ऊष्मा और तापमान Notes

ऊष्मा और तापमान

विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: भौतिकी – ऊष्मा ध्वनि और प्रकाश विषय-वस्तु: 12.1 ऊष्मा और तापमान

1. परिचय

ऊष्मा भौतिकी की वह शाखा है जिसमें हम ऊर्जा के उस रूप का अध्ययन करते हैं जो तापीय संपर्क में आने पर एक पिंड से दूसरे पिंड में प्रवाहित होती है। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में ऊष्मा और तापमान से प्रतिवर्ष 2 से 3 प्रश्न निश्चित रूप से पूछे जाते हैं। इनमें तापमान की मापन इकाई, ऊष्मा की इकाई कैलोरी और जूल, तापमान के पैमानों के बीच रूपांतरण तथा ऊष्मा से संबंधित अवधारणाओं पर प्रश्न आते हैं। इन प्रश्नों को हल करने के लिए सूत्रों की सटीक समझ और इकाई रूपांतरण का अभ्यास आवश्यक है।

तापमान किसी पिंड की तापीय अवस्था का माप है, जबकि ऊष्मा ऊर्जा का एक रूप है। तापमान यह बताता है कि पिंड कितना गरम या ठंडा है, परंतु यह ऊष्मा की कुल मात्रा नहीं है। दो पिंडों में से जब उन्हें स्पर्श कराया जाता है, तब ऊष्मा उच्च तापमान वाले पिंड से निम्न तापमान वाले पिंड की ओर प्रवाहित होती है। यह प्रवाह तब तक जारी रहता है जब तक दोनों पिंडों का तापमान समान नहीं हो जाता। इसी अवस्था को तापीय साम्य (thermal equilibrium) कहते हैं। तापमान मापने का उपकरण थर्मामीटर है।

इस विषय में हम ऊष्मा और तापमान के मध्य अंतर, ऊष्मा की इकाइयाँ, तापमान के तीन प्रमुख पैमाने — सेल्सियस, फारेनहाइट और केल्विन — तथा इनके बीच रूपांतरण सूत्रों का अध्ययन करेंगे। इसके साथ ही विशिष्ट ऊष्मा क्षमता और तापीय क्षमता की अवधारणाओं को भी सूत्र सहित समझेंगे। रेलवे परीक्षा में थर्मामीटर के पाठ्यांक, पैमानों के बीच बराबर पाठ्यांक और ऊष्मा की गणना वाले प्रश्न सबसे अधिक पूछे जाते हैं।

2. ऊष्मा और तापमान में अंतर

ऊष्मा और तापमान दोनों भिन्न संकल्पनाएँ हैं, परंतु सामान्य जीवन में इन्हें अक्सर एक ही मान लिया जाता है। ऊष्मा (heat) ऊर्जा का वह रूप है जो तापीय संपर्क के कारण उच्च तापमान से निम्न तापमान की ओर प्रवाहित होती है। तापमान (temperature) किसी पिंड की तापीय अवस्था का माप है जो उसकी आंतरिक ऊर्जा की गतिशीलता को दर्शाता है। ऊष्मा को जूल (J) या कैलोरी (cal) में मापा जाता है, जबकि तापमान को केल्विन (K), डिग्री सेल्सियस (°C) या डिग्री फारेनहाइट (°F) में मापा जाता है।

ऊष्मा एक रास्ता (path) फलन है, अर्थात यह पिंड की अवस्था पर निर्भर नहीं, बल्कि प्रक्रिया पर निर्भर करती है। तापमान एक अवस्था फलन है जो केवल पिंड की वर्तमान अवस्था पर निर्भर करता है। जब दो पिंड स्पर्श में होते हैं, तब ऊष्मा उच्च तापमान वाले पिंड से निम्न तापमान वाले पिंड की ओर स्वतः प्रवाहित होती है। उदाहरण के लिए, एक गिलास गरम पानी में ठंडा चम्मच डालने पर ऊष्मा पानी से चम्मच में जाती है, क्योंकि पानी का तापमान चम्मच से अधिक है। तापमान समान होने पर ऊष्मा का प्रवाह रुक जाता है।

