विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: रसायन विज्ञान – धातु कार्बन और आवर्त सारणी विषय-वस्तु: 16.4 मिश्रधातु और उपयोग
शुद्ध धातुएँ प्रायः अपने शुद्ध रूप में विशेष गुणों की कमी के कारण कई कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं होतीं। जब किसी धातु को अन्य धातु अथवा अधातु के साथ पिघली अवस्था में मिलाया जाता है, तो बने मिश्रण को मिश्रधातु कहते हैं। मिश्रधातु बनाने का उद्देश्य धातु की कठोरता, सामर्थ्य, संक्षारण-प्रतिरोध तथा टूटने की क्षमता में सुधार करना होता है। उदाहरण के लिए, शुद्ध सोना अत्यधिक नरम होता है, इसलिए आभूषणों में इसकी कठोरता बढ़ाने हेतु इसमें कॉपर और सिल्वर मिलाए जाते हैं।
मिश्रधातु की धातुएँ पिघली अवस्था में सुविधाजनक रूप से मिलती हैं और ठंडा होने पर एक समरूप मिश्रण का ठोस बनाती हैं। मिश्रधातुओं के गुण शुद्ध धातुओं से भिन्न होते हैं। अधिकांश मिश्रधातुएँ शुद्ध धातुओं से कठोर, अधिक मजबूत तथा संक्षारण के प्रति अधिक प्रतिरोधी होती हैं। इनके गलनांक प्रायः घटक धातुओं के गलनांक से कम होते हैं। कुछ मिश्रधातुओं में घटक धातुओं के कुछ विशेष गुण, जैसे सुचालकता और चमक, संरक्षित रहते हैं।
रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में मिश्रधातुओं से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। मिश्रधातु का नाम, उसके घटक तत्व तथा उसके मुख्य उपयोग याद रखने वाले महत्वपूर्ण तथ्य हैं। रेलवे के संदर्भ में स्टील, स्टेनलेस स्टील, पीतल, कांसा, निक्रोम तथा मैग्नेलियम जैसी मिश्रधातुओं का विशेष महत्व है। ये प्रश्न सामान्यतया सरल होते हैं और सटीक तालिका कंठस्थ करने पर शीघ्र हल हो जाते हैं।
मिश्रधातु बनाने के मुख्य उद्देश्य हैं — धातु की कठोरता बढ़ाना, उसकी सामर्थ्य और टिकाऊपन बढ़ाना, संक्षारण प्रतिरोध बढ़ाना, रंग सुधारना तथा गलनांक कम करना। शुद्ध सोना और शुद्ध कॉपर नरम होते हैं, इसलिए इनके आभूषणों या बर्तनों के लिए मिश्रधातु आवश्यक है। शुद्ध आयरन अपेक्षाकृत नरम होता है, परंतु कार्बन मिलाने पर यह कठोर स्टील बन जाता है, जो निर्माण कार्य के लिए उपयुक्त होता है।
मिश्रधातुओं में धातुओं के घुलने की क्षमता के कारण वे सजातीय (होमोजीनियस) होती हैं। इनमें अलग-अलग धातुओं के गुण इस प्रकार मिल जाते हैं कि एक घटक का दोष दूसरे घटक के गुण द्वारा दूर हो जाता है। उदाहरण के लिए, कॉपर की विद्युत् सुचालकता तो शुद्ध होती है, परंतु कठोरता कम होती है; जिंक मिलाने पर बना पीतल कठोर हो जाता है। साथ ही मिश्रधातु का गलनांक घटकों की तुलना में प्रायः कम होता है, जैसे सोल्डर का गलनांक लेड और टिन दोनों से कम होता है।
