विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: भौतिकी – विद्युत और चुंबकत्व विषय-वस्तु: 13.4 प्रतिरोध और ओम का नियम
जब किसी चालक से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो चालक के मुक्त इलेक्ट्रॉनों को परमाणुओं से टकराना पड़ता है, जिसके कारण धारा के प्रवाह में बाधा उत्पन्न होती है। चालक द्वारा विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध करने के इस गुण को विद्युत प्रतिरोध कहते हैं। प्रतिरोध की SI इकाई ओम (Ω) है, जिसका नाम जर्मन वैज्ञानिक जॉर्ज साइमन ओम के नाम पर रखा गया है। यदि किसी चालक के सिरों के बीच 1 वोल्ट विभवांतर लगाने पर 1 एम्पियर धारा प्रवाहित होती है, तो चालक का प्रतिरोध 1 ओम होता है।
ओम का नियम विद्युत परिपथों का सबसे मौलिक नियम है। जर्मन भौतिकविद् जॉर्ज साइमन ओम ने 1826 में बताया कि किसी भौतिक अवस्था (स्थिर तापमान) में किसी चालक के सिरों के बीच लगाया गया विभवांतर उसमें प्रवाहित धारा के अनुक्रमानुपाती होता है। अर्थात् स्थिर तापमान पर किसी चालक का प्रतिरोध नियत रहता है। यह नियम विद्युत इंजीनियरिंग की नींव है और रेलवे के विद्युत परिपथों के डिजाइन, निरीक्षण और दोष खोजने में सर्वाधिक उपयोगी है।
इस अध्याय में हम प्रतिरोध की परिभाषा, ओम का नियम V = IR, प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक, प्रतिरोधकता (रेजिस्टिविटी), चालकता, तथा प्रतिरोधकों के श्रेणी और समानांतर संयोजन का अध्ययन करेंगे। संख्यात्मक प्रश्नों की दृष्टि से यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि परीक्षा में ओम के नियम और प्रतिरोध की गणना से जुड़े प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं।
ओम के नियम के अनुसार, स्थिर तापमान पर किसी चालक के सिरों के बीच विभवांतर (V) उसमें प्रवाहित धारा (I) के अनुक्रमानुपाती होता है। इसे सूत्र द्वारा व्यक्त करते हैं:
V = I × R या R = V / I
जहाँ R चालक का प्रतिरोध (ओम में), V विभवांतर (वोल्ट में) तथा I धारा (एम्पियर में) है। इस संबंध को ग्राफ द्वारा प्रदर्शित करने पर मूल बिंदु से गुजरने वाली सीधी रेखा प्राप्त होती है, जो दर्शाती है कि V और I में समानुपाती संबंध है।
उदाहरण 1: किसी चालक के सिरों के बीच विभवांतर 12 वोल्ट है और उसमें 3 एम्पियर धारा प्रवाहित होती है। प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
हल: R = V/I = 12/3 = 4 ओम।
उदाहरण 2: 10 ओम प्रतिरोध के चालक में 2 एम्पियर धारा प्रवाहित होती है। विभवांतर ज्ञात कीजिए।
हल: V = IR = 2 × 10 = 20 वोल्ट।
ओम के नियम की सीमाएँ: ओम का नियम केवल ओमिक चालकों (धातु, जैसे ताँबा) पर लागू होता है। अर्धचालक, डायोड, ट्रांजिस्टर और विद्युत अपघट्य जैसे अओमिक तत्वों पर यह नियम लागू नहीं होता, क्योंकि इनमें विभवांतर और धारा में अनुक्रमानुपाती संबंध नहीं होता।
किसी चालक का प्रतिरोध निम्नलिखित चार कारकों पर निर्भर करता है:
लंबाई: किसी चालक का प्रतिरोध उसकी लंबाई के अनुक्रमानुपाती होता है। R ∝ l। लंबा चालक अधिक प्रतिरोध प्रदान करता है।
अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल: चालक का प्रतिरोध उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। R ∝ 1/A। मोटा तार कम प्रतिरोध देता है।
पदार्थ की प्रकृति: विभिन्न पदार्थों का प्रतिरोध अलग-अलग होता है। ताँबा और एल्युमिनियम अच्छे चालक हैं, जबकि नाइक्रोम, कार्बन और काँच उच्च प्रतिरोध रखते हैं।
तापमान: धातुओं का प्रतिरोध तापमान बढ़ने पर बढ़ता है, जबकि अर्धचालकों का प्रतिरोध तापमान बढ़ने पर घटता है।
प्रतिरोधकता (Resistivity): प्रतिरोध के सूत्र को एक साथ लिखने पर:
R = ρ × (l / A)
जहाँ ρ प्रतिरोधकता है। प्रतिरोधकता किसी पदार्थ का वह गुण है जो उसकी लंबाई और क्षेत्रफल से स्वतंत्र होता है। इसका SI मात्रक ओम-मीटर (Ω·m) है। यह केवल पदार्थ और तापमान पर निर्भर करता है। ताँबे की प्रतिरोधकता लगभग 1.7 × 10⁻⁸ Ω·m होती है, इसलिए इसका उपयोग विद्युत तारों में किया जाता है। चालकता प्रतिरोधकता का व्युत्क्रम है, σ = 1/ρ।
उदाहरण 3: किसी ताँबे के तार की लंबाई 100 मीटर और अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल 2 × 10⁻⁶ वर्ग मीटर है। ताँबे की प्रतिरोधकता 1.7 × 10⁻⁸ Ω·m है। तार का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
हल: R = ρl/A = (1.7 × 10⁻⁸ × 100) / (2 × 10⁻⁶) = 1.7 × 10⁻⁶ / 2 × 10⁻⁶ = 0.85 ओम।
श्रेणी संयोजन: जब प्रतिरोधकों को एक के बाद एक जोड़ा जाता है, तो उसे श्रेणी संयोजन कहते हैं। श्रेणी संयोजन में सभी प्रतिरोधकों में धारा समान रहती है परंतु विभवांतर विभाजित हो जाता है। कुल प्रतिरोध:
R = R₁ + R₂ + R₃ + ...
