18.3 पाचन तंत्र Notes

18.3 पाचन तंत्र

विषय: रेलवे NTPC – सामान्य विज्ञान (जीव विज्ञान) अध्याय: 18.3 पाचन तंत्र विषय-वस्तु: पाचन अंग

1. परिचय

पाचन वह प्रक्रिया है जिसमें जटिल खाद्य पदार्थ सरल, घुलनशील अणुओं में टूटते हैं ताकि वे रक्त में अवशोषित होकर कोशिकाओं तक पहुँच सकें। यह प्रक्रिया पाचन तंत्र द्वारा संपन्न होती है, जो मुख से लेकर गुदा तक एक सतत नली के रूप में फैली होती है। पाचन तंत्र के प्रमुख अंग हैं—मुख, ग्रसनी, ग्रासनली, आमाशय, छोटी आँत, बड़ी आँत तथा गुदा। इनके साथ सहायक ग्रंथियाँ—लार ग्रंथियाँ, यकृत तथा अग्न्याशय—भी पाचन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

पाचन मुख्यतः दो प्रकार का होता है—यांत्रिक पाचन (जैसे दाँतों द्वारा चबाना, आमाशय की पेशियों द्वारा मंथन) तथा रासायनिक पाचन (एंजाइमों द्वारा जटिल पदार्थों का विघटन)। पाचक एंजाइम शरीर के विभिन्न स्रावों—लार, आमाशय रस, अग्न्याशय रस, आँत रस तथा पित्त रस—में पाए जाते हैं। RRB NTPC की परीक्षा में पाचन तंत्र से पाचक एंजाइमों, स्रावों तथा अंगों के कार्यों पर प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

पोषण की दृष्टि से पाचन तंत्र शरीर के लिए आवश्यक कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन तथा खनिज लवण प्रदान करता है। भोजन के विभिन्न घटकों का पाचन तंत्र के विभिन्न भागों में पाचन होता है। इस अध्याय में पाचन तंत्र की संरचना, पाचन के चरण, प्रमुख एंजाइम तथा पाचन से संबंधित विकारों का वर्णन किया गया है।

2. पाचन तंत्र की संरचना और प्रमुख अंग

पाचन तंत्र की नली का क्रम निम्न है—मुख गुहा, ग्रसनी, ग्रासनली, आमाशय, छोटी आँत, बड़ी आँत, मलाशय तथा गुदा। प्रत्येक अंग का विशिष्ट कार्य है:

पाचन नली की दीवार की परतें: बाहर से अंदर की ओर—सीरस परत, पेशी परत, उपश्लेष्मी परत तथा श्लेष्मल परत। श्लेष्मल परत में पाचक ग्रंथियाँ एवं अवशोषण के लिए विलाई होती हैं।

3. पाचन प्रक्रिया और प्रमुख एंजाइम

पाचन के विभिन्न चरणों और उनके एंजाइमों का विवरण निम्न है:

पाचक रसों में एंजाइमों की सूची: लार में पाइलिन; आमाशय रस में पेप्सिन, रेनिन, लाइपेज (आमाशय); अग्न्याशय रस में ट्रिप्सिन, काइमोट्रिप्सिन, एमाइलेज, लाइपेज; आँत रस में माल्टेज, सुक्रेज, लैक्टेज, एरेप्टेज; पित्त रस में कोई एंजाइम नहीं होता।

अवशोषण: छोटी आँत की भीतरी सतह पर असंख्य अंगुली जैसी रचनाएँ विलाई (Villi) होती हैं, जो अवशोषण का क्षेत्रफल बढ़ाती हैं। ग्लूकोज तथा अमीनो अम्ल रक्त में तथा वसा का अवशोषण लसीका (लैक्टियल) में होता है।

पाचन से संबंधित विकार: पेप्टिक अल्सर (आमाशय में व्रण), अजीर्ण, कब्ज, अतिसार, यकृत का सिरोसिस, पीलिया (जॉन्डिस—यकृत विकार), तथा मधुमेह (अग्न्याशय से इंसुलिन की कमी)। पायलोरिक स्टेनोसिस तथा अपेंडिसाइटिस भी पाचन तंत्र से संबंधित हैं।

4. पोषक तत्वों का पाचन और उनके अवशोषण की तालिका

पोषक तत्वों की पाचन प्रक्रिया को निम्न बिंदुओं में समझा जा सकता है:

पाचन का समय: भोजन मुख से आमाशय तक लगभग 4 से 8 सेकंड में, आमाशय में 2 से 4 घंटे तथा छोटी आँत में 3 से 5 घंटे में पाचन पूर्ण होता है। कुल पाचन में लगभग 12 से 24 घंटे लगते हैं।

मानव दाँतों की संरचना: प्रत्येक दाँत में क्राउन (मुकुट), गर्दन तथा जड़ होती है। बाहरी कठोर परत को इनेमल कहते हैं, जो शरीर का सबसे कठोर पदार्थ है।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1

पाचक रस स्रोत प्रमुख एंजाइम/घटक क्रिया
लार लार ग्रंथियाँ पाइलिन (टायलिन) स्टार्च का माल्टोज में
आमाशय रस आमाशय HCl, पेप्सिन, रेनिन प्रोटीन पाचन, दूध जमाना
पित्त रस यकृत पित्त लवण वसा का पायसीकरण
अग्न्याशय रस अग्न्याशय ट्रिप्सिन, लाइपेज, एमाइलेज प्रोटीन, वसा, स्टार्च
आँत रस छोटी आँत माल्टेज, सुक्रेज, लैक्टेज कार्बोहाइड्रेट का अंतिम पाचन

