विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: सामान्य जागरूकता – भूगोल और राजव्यवस्था विषय-वस्तु: 21.6 भारतीय संविधान
भारतीय संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है, जिसे 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा अंगीकृत (अपनाया) किया गया था। इसी दिन को 'संविधान दिवस' के रूप में मनाया जाता है। संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ और इसी दिन भारत गणराज्य घोषित हुआ। भारतीय संविधान का निर्माण संविधान सभा द्वारा किया गया, जिसका प्रथम अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। संविधान की प्रारूप समिति (ड्राफ्टिंग कमेटी) के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे, जिन्हें 'भारतीय संविधान का जनक' कहा जाता है। संविधान सभा का प्रथम अधिवेशन 9 दिसंबर 1946 को हुआ था।
भारतीय संविधान विश्व के कई देशों के संविधानों से उधार लिए गए प्रावधानों का समन्वय है। भारतीय संविधान की कई विशेषताएँ हैं – यह लिखित और विशाल है, भारत को 'स्वतंत्र लोकतांत्रिक गणराज्य' घोषित करता है, संसदीय प्रणाली अपनाता है, संघीय व्यवस्था स्थापित करता है तथा मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों का उल्लेख करता है। संविधान निर्माण में कुल 165 दिनों की बैठकें हुईं और लगभग 2 वर्ष 11 माह 18 दिन लगे। संविधान को बनाने में लगभग 284 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे। संविधान का मसौदा प्रारूप समिति द्वारा तैयार किया गया था, जिसकी स्थापना 29 अगस्त 1947 को हुई थी।
रेलवे परीक्षा में संविधान के प्रश्न प्रमुख रूप से पूछे जाते हैं, जिनमें संविधान के स्रोत, भाग, अनुच्छेद, प्रस्तावना, संशोधन प्रक्रिया और विशेषताएँ शामिल हैं। भारतीय संविधान में कुल 22 भाग, 395 अनुच्छेद (मूल रूप से) और 8 अनुसूचियाँ थीं, किंतु समय-समय पर संशोधनों के कारण अनुसूचियों की संख्या 12 हो गई है। संविधान का नवीनतम संशोधन 106वाँ संशोधन है, जिसे महिला आरक्षण संशोधन के रूप में जाना जाता है। इस अध्याय में हम संविधान की रचना, प्रस्तावना, मुख्य विशेषताएँ, स्रोत और संशोधन प्रक्रिया का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना (1946) के आधार पर किया गया था। संविधान सभा के कुल 389 सदस्य थे, जिनमें से 296 सदस्य ब्रिटिश भारत के प्रांतों से तथा 93 सदस्य रियासतों से चुने गए थे। विभाजन के बाद सदस्यों की संख्या 299 हो गई। संविधान सभा का प्रथम अधिवेशन 9 दिसंबर 1946 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ। प्रारंभिक अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को चुना गया, किंतु 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद को स्थायी अध्यक्ष चुना गया। संविधान सभा की कुल 11 अधिवेशन हुए और कुल बैठकों की संख्या 165 थी। संविधान सभा के सलाहकार (कानूनी सलाहकार) बी. एन. राव थे।
प्रारूप समिति की स्थापना 29 अगस्त 1947 को की गई। इस समिति में सात सदस्य थे – डॉ. भीमराव अंबेडकर (अध्यक्ष), एन. गोपालस्वामी आयंगर, अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर, डॉ. के. एम. मुंशी, सैयद मोहम्मद सादुल्ला, एन. माधव राव और डी. पी. खेतान। प्रारूप समिति ने संविधान का मसौदा 21 फरवरी 1948 को संविधान सभा के समक्ष प्रस्तुत किया। संविधान सभा ने मसौदे पर कुल 7635 संशोधन प्रस्तावों पर विचार किया। अंततः संविधान को 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया गया और यह 26 जनवरी 1950 से प्रभावी हुआ। डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने और संविधान सभा के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संविधान पर हस्ताक्षर किए।
