विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: भौतिकी – ऊष्मा ध्वनि और प्रकाश विषय-वस्तु: 12.5 आवृत्ति आयाम और पिच
ध्वनि को हम तीन मुख्य गुणों से पहचानते हैं — प्रबलता (loudness), पिच या तारत्व (pitch) और गुणवत्ता या टिम्बर (quality)। ये तीनों गुण क्रमशः तरंग के आयाम, आवृत्ति और तरंग रूप पर निर्भर करते हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में आवृत्ति, आयाम और पिच से प्रतिवर्ष 2 से 3 प्रश्न पूछे जाते हैं। इनमें आवृत्ति और पिच के मध्य संबंध, आयाम और प्रबलता के मध्य संबंध, ध्वनि की तीव्रता तथा इन अवधारणाओं पर आधारित व्यावहारिक प्रश्न आते हैं। इसके अलावा स्त्री और पुरुष की आवाज़ की पिच के अंतर पर भी प्रश्न पूछे जाते हैं।
आवृत्ति किसी ध्वनि तरंग की प्रति सेकंड होने वाले पूर्ण दोलनों की संख्या है। आवृत्ति जितनी अधिक होगी, ध्वनि उतनी ही तीक्ष्ण (पतली और ऊँची) सुनाई देगी, अर्थात पिच उतनी ही अधिक होगी। आयाम तरंग का अधिकतम विस्थापन है। आयाम जितना अधिक होगा, ध्वनि उतनी ही प्रबल (तेज़) सुनाई देगी। पिच आवृत्ति से निर्धारित होने वाला ध्वनि का वह गुण है जो ध्वनि को तीक्ष्ण या भारी बनाता है। उदाहरण के लिए, मच्छर की भिनभिनाहट की आवृत्ति बहुत अधिक होती है, इसलिए उसकी पिच ऊँची (तीक्ष्ण) होती है, जबकि ढोल की ध्वनि की आवृत्ति कम होती है और पिच भारी होती है।
इस विषय में हम आवृत्ति, आयाम और पिच की परिभाषा, इनके SI मात्रक, आवृत्ति-पिच तथा आयाम-प्रबलता के मध्य संबंध, ध्वनि की तीव्रता की इकाई डेसीबल तथा इन सभी के मध्य संबंध स्थापित करने वाले सूत्रों का अध्ययन करेंगे। हम संख्यात्मक उदाहरणों के द्वारा तरंग के आयाम, आवृत्ति और समय काल की गणना सीखेंगे। साथ ही मानव श्रवण की विशेषताओं और ध्वनि की तीव्रता के स्तर को समझेंगे। रेलवे परीक्षा में सबसे अधिक प्रश्न आवृत्ति बढ़ाने पर पिच और आयाम बढ़ाने पर प्रबलता पर आधारित होते हैं।
आवृत्ति किसी ध्वनि स्रोत के कंपन की प्रति सेकंड संख्या है, जिसे हर्ट्ज़ (Hz) में मापा जाता है। एक हर्ट्ज़ का अर्थ है प्रति सेकंड एक पूर्ण दोलन। आवृत्ति जितनी अधिक होती है, तरंगदैर्घ्य उतनी ही कम होती है (क्योंकि v = fλ), और ध्वनि उतनी ही तीक्ष्ण सुनाई देती है। पिच (तारत्व) ध्वनि का वह गुण है जिससे हम यह बता पाते हैं कि ध्वनि तीक्ष्ण (ऊँची) है या भारी (धीमी)। पिच केवल आवृत्ति पर निर्भर करती है। उच्च आवृत्ति की ध्वनि की पिच ऊँची तथा निम्न आवृत्ति की ध्वनि की पिच भारी होती है।