तापमान पैमानों के बीच रूपांतरण सूत्र: तीनों पैमानों के बीच रूपांतरण के लिए सामान्य सूत्र निम्न है:

(C - 0)/100 = (F - 32)/180 = (K - 273)/100

अर्थात C/5 = (F - 32)/9 = (K - 273)/5, जहाँ C = सेल्सियस, F = फारेनहाइट, K = केल्विन। सेल्सियस को केल्विन में बदलने के लिए K = C + 273 और केल्विन को सेल्सियस में बदलने के लिए C = K - 273 प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण 1: 100°C को फारेनहाइट और केल्विन में बदलिए।

हल: फारेनहाइट के लिए, C/5 = (F - 32)/9 में C = 100 रखने पर 100/5 = (F - 32)/9, अतः 20 = (F - 32)/9, F - 32 = 180, F = 212°F। केल्विन के लिए, K = C + 273 = 100 + 273 = 373 K। अतः 100°C = 212°F = 373 K।

उदाहरण 2: किस तापमान पर सेल्सियस और फारेनहाइट पैमानों के पाठ्यांक बराबर होते हैं?

हल: माना उस तापमान पर C = F = x है। सूत्र C/5 = (F - 32)/9 में रखने पर x/5 = (x - 32)/9, अतः 9x = 5x - 160, 4x = -160, x = -40। अतः -40°C = -40°F पर दोनों पैमानों के पाठ्यांक बराबर होते हैं।

3. ऊष्मा की इकाइयाँ और विशिष्ट ऊष्मा क्षमता

ऊष्मा की SI इकाई जूल (J) है। सामान्य उपयोग की इकाई कैलोरी (cal) है, जहाँ 1 कैलोरी वह ऊष्मा है जो 1 ग्राम जल का तापमान 1°C बढ़ाने के लिए आवश्यक है। 1 कैलोरी = 4.184 जूल होता है। जल की विशिष्ट ऊष्मा क्षमता 1 cal/g°C या 4186 J/kg°C होती है, जो सभी पदार्थों में सर्वाधिक है।

किसी पिंड को दी गई या निकाली गई ऊष्मा की गणना सूत्र Q = m c ΔT से की जाती है, जहाँ Q = ऊष्मा (जूल में), m = द्रव्यमान (किलोग्राम), c = विशिष्ट ऊष्मा क्षमता (J/kg°C) तथा ΔT = तापमान में परिवर्तन (°C में)। विशिष्ट ऊष्मा क्षमता प्रति इकाई द्रव्यमान की तापीय क्षमता है, जबकि तापीय क्षमता (heat capacity) किसी संपूर्ण पिंड का तापमान 1°C बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा है। तापीय क्षमता = m × c होती है। ऊष्मा संचरण का मूल नियम यह है कि गरम पिंड द्वारा त्यागी गई ऊष्मा = ठंडे पिंड द्वारा ग्रहण की गई ऊष्मा।

उदाहरण 3: 2 किलोग्राम जल का तापमान 20°C से 70°C तक बढ़ाने के लिए कितनी ऊष्मा की आवश्यकता होगी? जल की विशिष्ट ऊष्मा 4186 J/kg°C है।

हल: Q = m c ΔT में m = 2 kg, c = 4186 J/kg°C, ΔT = 70 - 20 = 50°C रखने पर Q = 2 × 4186 × 50 = 418600 J = 418.6 kJ। अतः 418.6 kJ ऊष्मा की आवश्यकता होगी।

उदाहरण 4: 200 ग्राम ताँबे के ब्लॉक का तापमान 10°C बढ़ाने के लिए 760 जूल ऊष्मा लगती है। ताँबे की विशिष्ट ऊष्मा क्षमता ज्ञात कीजिए।

हल: m = 200 g = 0.2 kg, ΔT = 10°C, Q = 760 J। सूत्र c = Q/(m ΔT) से c = 760/(0.2 × 10) = 760/2 = 380 J/kg°C। अतः ताँबे की विशिष्ट ऊष्मा 380 J/kg°C है।

