विषय: रेलवे NTPC – तर्कशक्ति (कूटलेखन और गणितीय संक्रियाएँ) अध्याय: 8.6 गणितीय संक्रियाएँ विषय-वस्तु: चिह्न परिवर्तन गणित
गणितीय संक्रियाएँ तर्कशक्ति का वह प्रमुख अध्याय है जिसमें गणितीय चिह्नों (+, −, ×, ÷) के अर्थ बदलकर प्रश्न हल करने होते हैं। रेलवे NTPC परीक्षा में ये प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं, क्योंकि ये परीक्षार्थी की बुनियादी गणितीय समझ और निर्देशों का पालन करने की क्षमता दोनों की जाँच करते हैं। इसमें चिह्नों का प्रतिस्थापन, संख्याओं का प्रतिस्थापन या दोनों का संयोजन शामिल होता है।
इस अध्याय में हम चिह्न प्रतिस्थापन, संख्या प्रतिस्थापन, BODMAS का महत्व, समीकरण संतुलन और असमिका प्रकार के प्रश्नों का अध्ययन करेंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन प्रश्नों में परिवर्तन लागू करने के बाद पूर्णतः BODMAS नियम के अनुसार ही गणना करनी होती है, अन्यथा उत्तर गलत आता है।
चिह्न परिवर्तन के प्रश्नों में अभ्यर्थियों द्वारा सबसे अधिक गलतियाँ की जाती हैं, इसलिए नियमित अभ्यास और संकल्पना की स्पष्टता अत्यंत आवश्यक है। जो अभ्यर्थी इन प्रश्नों की विधि पक्की कर लेता है, वह न्यूनतम समय में सटीक उत्तर दे सकता है और परीक्षा में यह अध्याय उसके लिए बोनस अंक साबित होता है।
प्रकार 1 – चिह्न प्रतिस्थापन: दिए गए प्रश्न में कुछ गणितीय चिह्नों को आपस में बदलना होता है। जैसे यदि "+ को ×" और "− को ÷" बदला जाए, तो पूरे व्यंजक में उन्हीं बदले हुए चिह्नों से गणना करनी होगी। इसमें सबसे अधिक सावधानी BODMAS पर रखनी पड़ती है।
प्रकार 2 – संख्या प्रतिस्थापन: संख्याओं को बदलकर गणना करना होती है। जैसे यदि 2 का अर्थ 5 और 5 का अर्थ 9 हो, तो "2 × 5" में मूल्यों को प्रतिस्थापित करके 5 × 9 = 45 निकालना होता है।
प्रकार 3 – चिह्न और संख्या दोनों का प्रतिस्थापन: कुछ उच्च कठिनाई वाले प्रश्नों में चिह्नों और संख्याओं दोनों को बदलना होता है। इनमें क्रम महत्वपूर्ण है: पहले दोनों प्रतिस्थापन करें, फिर BODMAS से गणना करें।
प्रकार 4 – समीकरण संतुलन: किसी गणितीय समीकरण को सत्य बनाने के लिए सही चिह्नों का चयन करना होता है। जैसे "5 _ 3 _ 2 = 13" में उचित चिह्न लगाकर समीकरण को संतुष्ट करना।
प्रकार 5 – तारांकित चिह्न: कुछ प्रश्नों में * या # जैसे प्रतीकों को विशेष अर्थ दिए जाते हैं, जिनके अनुसार गणना करनी होती है। यह प्रतीक आधारित संक्रियाओं से भिन्न नहीं होता, परंतु परीक्षा में अक्सर मिश्रित रूप में आता है।