पिच के व्यावहारिक उदाहरण: स्त्री की आवाज़ की आवृत्ति (लगभग 250-400 Hz) पुरुष की आवाज़ (लगभग 80-200 Hz) से अधिक होती है, इसलिए स्त्री की आवाज़ की पिच ऊँची होती है। वायलिन की ध्वनि तीक्ष्ण होती है क्योंकि उसकी आवृत्ति अधिक होती है, जबकि शहनाई की ध्वनि अपेक्षाकृत भारी होती है। गिटार में तार जितना पतला और तना हुआ होता है, उसकी आवृत्ति उतनी अधिक होती है और पिच उतनी ऊँची होती है। बच्चों की आवाज़ की पिच वयस्कों की तुलना में ऊँची होती है। संगीत में स्वरों की पिच को सुर कहा जाता है।
उदाहरण 1: किसी तार की आवृत्ति 440 Hz है। उसका समय काल ज्ञात कीजिए।
हल: T = 1/f = 1/440 = 0.00227 s। अतः समय काल लगभग 2.27 × 10^-3 सेकंड होगा।
उदाहरण 2: एक ध्वनि तरंग की आवृत्ति 550 Hz और गति 330 m/s है। तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए।
हल: λ = v/f = 330/550 = 0.6 m। अतः तरंगदैर्घ्य 0.6 मीटर होगा।
आयाम किसी तरंग में कणों का साम्य स्थिति से अधिकतम विस्थापन है, जिसे मीटर में मापा जाता है। आयाम ध्वनि की प्रबलता निर्धारित करता है। आयाम जितना अधिक होगा, ध्वनि की तीव्रता उतनी अधिक होगी और ध्वनि उतनी ही तेज़ (प्रबल) सुनाई देगी। आयाम कम होने पर ध्वनि धीमी सुनाई देती है। ध्वनि की प्रबलता का संबंध तरंग की ऊर्जा से होता है; ऊर्जा आयाम के वर्ग के अनुपाती होती है (E ∝ A^2)। अतः आयाम दोगुना करने पर ऊर्जा चार गुना हो जाती है।
ध्वनि की तीव्रता (intensity) प्रति एकक क्षेत्रफल प्रति सेकंड संचरित होने वाली ऊर्जा है, जिसकी इकाई वाट प्रति वर्ग मीटर (W/m^2) होती है। ध्वनि की प्रबलता के स्तर (loudness level) को डेसीबल (dB) में मापा जाता है। श्रवण की दहलीज (threshold of hearing) 0 dB है, जो मानव कान द्वारा सुनाई देने वाली सबसे कम तीव्रता की ध्वनि है। फुसफुसाहट लगभग 20 dB, सामान्य बातचीत लगभग 60 dB, यातायात का शोर लगभग 80 dB, और रॉक संगीत या जेट इंजन लगभग 120 dB तीव्रता का होता है। 120 dB से अधिक की ध्वनि से कानों में दर्द होता है।
उदाहरण 3: किसी तरंग का आयाम 0.02 m है। यदि आयाम दोगुना कर दिया जाए तो ऊर्जा में कितना परिवर्तन होगा?
हल: ऊर्जा E ∝ A^2 है। आयाम दोगुना (2A) करने पर नई ऊर्जा ∝ (2A)^2 = 4A^2, अतः ऊर्जा चार गुना हो जाएगी।
उदाहरण 4: एक ध्वनि तरंग की तीव्रता को 2 गुना बढ़ाया जाता है। यदि प्रारंभिक तीव्रता 10^-4 W/m^2 हो तो नई तीव्रता क्या होगी?
