विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: भौतिकी – ऊष्मा ध्वनि और प्रकाश विषय-वस्तु: 12.6 ध्वनि का परावर्तन
ध्वनि का परावर्तन वह घटना है जिसमें ध्वनि तरंगें किसी कठोर या चिकनी सतह से टकराकर वापस लौट जाती हैं। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में ध्वनि के परावर्तन से प्रतिवर्ष 2 से 3 प्रश्न पूछे जाते हैं। इनमें प्रतिध्वनि (echo) की अवधारणा, प्रतिध्वनि के लिए न्यूनतम दूरी, ध्वनि का संश्रय (reverberation), परावर्तन के नियम तथा सोनार जैसे व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर प्रश्न आते हैं। इसके अलावा ध्वनि के परावर्तन से संबंधित संख्यात्मक प्रश्न जिनमें दूरी, समय और गति की गणना करनी होती है, बहुत महत्वपूर्ण हैं।
जब ध्वनि तरंगें किसी बाधा जैसे दीवार, पहाड़, इमारत या घाटी से टकराती हैं, तो वे परावर्तित होकर वापस आती हैं। परावर्तित ध्वनि को प्रतिध्वनि कहते हैं। प्रतिध्वनि सुनने के लिए यह आवश्यक है कि मूल ध्वनि और परावर्तित ध्वनि के बीच न्यूनतम समय अंतराल 0.1 सेकंड हो। चूँकि ध्वनि की गति लगभग 344 m/s होती है, इसलिए ध्वनि को 0.1 सेकंड में 34.4 मीटर की दूरी तय करनी पड़ती है, जिसका अर्थ है कि श्रोता और परावर्तक सतह के बीच न्यूनतम दूरी 17.2 मीटर होनी चाहिए। 0.1 सेकंड से कम समय अंतराल में आने वाली परावर्तित ध्वनि मूल ध्वनि के साथ मिल जाती है।
इस विषय में हम ध्वनि के परावर्तन के नियमों, प्रतिध्वनि, ध्वनि का संश्रय, ध्वनि अवशोषण तथा परावर्तन के व्यावहारिक अनुप्रयोगों — सोनार, मेगाफोन, श्रवण यंत्र, स्तंभों की गोल आकृति — का अध्ययन करेंगे। हम दूरी-समय-गति पर आधारित संख्यात्मक उदाहरणों का अभ्यास करेंगे। साथ ही सभा भवनों और रेलवे स्टेशनों में ध्वनि नियंत्रण के उपायों को समझेंगे। रेलवे परीक्षा में प्रतिध्वनि की न्यूनतम दूरी 17.2 मीटर तथा दूरी की गणना से संबंधित प्रश्न सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं।
ध्वनि के परावर्तन के दो नियम हैं। प्रथम नियम: आपतित तरंग, परावर्तित तरंग और अभिलंब सदैव एक ही तल में होते हैं। द्वितीय नियम: आपतन कोण सदैव परावर्तन कोण के बराबर होता है (i = r)। ये नियम प्रकाश के परावर्तन के नियमों के समान हैं। ध्वनि का परावर्तन बड़ी, चिकनी और कठोर सतहों से सबसे अच्छा होता है। मुलायम, झालरदार या खुरदरी सतहें ध्वनि को अवशोषित कर लेती हैं। यही कारण है कि रेलवे स्टेशन, सभा भवन और थिएटरों में ध्वनि को नियंत्रित करने के लिए उपयुक्त पदार्थों का चयन किया जाता है।
प्रतिध्वनि (echo) ध्वनि के परावर्तन का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है। जब कोई व्यक्ति घाटी या पहाड़ के सामने जोर से बोलता है, तो उसकी आवाज़ का प्रतिबिंब कुछ समय बाद वापस आता है। प्रतिध्वनि सुनने की न्यूनतम दूरी 17.2 मीटर है। यदि परावर्तक सतह 17.2 मीटर से निकट हो तो प्रतिध्वनि नहीं सुनाई देती, क्योंकि 0.1 सेकंड से कम समय में आने वाली ध्वनि मूल ध्वनि के साथ मिलकर एक लंबी ध्वनि का भ्रम पैदा करती है। खाली कमरे में बोलने पर ध्वनि अधिक देर तक गूंजती है, जबकि भरे कमरे में नहीं, क्योंकि मुलायम पदार्थ ध्वनि अवशोषित करते हैं।