4. ऊष्मा की अवस्था परिवर्तनों में भूमिका

पदार्थ को ऊष्मा देने पर उसका तापमान बढ़ता है, परंतु अवस्था परिवर्तन (गलन, क्वथन, उर्ध्वपातन) के दौरान तापमान स्थिर रहता है। जिस ऊष्मा से अवस्था परिवर्तन होता है परंतु तापमान में कोई परिवर्तन नहीं होता, उसे गुप्त ऊष्मा (latent heat) कहते हैं। गलन की गुप्त ऊष्मा वह ऊष्मा है जो 1 किलोग्राम ठोस को उसके गलनांक पर द्रव में बदलने के लिए आवश्यक है। जल की गलन की गुप्त ऊष्मा 3.36 × 10^5 J/kg तथा क्वथन की गुप्त ऊष्मा 2.26 × 10^6 J/kg होती है।

गुप्त ऊष्मा का सूत्र Q = m L है, जहाँ L गुप्त ऊष्मा है। जल का क्वथनांक 100°C और गलनांक 0°C होता है। समुद्र तल पर दाब बढ़ने पर क्वथनांक बढ़ता है और दाब घटने पर घटता है, यही कारण है कि पर्वतों पर पानी 100°C से कम ताप पर ही उबल जाता है। इस अवधारणा से रेलवे परीक्षा में गुप्त ऊष्मा और अवस्था परिवर्तन पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं।

उदाहरण 5: 0°C पर 500 ग्राम बर्फ को पिघलाने के लिए कितनी ऊष्मा चाहिए? गलन की गुप्त ऊष्मा = 3.36 × 10^5 J/kg है।

हल: m = 500 g = 0.5 kg, L = 3.36 × 10^5 J/kg। Q = m L = 0.5 × 3.36 × 10^5 = 1.68 × 10^5 J। अतः 1.68 × 10^5 जूल ऊष्मा की आवश्यकता होगी।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: तापमान पैमानों की तुलना

पैमाना क्वथनांक गलनांक मध्य अंतराल उपयोग क्षेत्र
सेल्सियस (°C) 100 0 100 भाग सामान्य, SI में सहायक
फारेनहाइट (°F) 212 32 180 भाग संयुक्त राज्य अमेरिका
केल्विन (K) 373 273 100 भाग SI इकाई

तालिका 2: महत्वपूर्ण सूत्र और इकाइयाँ

संकल्पना सूत्र SI इकाई
ऊष्मा Q = m c ΔT जूल (J)
गुप्त ऊष्मा Q = m L जूल (J)
सेल्सियस से केल्विन K = C + 273 केल्विन (K)
सेल्सियस-फारेनहाइट C/5 = (F - 32)/9 -
तापीय क्षमता m × c J/°C

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[ऊष्मा और तापमान] --> B[ऊष्मा - ऊर्जा का रूप]
    A --> C[तापमान - तापीय अवस्था]
    A --> D[तापमान पैमाने]
    A --> E[विशिष्ट ऊष्मा क्षमता]
    A --> F[गुप्त ऊष्मा]
    B --> B1[इकाई जूल, कैलोरी]
    B --> B2[1 cal = 4.184 J]
    D --> D1[सेल्सियस °C]
    D --> D2[फारेनहाइट °F]
    D --> D3[केल्विन K]
    D --> D4[C/5 = (F-32)/9 = (K-273)/5]
    E --> E1[Q = m c ΔT]
    F --> F1[Q = m L]
    F --> F2[गलन की गुप्त ऊष्मा]
    F --> F3[क्वथन की गुप्त ऊष्मा]

7. महत्वपूर्ण चित्र (SVG)

थर्मामीटर के तीनों पैमानों की तुलना पैमानों का मानचित्र सेल्सियस °C 100 (क्वथन) 0 (गलन) फारेनहाइट °F 212 (क्वथन) 32 (गलन) केल्विन K 373 (क्वथन) 273 (गलन) रूपांतरण: C/5 = (F-32)/9 = (K-273)/5 स्वर्ण नियम -40°C और -40°F पर दोनों पैमानों के पाठ्यांक बराबर होते हैं।