कुल प्रतिरोध हमेशा सबसे बड़े प्रतिरोध से अधिक होता है।
उदाहरण 4: 2 Ω, 3 Ω और 5 Ω के तीन प्रतिरोधक श्रेणी में जुड़े हैं। कुल प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
हल: R = 2 + 3 + 5 = 10 ओम।
समानांतर संयोजन: जब सभी प्रतिरोधकों के सिरों को एक साथ जोड़ा जाता है, तो उसे समानांतर संयोजन कहते हैं। समानांतर संयोजन में सभी प्रतिरोधकों पर विभवांतर समान होता है परंतु धारा विभाजित हो जाती है। कुल प्रतिरोध:
1/R = 1/R₁ + 1/R₂ + 1/R₃ + ...
कुल प्रतिरोध हमेशा सबसे छोटे प्रतिरोध से कम होता है।
उदाहरण 5: 2 Ω और 3 Ω के दो प्रतिरोधक समानांतर में जुड़े हैं। कुल प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
हल: 1/R = 1/2 + 1/3 = 3/6 + 2/6 = 5/6, इसलिए R = 6/5 = 1.2 ओम।
| राशि | सूत्र | SI मात्रक |
|---|---|---|
| ओम का नियम | V = IR | वोल्ट (V) |
| प्रतिरोध | R = V/I | ओम (Ω) |
| धारा | I = V/R | एम्पियर (A) |
| प्रतिरोधकता | ρ = RA/l | ओम-मीटर (Ω·m) |
| चालकता | σ = 1/ρ | सीमेंस प्रति मीटर |
| गुण | श्रेणी संयोजन | समानांतर संयोजन |
|---|---|---|
| कुल प्रतिरोध | R = R₁ + R₂ + ... | 1/R = 1/R₁ + 1/R₂ + ... |
| धारा | सभी में समान | विभाजित होती है |
| विभवांतर | विभाजित होता है | सभी पर समान |
| कुल प्रतिरोध | सबसे बड़े से अधिक | सबसे छोटे से कम |
| उपयोग | विभाजक परिपथ | घरेलू विद्युत तारों में |
flowchart TD
A[प्रतिरोध और ओम का नियम] --> B[ओम का नियम V = IR]
A --> C[प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले कारक]
A --> D[प्रतिरोधकता ρ = RA/l]
A --> E[संयोजन]
B --> B1[R = V/I]
B --> B2[केवल ओमिक चालकों के लिए]
C --> C1[लंबाई R ∝ l]
C --> C2[क्षेत्रफल R ∝ 1/A]
C --> C3[पदार्थ की प्रकृति]
C --> C4[तापमान]
E --> E1[श्रेणी R = R1+R2+...]
E --> E2[समानांतर 1/R = 1/R1+1/R2+...]
V = IR के स्थान पर V = I/R लिखना सबसे आम गलती है।R = R₁ + R₂ लिखना, जबकि सही सूत्र 1/R = 1/R₁ + 1/R₂ है।ρl/A होता है।V = IR से V, I और R तीनों ज्ञात करने की त्रिकोण विधि (याद रखें: V ऊपर, I और R नीचे) का अभ्यास करें।प्रतिरोध और ओम का नियम विद्युत विज्ञान की सबसे महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं। इस अध्याय में हमने ओम के नियम V = IR और प्रतिरोध के सूत्र R = V/I को समझा। प्रतिरोध को प्रभावित करने वाले चार कारकों — लंबाई, क्षेत्रफल, पदार्थ की प्रकृति और तापमान — का अध्ययन किया। प्रतिरोधकता ρ = RA/l की अवधारणा से विभिन्न पदार्थों के चालकत्व की तुलना करना सीखा। श्रेणी और समानांतर संयोजनों के कुल प्रतिरोध की गणना की विधियों को समझा। ये सभी अवधारणाएँ रेलवे के विद्युत परिपथों के डिजाइन, वायरिंग और दोष निवारण में सीधे उपयोग में आती हैं। ओम के नियम की गहरी समझ ही आगे के अध्यायों में विद्युत शक्ति, ऊर्जा और परिपथ विश्लेषण की नींव है, इसलिए इन सूत्रों का नियमित अभ्यास अत्यंत आवश्यक है।