संविधान सभा के कार्य में कुल समय लगा – लगभग 2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन। संविधान सभा का प्रत्येक सदस्य निर्वाचित प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा परोक्ष रूप से चुना गया था। संविधान सभा ने 9 दिसंबर 1946 से 26 नवंबर 1949 तक कुल 114 दिन मसौदे पर विचार-विमर्श किया। संविधान सभा का प्रथम उद्देश्य प्रस्ताव (उद्देश्य प्रस्ताव) 13 दिसंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू ने प्रस्तुत किया, जो संविधान के मूल सिद्धांतों का आधार बना।
भारतीय संविधान की प्रस्तावना संविधान का परिचय है, जो संविधान के उद्देश्यों और लक्ष्यों को स्पष्ट करती है। प्रस्तावना की शुरुआत 'हम भारत के लोग' से होती है। प्रस्तावना भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करती है। 'समाजवादी', 'धर्मनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द 42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा प्रस्तावना में जोड़े गए थे। मूल प्रस्तावना में ये शब्द नहीं थे। प्रस्तावना में न्याय (सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक), स्वतंत्रता (विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म), समानता (प्रतिष्ठा और अवसर की) तथा बंधुत्व की घोषणा की गई है। प्रस्तावना का भाषण काव्यात्मक शैली में लिखा गया है।
भारतीय संविधान की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं – पहला, यह विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है। दूसरा, भारत संसदीय प्रणाली अपनाता है, जिसमें राष्ट्रपति राज्य का प्रमुख और प्रधानमंत्री कार्यपालिका का प्रमुख होता है। तीसरा, संविधान संघीय व्यवस्था स्थापित करता है, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन किया गया है। चौथा, संविधान में मौलिक अधिकार, मौलिक कर्तव्य और राज्य के नीति-निदेशक तत्व शामिल हैं। पाँचवाँ, भारत में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार प्रचलित है। छठा, संविधान में संविधान संशोधन की व्यवस्था है तथा यह विश्व के कई देशों के संविधानों के उत्कृष्ट प्रावधानों का मिश्रण है।
भारतीय संविधान के प्रमुख स्रोत हैं – ब्रिटिश संविधान से संसदीय प्रणाली, विधि निर्माण प्रक्रिया और एकल नागरिकता; अमेरिकी संविधान से मौलिक अधिकार, राष्ट्रपति का महाभियोग और न्यायपालिका की स्वतंत्रता; आयरिश संविधान से राज्य के नीति-निदेशक तत्व; कनाडाई संविधान से संघीय प्रणाली और केंद्र में अवशिष्ट शक्तियाँ; ऑस्ट्रेलियाई संविधान से समवर्ती सूची; जापानी संविधान से 'संविधान में न्यायिक पुनर्विलोकन' की प्रक्रिया; तथा सोवियत संविधान से मौलिक कर्तव्यों की अवधारणा। इन स्रोतों के प्रश्न परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं।
भारतीय संविधान मूल रूप से 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियों से बना था। वर्तमान में संशोधनों के बाद अनुच्छेदों की संख्या लगभग 470 और अनुसूचियों की संख्या 12 हो गई है। संविधान का भाग III मौलिक अधिकारों से संबंधित है (अनुच्छेद 12 से 35), भाग IV राज्य के नीति-निदेशक तत्वों से (अनुच्छेद 36 से 51) तथा भाग IV-क मौलिक कर्तव्यों से (अनुच्छेद 51-क) संबंधित है। भाग V केंद्रीय कार्यपालिका, भाग VI राज्यों की सरकार, भाग XIV सेवाएँ, भाग XV चुनाव, भाग XVII राजभाषा और भाग XX संविधान संशोधन से संबंधित है।