मिश्रधातु का एक महत्वपूर्ण गुण यह है कि इसमें अलग-अलग धातुओं के क्रिस्टल आपस में मिलकर एक नई आंतरिक संरचना बनाते हैं, जिससे सरकने वाली परतों की गति बाधित होती है और कठोरता बढ़ती है। यही कारण है कि मिश्रधातुएँ शुद्ध धातुओं की तुलना में अधिक कठोर, अधिक सामर्थ्यवान तथा संक्षारण के प्रति अधिक प्रतिरोधी होती हैं। इसके साथ ही कुछ मिश्रधातुओं में उच्च विद्युत्-प्रतिरोध (जैसे निक्रोम) भी देखने को मिलता है।
पीतल (Brass): कॉपर (Cu) और जिंक (Zn) की मिश्रधातु। पीतल कठोर, नमनीय तथा संक्षारण-प्रतिरोधी होता है। इसका उपयोग बर्तन, नल, घंटे, मशीन के कलपुर्जे, ताले तथा सजावटी वस्तुएँ बनाने में होता है।
कांसा (Bronze): कॉपर (Cu) और टिन (Sn) की मिश्रधातु। कांसा पीतल से अधिक कठोर होता है। इसका उपयोग मूर्तियाँ, पदक, बियरिंग, घंटे तथा सिक्के बनाने में होता है। ऐतिहासिक कांस्य युग का आधार यही मिश्रधातु है।
स्टील (Steel): आयरन (Fe) और कार्बन (C) की मिश्रधातु, जिसमें कार्बन 0.1 से 1.5 प्रतिशत तक होता है। स्टील कठोर, मजबूत तथा नमनीय होता है। इसका उपयोग निर्माण कार्य, रेलवे पटरियाँ, पुल, वाहन, मशीनरी तथा उपकरण बनाने में होता है।
स्टेनलेस स्टील: आयरन (Fe) में क्रोमियम (Cr) लगभग 18 प्रतिशत और निकल (Ni) लगभग 8 प्रतिशत मिलाने से बनता है। क्रोमियम इसे संक्षारण-रोधी बनाता है। इसका उपयोग बर्तन, शल्य-चिकित्सा उपकरण, रेलवे कोच के पुर्जे तथा रसोई उपकरण बनाने में होता है।
मैग्नेलियम (Magnelium): ऐलुमिनियम (Al) और मैग्नीशियम (Mg) की मिश्रधातु। यह हल्की तथा मजबूत होती है, इसलिए विमान, वैज्ञानिक यंत्र तथा रेलवे कोच के निर्माण में उपयोगी है।
निक्रोम (Nichrome): निकल (Ni) और क्रोमियम (Cr) की मिश्रधातु, जिसमें निकल लगभग 60 प्रतिशत और क्रोमियम लगभग 40 प्रतिशत होता है। इसमें उच्च विद्युत्-प्रतिरोध तथा उच्च गलनांक होता है, इसलिए हीटर, टोस्टर तथा विद्युत् बल्ब के फिलामेंट बनाने में उपयोगी है।
सोल्डर (Solder): लेड (Pb) और टिन (Sn) की मिश्रधातु, जिसका गलनांक कम होता है। इसका उपयोग विद्युत् सोल्डरिंग तथा धातु के जोड़ जोड़ने में होता है।
दुराल्युमिन (Duralumin): ऐलुमिनियम में कॉपर, मैग्नीशियम तथा मैंगनीज की थोड़ी मात्रा मिलाने से बनती है। यह हल्की तथा बहुत मजबूत मिश्रधातु है, जो विमान निर्माण में प्रयोग होती है।
रेलवे टेक्नीशियन के दृष्टिकोण से स्टील सबसे महत्वपूर्ण मिश्रधातु है। रेलवे की पटरियाँ, पुल, बोगी, कपलिंग तथा संरचनाएँ स्टील से बनी होती हैं। कार्बन की मात्रा बढ़ाने पर स्टील की कठोरता बढ़ती है परंतु नमनीयता घटती है। स्प्रिंग्स तथा उच्च सामर्थ्य वाले कलपुर्जों में उच्च-कार्बन स्टील का उपयोग होता है। स्टेनलेस स्टील का उपयोग रेलवे के रसोईघरों, कोच के आंतरिक फिटिंग तथा शल्य उपकरणों में होता है, क्योंकि यह संक्षारण-रोधी होती है।