प्रकार 6 – सत्य/असत्य जाँच: दिए गए चिह्नों के अनुसार कौन सा समीकरण सत्य है, यह जाँचना होता है। इसमें प्रत्येक विकल्प में प्रतिस्थापन करके यह देखना होता है कि कौन सा समीकरण सही बैठ रहा है।
हल करने की रणनीति:
विधि A – चिह्न प्रतिस्थापन का सही क्रम: जब "+ को −" और "− को +" बदलना हो, तो नए व्यंजक में सभी + के स्थान पर − और सभी − के स्थान पर + लिखें। उदाहरण के लिए "8 + 4 − 3" में "+ को −" और "− को +" करने पर "8 − 4 + 3" बनेगा, जिसका मान 7 होगा।
विधि B – × और ÷ का प्रतिस्थापन: जब "× को ÷" और "÷ को ×" बदला जाए, तो प्रतिस्थापन के बाद BODMAS के अनुसार भाग और गुणा करना होता है। उदाहरण: "12 × 3 ÷ 2" में × को ÷ और ÷ को × करने पर "12 ÷ 3 × 2" = 8।
विधि C – BODMAS का पालन: प्रतिस्थापन के बाद क्रम सदैव होता है: कोष्ठक, घातांक, भाग, गुणा, जोड़, घटाव। कई अभ्यर्थी प्रतिस्थापन के बाद बाएँ से दाएँ सीधा गणना कर बैठते हैं, जो कि सबसे बड़ी गलती है।
विधि D – संख्या प्रतिस्थापन: जब संख्याएँ प्रतिस्थापित होती हैं, तो व्यंजक में दिखने वाली प्रत्येक संख्या को उसकी दी गई नई संख्या से बदलें। उदाहरण के लिए यदि 4 का अर्थ 8 है, तो "4 + 2" में 4 के स्थान पर 8 रखकर 8 + 2 = 10 निकालें।
विधि E – समीकरण संतुलन: विकल्पों में दिए गए चिह्नों को बारी-बारी लगाकर जाँचें कि कौन से चिह्नों से समीकरण सत्य होता है। यहाँ प्रत्येक विकल्प का मूल्यांकन करना आवश्यक है।
विधि F – अभिकथन जाँच: जब यह पूछा जाए कि कौन सा विकल्प सत्य है, तो हर विकल्प में दिए गए चिह्न प्रतिस्थापन को लागू करके गणना करें और देखें कि किसमें समीकरण संतुष्ट होता है।
महत्वपूर्ण सिद्धांत: प्रतिस्थापन प्रश्नों में हमेशा पहले प्रतिस्थापन और फिर गणना का क्रम रखें। गणना कभी भी प्रतिस्थापन से पहले नहीं होती। साथ ही, प्रतिस्थापन के बाद बने नए व्यंजक को स्पष्ट रूप से लिखना अनिवार्य है, क्योंकि मानसिक गणना में त्रुटि की संभावना बहुत अधिक होती है।
उदाहरण 1: यदि "+" का अर्थ "−", "−" का अर्थ "+" हो, तो "10 + 6 − 4" का मान क्या होगा? हल: प्रतिस्थापन के बाद "10 − 6 + 4" बनेगा। अब BODMAS के अनुसार (जोड़-घटाव बाएँ से दाएँ): 10 − 6 = 4, फिर 4 + 4 = 8। उत्तर = 8।
उदाहरण 2: यदि "×" का अर्थ "÷" और "÷" का अर्थ "×" हो, तो "18 × 3 ÷ 6" का मान क्या होगा? हल: प्रतिस्थापन के बाद "18 ÷ 3 × 6" बनेगा। BODMAS के अनुसार: 18 ÷ 3 = 6, फिर 6 × 6 = 36। उत्तर = 36।
उदाहरण 3: यदि "+" का अर्थ "×" और "−" का अर्थ "÷" हो, तो "6 + 3 − 1" का मान क्या होगा? हल: प्रतिस्थापन के बाद "6 × 3 ÷ 1" बनेगा। BODMAS के अनुसार: 6 × 3 = 18, फिर 18 ÷ 1 = 18। उत्तर = 18।
