटनाओं की सटीक जानकारी परीक्षा में निर्णायक सिद्ध होती है।