प्रतिध्वनि की दूरी का सूत्र: प्रतिध्वनि में ध्वनि परावर्तक सतह तक जाकर वापस आती है, अतः कुल तय की गई दूरी 2d होती है। यदि v ध्वनि की गति और t कुल समय हो तो:
2d = v × t या d = (v × t)/2
जहाँ d = श्रोता और परावर्तक सतह के बीच की दूरी।
उदाहरण 1: एक व्यक्ति चट्टान के सामने खड़ा है। उसकी आवाज़ के 2 सेकंड बाद प्रतिध्वनि सुनाई देती है। चट्टान की दूरी ज्ञात कीजिए। (ध्वनि की गति = 343 m/s)
हल: 2d = v × t = 343 × 2 = 686 m, अतः d = 686/2 = 343 m। चट्टान व्यक्ति से 343 मीटर दूर है।
उदाहरण 2: एक सोनार से पिंग भेजने के 1.5 सेकंड बाद प्रतिध्वनि प्राप्त होती है। जल में ध्वनि की गति 1500 m/s है। पिंड की गहराई ज्ञात कीजिए।
हल: 2d = v × t = 1500 × 1.5 = 2250 m, अतः d = 2250/2 = 1125 m। अतः पिंड की गहराई 1125 मीटर है।
ध्वनि का संश्रय (reverberation) वह घटना है जिसमें ध्वनि तरंगें किसी बंद स्थान की विभिन्न सतहों से बार-बार परावर्तित होती हैं, जिससे ध्वनि स्रोत के रुकने के बाद भी कुछ समय तक ध्वनि सुनाई देती रहती है। यदि संश्रय अधिक समय तक बना रहे तो ध्वनि अस्पष्ट हो जाती है। सभा भवनों, थिएटरों, सिनेमा हॉल और व्याख्यान कक्षों में ध्वनि स्पष्ट सुनाई दे इसके लिए संश्रय को नियंत्रित करना आवश्यक है। संश्रय के नियंत्रण के लिए छतों और दीवारों पर ध्वनि अवशोषक पदार्थ लगाए जाते हैं।
ध्वनि अवशोषण के लिए मुलायम और झालरदार पदार्थ सर्वोत्तम होते हैं। सभा भवनों में झालरदार पर्दे, मुलायम कुशन, कार्पेट, कॉर्क की टाइलें और ऊनी पदार्थ लगाए जाते हैं। रेलवे स्टेशनों और बड़े हॉलों में ध्वनि प्रदूषण घटाने के लिए भी अवशोषक पदार्थों का उपयोग होता है। ध्वनि को अवशोषित करने वाले पदार्थों को ध्वनि अवशोषक कहते हैं। इसके विपरीत, ध्वनि को बढ़ाने (प्रवर्धन) के लिए कठोर और चिकनी सतहों का उपयोग होता है। शंकु के आकार के परावर्तक, जैसे मेगाफोन और श्रवण यंत्र, ध्वनि को एक दिशा में केंद्रित करते हैं।
ध्वनि के परावर्तन का एक दिलचस्प उदाहरण स्तंभों का गोलाकार होना है। यदि सभा भवन की छत को गोलाकार (गुंबद) बनाया जाए, तो ध्वनि परावर्तन के बाद मंच के एक बिंदु पर केंद्रित हो सकती है, जिससे ध्वनि अस्पष्ट हो सकती है। इसीलिए गोल छतों को तोड़ा जाता है या ध्वनि अवशोषक से ढका जाता है। शिकारी खोखले हाथों से चीखकर आवाज़ को दिशा देते हैं, और घाटी में बोलने पर अनेक बार प्रतिध्वनि सुनाई देती है। पहाड़ों की श्रृंखला में ध्वनि अनेक बार परावर्तित होती है और कई प्रतिध्वनियाँ सुनाई देती हैं।
ध्वनि के परावर्तन का सबसे महत्वपूर्ण अनुप्रयोग सोनार (SONAR — Sound Navigation and Ranging) है। सोनार जल में पराश्रव्य तरंगें भेजता है और उनके परावर्तन से पानी के अंदर की वस्तुओं — जहाज, मछली समूह, जलमग्न चट्टानों — की स्थिति और दूरी ज्ञात की जाती है। यही सिद्धांत अल्ट्रासाउंड में भी प्रयोग होता है, जिससे गर्भ में शिशु की छवि और अंगों की जाँच की जाती है। भूकंप विज्ञान में भूकंपीय तरंगों के परावर्तन से पृथ्वी की आंतरिक संरचना ज्ञात की जाती है।