उदाहरण 4: यदि 2 का अर्थ 5 और 3 का अर्थ 7 हो, तो "2 + 3" का मान क्या होगा? हल: संख्या प्रतिस्थापन के बाद "5 + 7" बनेगा। मान = 12। उत्तर = 12।
उदाहरण 5: यदि "5 × 3 − 2 = 13" को सत्य बनाने के लिए चिह्नों का चयन करें? हल: विकल्पों में +, −, ×, ÷ को क्रमशः लगाकर जाँच करें। 5 × 3 − 2 = 13 सत्य है (5×3=15, 15−2=13)। अतः सही चिह्न × और − हैं। उत्तर = "×, −"।
उदाहरण 6: यदि "+" का अर्थ "÷", "÷" का अर्थ "−", "−" का अर्थ "+" और "×" का अर्थ "×" हो, तो "20 ÷ 5 + 4 − 3 × 2" का मान क्या होगा? हल: प्रतिस्थापन के बाद "20 − 5 ÷ 4 + 3 × 2" बनेगा। BODMAS: भाग 5 ÷ 4 = 1.25 नहीं; सही क्रम में 20 − (5 ÷ 4) + (3 × 2) = 20 − 1.25 + 6 = 24.75 नहीं। यहाँ दिए गए मानों से गणना में भिन्न आती है, अतः परीक्षा में ऐसे प्रश्नों में विकल्पों से मेल खाते सरल पथ का चयन करें। सामान्यतः मान निकालने का क्रम: भाग → गुणा → जोड़ → घटाव।
| प्रतिस्थापन | मूल व्यंजक | नया व्यंजक | मान |
|---|---|---|---|
| + → −, − → + | 10 + 6 − 4 | 10 − 6 + 4 | 8 |
| × → ÷, ÷ → × | 18 × 3 ÷ 6 | 18 ÷ 3 × 6 | 36 |
| + → ×, − → ÷ | 6 + 3 − 1 | 6 × 3 ÷ 1 | 18 |
| + → ÷, ÷ → − | 20 ÷ 5 + 4 | 20 − 5 ÷ 4 | 18.75 |
| − → +, × → ÷ | 15 − 3 × 2 | 15 + 3 ÷ 2 | 16.5 |
| क्रम | संक्रिया | प्रतीक |
|---|---|---|
| 1 | कोष्ठक | ( ), { }, [ ] |
| 2 | घातांक | a², a³ |
| 3 | भाग | ÷ |
| 4 | गुणा | × |
| 5 | जोड़ | + |
| 6 | घटाव | − |
flowchart TD
A[8.6 गणितीय संक्रियाएँ] --> B[चिह्न प्रतिस्थापन]
A --> C[संख्या प्रतिस्थापन]
A --> D[BODMAS नियम]
A --> E[समीकरण संतुलन]
B --> B1[+ → −]
B --> B2[× → ÷]
B --> B3[संयुक्त प्रतिस्थापन]
C --> C1[अंक बदलना]
C --> C2[मान प्रतिस्थापन]
D --> D1[कोष्ठक प्रथम]
D --> D2[भाग-गुणा क्रम]
D --> D3[जोड़-घटाव अंतिम]
E --> E1[विकल्प जाँच]
E --> E2[सत्य चिह्न चयन]
गणितीय संक्रियाएँ रेलवे NTPC तर्कशक्ति का वह महत्वपूर्ण अध्याय है जो चिह्न और संख्या प्रतिस्थापन के माध्यम से बुनियादी गणित और निर्देश पालन की क्षमता का परीक्षण करता है। सफलता के लिए प्रतिस्थापन के बाद BODMAS के क्रम का सख्त पालन, नए व्यंजक को स्पष्ट रूप से लिखना और हर विकल्प की जाँच करना आवश्यक है। नियमित अभ्यास से ये प्रश्न तेज़ी से हल होने लगते हैं और परीक्षा में यह अध्याय निश्चित अंक अर्जित करने का सरल साधन बन जाता है।