ऊष्मा का प्रवाह एवं ऊष्मा संतुलन गरम पिंड तापमान उच्च Q = m c ΔT ठंडा पिंड तापमान निम्न गरम पिंड द्वारा त्यागी ऊष्मा = ठंडे पिंड द्वारा ग्रहण की ऊष्मा महत्वपूर्ण इकाइयाँ 1 कैलोरी = 4.184 जूल जल की विशिष्ट ऊष्मा = 4186 J/kg°C (सर्वाधिक) स्वर्ण नियम ऊष्मा सदैव उच्च तापमान से निम्न तापमान की ओर प्रवाहित होती है।

8. सामान्य त्रुटियाँ

  1. छात्र ऊष्मा और तापमान को एक ही मान लेते हैं, जबकि ऊष्मा ऊर्जा है और तापमान तापीय अवस्था का माप है।
  2. सेल्सियस को केल्विन में बदलते समय K = C - 273 लिखना; सही सूत्र K = C + 273 है।
  3. रूपांतरण सूत्र में C/5 = (F - 32)/9 के स्थान पर गलत अंश-हर रखना।
  4. कैलोरी को जूल में बदलते समय 1 cal = 4.184 J के स्थान पर 4.18 या 4 को गलत तरीके से प्रयोग करना।
  5. गुप्त ऊष्मा में ऊष्मा की गणना करते समय तापमान अंतर भी जोड़ना, जबकि अवस्था परिवर्तन में ΔT = 0 होता है।
  6. विशिष्ट ऊष्मा की गणना में द्रव्यमान को किलोग्राम में न बदलकर ग्राम में रखना।
  7. -40°C पर दोनों पैमानों के बराबर होने की जानकारी न रखना, जिससे रूपांतरण प्रश्न में भ्रम होता है।
  8. दाब का प्रभाव न समझना कि पर्वतों पर क्वथनांक घट जाता है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. तीनों पैमानों के क्वथनांक (100, 212, 373) और गलनांक (0, 32, 273) रट लें।
  2. -40°C = -40°F का तथ्य याद रखें, यह प्रतिवर्ष पूछा जाता है।
  3. Q = m c ΔT में इकाई की संगति अनिवार्य रूप से जाँचें; द्रव्यमान को हमेशा किलोग्राम में रखें।
  4. अवस्था परिवर्तन वाले प्रश्न में पहले पहचानें कि गुप्त ऊष्मा लगेगी या Q = m c ΔT।
  5. जल की विशिष्ट ऊष्मा का उच्चतम मान 4186 J/kg°C प्रश्नों में बार-बार आता है।
  6. रूपांतरण प्रश्नों में दिए गए मान को पहले किलोग्राम या ग्राम में सामान्य करें, फिर सूत्र लगाएँ।
  7. 1 कैलोरी = 4.184 जूल और 1 kcal = 4184 जूल का अंतर स्पष्ट रखें।
  8. अंतिम उत्तर में इकाई लिखना कभी न भूलें, क्योंकि अंक काटे जाते हैं।

10. निष्कर्ष

ऊष्मा और तापमान भौतिकी की मूलभूत अवधारणाएँ हैं जिन पर संपूर्ण ऊष्मागतिकी टिकी है। इस अध्याय में हमने ऊष्मा और तापमान के मध्य अंतर, तीनों तापमान पैमानों के बीच रूपांतरण सूत्र, ऊष्मा की SI इकाई जूल, विशिष्ट ऊष्मा क्षमता तथा गुप्त ऊष्मा की अवधारणाओं को सूत्रों और संख्यात्मक उदाहरणों के साथ समझा। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में इनमें से कम से कम 2 से 3 प्रश्न अवश्य आते हैं। सूत्रों को सटीक रूप से याद रखने, इकाइयों को संगत बनाने तथा रूपांतरण के नियमित अभ्यास से विद्यार्थी इन प्रश्नों को न्यूनतम समय में पूर्ण सटीकता के साथ हल कर सकता है। यह अध्याय आगे के तापीय प्रसार, ऊष्मा संचरण और ऊष्मागतिकी के अध्यायों की मजबूत नींव भी रखता है।