मेगाफोन और श्रवण यंत्र ध्वनि के परावर्तन पर आधारित होते हैं। मेगाफोन का शंकु आकार ध्वनि को एक ही दिशा में निर्देशित करता है, जिससे आवाज़ दूर तक सुनाई देती है। श्रवण यंत्र में भी ध्वनि तरंगों को शंकु द्वारा केंद्रित कर कान के अंदर निर्देशित किया जाता है। डॉक्टरों द्वारा प्रयोग होने वाला स्टेथोस्कोप भी ध्वनि के परावर्तन (एकाग्र) सिद्धांत पर कार्य करता है। रेलवे में सुरंगों और पुलों के निरीक्षण में भी ध्वनि परावर्तन आधारित उपकरण प्रयोग होते हैं।
उदाहरण 3: एक जहाज से समुद्र तल तक ध्वनि तरंग भेजी जाती है। 2.4 सेकंड में वापस आ जाती है। समुद्र की गहराई ज्ञात कीजिए। (जल में ध्वनि की गति = 1500 m/s)
हल: 2d = v × t = 1500 × 2.4 = 3600 m, अतः d = 3600/2 = 1800 m। अतः समुद्र की गहराई 1800 मीटर है।
उदाहरण 4: प्रतिध्वनि सुनने के लिए परावर्तक सतह की न्यूनतम दूरी ज्ञात कीजिए। (ध्वनि की गति = 344 m/s, न्यूनतम समय अंतराल = 0.1 s)
हल: 2d = v × t = 344 × 0.1 = 34.4 m, अतः d = 34.4/2 = 17.2 m। अतः न्यूनतम दूरी 17.2 मीटर है।
| अवधारणा | विवरण |
|---|---|
| प्रतिध्वनि | परावर्तित ध्वनि जो स्पष्ट सुनाई दे |
| न्यूनतम दूरी | 17.2 मीटर |
| न्यूनतम समय अंतराल | 0.1 सेकंड |
| दूरी सूत्र | d = (v × t)/2 |
| संश्रय | बार-बार परावर्तन से ध्वनि का लंबे समय तक सुनाई देना |
| अनुप्रयोग | सिद्धांत |
|---|---|
| सोनार | जल में पराश्रव्य तरंगों का परावर्तन |
| अल्ट्रासाउंड | चिकित्सा में ध्वनि परावर्तन |
| मेगाफोन | ध्वनि को एक दिशा में केंद्रित करना |
| स्टेथोस्कोप | ध्वनि का संग्रहण और निर्देशन |
| सभा भवन अवशोषक | संश्रय नियंत्रण |
flowchart TD
A[ध्वनि का परावर्तन] --> B[परावर्तन के नियम]
A --> C[प्रतिध्वनि]
A --> D[संश्रय]
A --> E[ध्वनि अवशोषण]
A --> F[अनुप्रयोग]
B --> B1[आपतित, परावर्तित, अभिलंब एक तल में]
B --> B2[i = r]
C --> C1[न्यूनतम दूरी 17.2 m]
C --> C2[d = (v × t)/2]
D --> D1[बार-बार परावर्तन]
D --> D2[सभा भवन में नियंत्रण]
E --> E1[झालरदार पर्दे, कुशन]
F --> F1[सोनार]
F --> F2[अल्ट्रासाउंड]
F --> F3[मेगाफोन]
ध्वनि का परावर्तन ध्वनि तरंगों के व्यवहार को समझने का एक महत्वपूर्ण पहलू है। इस अध्याय में हमने परावर्तन के दो नियमों, प्रतिध्वनि की अवधारणा, न्यूनतम दूरी 17.2 मीटर और दूरी सूत्र d = (v × t)/2 का अध्ययन किया। हमने ध्वनि के संश्रय, ध्वनि अवशोषण तथा सोनार, अल्ट्रासाउंड, मेगाफोन जैसे व्यावहारिक अनुप्रयोगों को भी समझा। रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 परीक्षा में इस विषय से 2 से 3 प्रश्न अवश्य आते हैं। प्रतिध्वनि की गणना की सही विधि, अनुप्रयोगों की जानकारी और परावर्तन के नियमों की पकड़ से विद्यार्थी इन प्रश्नों को आसानी से हल कर सकता है। यह अध्याय आगे प्रकाश के परावर्तन, दर्पण और लेंस के अध्यायों की समझ के लिए भी आधारभूत है।