हल: नई तीव्रता = 2 × 10^-4 W/m^2। अतः तीव्रता 2 × 10^-4 W/m^2 होगी।
ध्वनि की गुणवत्ता (टिम्बर) वह गुण है जिससे हम समान पिच और प्रबलता की दो ध्वनियों को अलग-अलग पहचान सकते हैं। उदाहरण के लिए, वायलिन और शहनाई से समान आवृत्ति और आयाम की ध्वनि निकलने पर भी हम उन्हें अलग पहचान लेते हैं, क्योंकि उनकी तरंगों का आकार भिन्न होता है। गुणवत्ता ध्वनि तरंग के रूप (waveform) पर निर्भर करती है, जो मूल स्वर के साथ संनादी (harmonics) के मिश्रण से निर्धारित होती है। यही कारण है कि दो अलग-अलग वाद्य यंत्रों की आवाज़ अलग सुनाई देती है।
मानव कान लगभग 20 Hz से 20,000 Hz की ध्वनि सुन सकता है। आवृत्ति के साथ श्रवण की संवेदनशीलता बदलती रहती है; मानव कान 1000 Hz से 5000 Hz के बीच की ध्वनि के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होता है। ध्वनि की प्रबलता का आभास तीव्रता के लघुगणक (logarithm) के समानुपाती होता है, इसलिए तीव्रता को डेसीबल पैमाने पर लघुगणकीय रूप में व्यक्त किया जाता है। ध्वनि की ऊँचाई (pitch) और आयतन (loudness) के मध्य अंतर को स्पष्ट रखना परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है — ऊँचाई आवृत्ति पर निर्भर करती है जबकि आयतन आयाम पर।
महत्वपूर्ण तथ्य: पिच और प्रबलता अलग-अलग अवधारणाएँ हैं। यदि किसी ध्वनि की आवृत्ति बढ़ा दी जाए परंतु आयाम स्थिर रखा जाए, तो पिच ऊँची होगी परंतु प्रबलता में कोई परिवर्तन नहीं होगा। इसी प्रकार आयाम बढ़ाने पर केवल प्रबलता बढ़ती है, पिच अपरिवर्तित रहती है। यह तथ्य रेलवे परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है।
उदाहरण 5: यदि किसी तरंग की आवृत्ति 300 Hz है तो 20 दोलन कितने समय में पूरे होंगे?
हल: एक दोलन का समय T = 1/f = 1/300 s। 20 दोलनों का समय = 20/300 = 0.0667 s। अतः लगभग 0.067 सेकंड लगेंगे।
| ध्वनि का गुण | निर्धारक | प्रभाव |
|---|---|---|
| पिच (ऊँचाई) | आवृत्ति | आवृत्ति अधिक = पिच ऊँची |
| प्रबलता (आयतन) | आयाम | आयाम अधिक = ध्वनि तेज़ |
| गुणवत्ता (टिम्बर) | तरंग रूप | समान पिच की ध्वनियाँ अलग पहचान |
| ध्वनि स्रोत | तीव्रता (dB) |
|---|---|
| श्रवण की दहलीज | 0 dB |
| फुसफुसाहट | 20 dB |
| सामान्य बातचीत | 60 dB |
| यातायात का शोर | 80 dB |
| जेट इंजन | 120 dB |
flowchart TD
A[आवृत्ति आयाम और पिच] --> B[आवृत्ति f]
A --> C[आयाम A]
A --> D[पिच]
A --> E[प्रबलता]
A --> F[गुणवत्ता]
B --> B1[इकाई हर्ट्ज़ Hz]
B --> B2[T = 1/f, v = fλ]
B --> D1[आवृत्ति अधिक = पिच ऊँची]
C --> C1[इकाई मीटर]
C --> C2[E ∝ A^2]
C --> E1[आयाम अधिक = ध्वनि तेज़]
E --> E2[तीव्रता की इकाई W/m^2]
E --> E3[प्रबलता स्तर डेसीबल dB]
F --> F1[तरंग रूप पर निर्भर]
F --> F2[वायलिन-शहनाई अलग]
आवृत्ति, आयाम और पिच ध्वनि को समझने के लिए आधारभूत अवधारणाएँ हैं। इस अध्याय में हमने सीखा कि पिच आवृत्ति से निर्धारित होती है और आवृत्ति बढ़ने पर ध्वनि तीक्ष्ण हो जाती है, जबकि प्रबलता आयाम से निर्धारित होती है और आयाम बढ़ने पर ध्वनि तेज़ हो जाती है। हमने ध्वनि की तीव्रता और प्रबलता स्तर (डेसीबल), ध्वनि की गुणवत्ता (टिम्बर) तथा मानव श्रवण की विशेषताओं को भी समझा। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में इस विषय से 2 से 3 प्रश्न अवश्य आते हैं। पिच-आवृत्ति और प्रबलता-आयाम के संबंधों की स्पष्ट समझ, E ∝ A^2 के तथ्य और डेसीबल स्तरों की जानकारी से विद्यार्थी इन प्रश्नों को शीघ्रता और सटीकता के साथ हल कर सकता है। यह ज्ञान आगे ध्वनि के परावर्तन तथा प्रतिध्वनि के अध्यायों में सहायक होता है।