अनुसूचियाँ संविधान के अभिन्न अंग हैं। प्रथम अनुसूची में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची, द्वितीय अनुसूची में राष्ट्रपति, राज्यपाल आदि के वेतन-भत्ते, तृतीय अनुसूची में शपथ-पदग्रहण के प्रारूप, चतुर्थ अनुसूची में राज्यसभा में सीटों का आवंटन, पाँचवीं अनुसूची में अनुसूचित जाति-जनजाति क्षेत्रों का प्रशासन, छठी अनुसूची में असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन, सातवीं अनुसूची में तीन सूचियाँ (संघ सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची) तथा आठवीं से बारहवीं अनुसूचियाँ विभिन्न विषयों से संबंधित हैं। आठवीं अनुसूची में मान्यता प्राप्त भाषाएँ हैं, नवीं अनुसूची में भूमि सुधार, दसवीं अनुसूची में दल-बदल विरोधी कानून, ग्यारहवीं अनुसूची में पंचायती राज से संबंधित विषय तथा बारहवीं अनुसूची में नगरपालिकाओं से संबंधित विषय शामिल हैं।
संविधान संशोधन अनुच्छेद 368 के अंतर्गत किया जाता है। संविधान संशोधन के तीन प्रकार हैं – संसद के दोनों सदनों के साधारण बहुमत से, दो-तिहाई बहुमत से तथा दो-तिहाई बहुमत के साथ कम से कम आधे राज्यों के अनुसमर्थन से। प्रमुख संशोधनों में 42वाँ संशोधन (1976) सबसे व्यापक संशोधन है जिसे 'मिनी संविधान' कहा जाता है; इसमें प्रस्तावना में समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता शब्द जोड़े गए। 44वाँ संशोधन (1978) ने मूल संपत्ति अधिकार को मौलिक अधिकारों से हटा दिया। 61वाँ संशोधन (1989) ने मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष की। 73वाँ और 74वाँ संशोधन (1992) क्रमशः पंचायती राज और नगरपालिकाओं से संबंधित हैं। 106वाँ संशोधन (2023) महिला आरक्षण (लोकसभा और विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें) प्रदान करता है।
| देश | उधार लिया गया प्रावधान |
|---|---|
| ब्रिटेन | संसदीय प्रणाली, एकल नागरिकता, विधि निर्माण |
| अमेरिका | मौलिक अधिकार, राष्ट्रपति का महाभियोग |
| आयरलैंड | राज्य के नीति-निदेशक तत्व |
| कनाडा | संघीय प्रणाली, केंद्र में अवशिष्ट शक्तियाँ |
| ऑस्ट्रेलिया | समवर्ती सूची |
| जापान | संविधान में न्यायिक पुनर्विलोकन |
| सोवियत संघ | मौलिक कर्तव्य |
| संशोधन | वर्ष | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| 42वाँ | 1976 | प्रस्तावना में समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, अखंडता; मिनी संविधान |
| 44वाँ | 1978 | संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकारों से हटाया |
| 61वाँ | 1989 | मतदान आयु 21 से 18 वर्ष |
| 73वाँ | 1992 | पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा |
| 74वाँ | 1992 | नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा |
| 106वाँ | 2023 | महिला आरक्षण (1/3 सीटें) |
flowchart TD
A[भारतीय संविधान] --> B[निर्माण]
A --> C[प्रस्तावना]
A --> D[विशेषताएँ]
A --> E[संरचना]
A --> F[संशोधन]
B --> B1[संविधान सभा 1946]
B --> B2[डॉ. राजेंद्र प्रसाद - अध्यक्ष]
B --> B3[डॉ. अंबेडकर - प्रारूप समिति]
B --> B4[26 नवंबर 1949 अंगीकृत]
C --> C1[संप्रभु समाजवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य]
D --> D1[संसदीय प्रणाली]
D --> D2[संघीय व्यवस्था]
D --> D3[मौलिक अधिकार]
E --> E1[395 अनुच्छेद, 22 भाग]
E --> E2[12 अनुसूचियाँ]
F --> F1[अनुच्छेद 368]
F --> F2[42वाँ - मिनी संविधान]
भारतीय संविधान भारत की सर्वोच्च विधि है, जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांतों पर आधारित है। इस अध्याय में हमने संविधान सभा की रचना, प्रारूप समिति के योगदान, प्रस्तावना की विशेषताएँ, संविधान की प्रमुख विशेषताएँ, स्रोत, भाग-अनुसूचियाँ तथा संशोधन प्रक्रिया का अध्ययन किया। डॉ. अंबेडकर का योगदान और 42वें संशोधन जैसे महत्वपूर्ण संशोधनों की जानकारी परीक्षा की दृष्टि से अनिवार्य है। संविधान के मूल सिद्धांतों की पकड़ भारतीय राजव्यवस्था के अन्य सभी अध्यायों (मौलिक अधिकार, संसद, न्यायपालिका, चुनाव) को समझने के लिए आधारभूत है।