तालिका 2

पोषक तत्व पाचन का प्रमुख स्थल अंतिम उत्पाद
कार्बोहाइड्रेट मुख, छोटी आँत ग्लूकोज
प्रोटीन आमाशय, छोटी आँत अमीनो अम्ल
वसा छोटी आँत फैटी अम्ल, ग्लिसरॉल
दूध का प्रोटीन आमाशय रेनिन द्वारा जमना
विटामिन/खनिज सीधा अवशोषण रक्त में

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[पाचन तंत्र] --> B[प्रमुख अंग]
    B --> B1[मुख गुहा]
    B --> B2[ग्रासनली]
    B --> B3[आमाशय]
    B --> B4[छोटी आँत]
    B --> B5[बड़ी आँत]
    A --> C[सहायक ग्रंथियाँ]
    C --> C1[लार ग्रंथियाँ पाइलिन]
    C --> C2[यकृत पित्त रस]
    C --> C3[अग्न्याशय अग्न्याशय रस]
    A --> D[प्रमुख एंजाइम]
    D --> D1[पेप्सिन प्रोटीन]
    D --> D2[लाइपेज वसा]
    D --> D3[एमाइलेज स्टार्च]
    D --> D4[माल्टेज माल्टोज]
    A --> E[अवशोषण]
    E --> E1[छोटी आँत की विलाई]
    E --> E2[जल बड़ी आँत में]
    A --> F[विकार]
    F --> F1[पेप्टिक अल्सर]
    F --> F2[पीलिया]
    F --> F3[मधुमेह]

7. महत्वपूर्ण आरेख (SVG)

मानव पाचन तंत्र मुख गुहा ग्रासनली आमाशय छोटी आँत ग्रहणी, मध्यांत्र, शेषांत्र अवशोषण विलाई द्वारा यकृत पित्त रस अग्न्याशय इंसुलिन + रस बड़ी आँत जल अवशोषण स्वर्ण नियम: पेप्सिन आमाशय में और ट्रिप्सिन छोटी आँत में प्रोटीन पचाता है।

पोषक तत्वों का पाचन कार्बोहाइड्रेट एंजाइम एमाइलेज ग्लूकोज अंतिम उत्पाद प्रोटीन पेप्सिन, ट्रिप्सिन अमीनो अम्ल अंतिम उत्पाद वसा पित्त + लाइपेज फैटी अम्ल ग्लिसरॉल अवशोषण विलाई द्वारा छोटी आँत में महत्वपूर्ण पित्त में कोई एंजाइम नहीं वसा का पायसीकरण स्वर्ण नियम: पाइलिन स्टार्च का पाचन मुख में ही प्रारंभ करता है।

8. सामान्य गलतियाँ

  1. गलती: पित्त रस में पाचक एंजाइम मान लेना। पित्त रस में कोई एंजाइम नहीं होता; यह केवल वसा का पायसीकरण करता है।
  2. गलती: प्रोटीन का पाचन केवल आमाशय में होना बताना। आमाशय में पेप्सिन प्रारंभ करता है, परंतु अंतिम पाचन छोटी आँत में ट्रिप्सिन द्वारा होता है।
  3. गलती: पाइलिन को प्रोटीन पचाने वाला एंजाइम बताना। पाइलिन (टायलिन) स्टार्च पचाता है।
  4. गलती: अवशोषण का मुख्य स्थल आमाशय बताना। अवशोषण का मुख्य स्थल छोटी आँत है।
  5. गलती: मानव में दाँतों की संख्या 30 बताना। वयस्क मानव में 32 दाँत होते हैं।
  6. गलती: मधुमेह को यकृत का विकार मानना। मधुमेह अग्न्याशय से इंसुलिन की कमी से होता है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. प्रत्येक एंजाइम को उसके स्रोत, क्रियास्थल तथा क्रिया के साथ एक साथ याद करें।
  2. पित्त रस 'बिना एंजाइम का पाचक रस' है—इस तथ्य को सदैव हाइलाइट रखें।
  3. पाचन क्रम (मुख-ग्रासनली-आमाशय-छोटी आँत-बड़ी आँत) को मौखिक रूप से दोहराएँ।
  4. पाचक रस और उनके एंजाइमों की तालिका (लार, आमाशय रस, पित्त, अग्न्याशय रस, आँत रस) रट लें।
  5. विकारों को उनके अंगों के साथ जोड़ें—पेप्टिक अल्सर (आमाशय), पीलिया (यकृत), मधुमेह (अग्न्याशय)।

10. निष्कर्ष

पाचन तंत्र का अध्ययन शरीर विज्ञान का महत्वपूर्ण भाग है, क्योंकि यह जीवन के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है। मुख से गुदा तक की नली, सहायक ग्रंथियाँ, विभिन्न पाचक रस एवं एंजाइम—ये सभी मिलकर भोजन को सरल अणुओं में बदलते हैं। RRB NTPC परीक्षा में एंजाइमों के नाम, उनके स्रोत और कार्यों पर प्रश्न अवश्य आते हैं। तालिकाओं के रूप में व्यवस्थित अध्ययन तथा नियमित अभ्यास से इस अध्याय में पूर्ण अंक अर्जित किए जा सकते हैं।