रेलवे कोच तथा इंजनों के बियरिंग में कांसा तथा बैबिट धातु का उपयोग होता है। विद्युत् संपर्क एवं सिग्नल प्रणाली में पीतल तथा कॉपर-आधारित मिश्रधातुओं का उपयोग होता है। हीटर तथा टोस्टर में निक्रोम तार का उपयोग होता है, जो उच्च ताप सहन करने के साथ उच्च विद्युत्-प्रतिरोध प्रदान करता है। इंजन के कई कलपुर्जों में सामर्थ्य एवं हल्केपन के लिए ऐलुमिनियम की मिश्रधातुएँ उपयोग होती हैं।
उदाहरण 1: कांसा और पीतल के घटक तथा उपयोग लिखिए।
हल: कांसा = कॉपर + टिन, उपयोग — मूर्तियाँ, पदक, बियरिंग। पीतल = कॉपर + जिंक, उपयोग — बर्तन, नल, सजावटी वस्तुएँ, मशीन कलपुर्जे।
| मिश्रधातु | घटक धातुएँ | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|
| पीतल | कॉपर + जिंक | बर्तन, नल, मशीन कलपुर्जे |
| कांसा | कॉपर + टिन | मूर्तियाँ, पदक, बियरिंग |
| स्टील | आयरन + कार्बन | पटरियाँ, पुल, मशीनरी |
| स्टेनलेस स्टील | आयरन + क्रोमियम + निकल | बर्तन, शल्य उपकरण |
| मैग्नेलियम | ऐलुमिनियम + मैग्नीशियम | विमान, रेलवे कोच |
| निक्रोम | निकल + क्रोमियम | हीटर, टोस्टर, फिलामेंट |
| सोल्डर | लेड + टिन | विद्युत् सोल्डरिंग |
| दुराल्युमिन | Al + Cu + Mg + Mn | विमान निर्माण |
| उद्देश्य | उदाहरण |
|---|---|
| कठोरता बढ़ाना | शुद्ध सोने में कॉपर मिलाना |
| सामर्थ्य बढ़ाना | आयरन में कार्बन मिलाकर स्टील |
| संक्षारण-रोधी बनाना | लोहे में क्रोमियम, स्टेनलेस स्टील |
| गलनांक कम करना | लेड + टिन = सोल्डर |
| हल्कापन एवं मजबूती | ऐलुमिनियम मिश्रधातुएँ |
flowchart TD
A[मिश्रधातु] --> B[परिभाषा धातु + धातु या अधातु]
A --> C[उद्देश्य]
A --> D[प्रमुख मिश्रधातुएँ]
A --> E[उपयोग]
C --> C1[कठोरता]
C --> C2[सामर्थ्य]
C --> C3[संक्षारण प्रतिरोध]
C --> C4[गलनांक कम]
D --> D1[पीतल Cu+Zn]
D --> D2[कांसा Cu+Sn]
D --> D3[स्टील Fe+C]
D --> D4[स्टेनलेस स्टील Fe+Cr+Ni]
D --> D5[निक्रोम Ni+Cr]
D --> D6[सोल्डर Pb+Sn]
E --> E1[रेलवे पटरियाँ स्टील]
E --> E2[हीटर निक्रोम]
E --> E3[विमान मैग्नेलियम]
मिश्रधातुएँ शुद्ध धातुओं की सीमाओं को दूर करने के लिए बनाई जाती हैं और उद्योग तथा रेलवे में इनका अत्यधिक महत्व है। इस अध्याय में हमने मिश्रधातु की परिभाषा, बनाने के उद्देश्य, प्रमुख मिश्रधातुओं (पीतल, कांसा, स्टील, स्टेनलेस स्टील, निक्रोम, सोल्डर, मैग्नेलियम) के घटक एवं उपयोग तथा रेलवे में इनके अनुप्रयोग का अध्ययन किया। मिश्रधातुएँ शुद्ध धातुओं से अधिक कठोर, मजबूत एवं संक्षारण-रोधी होती हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में घटक-उपयोग संबंधी प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं, अतः तालिका की पकड़ बनाए रखना आवश्यक है। सटीक स्मरण एवं अभ्यास से ये प्रश्न बिना समय खर्च किए सरलता से हल किए जा सकते हैं।