विद्युत धारा Notes

विद्युत धारा

विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: भौतिकी – विद्युत और चुंबकत्व विषय-वस्तु: 13.2 विद्युत धारा

1. परिचय

विद्युत धारा आवेशों का निर्देशित प्रवाह है। जब किसी चालक के सिरों के बीच विभवांतर उत्पन्न होता है, तो मुक्त इलेक्ट्रॉन नियत दिशा में गति करने लगते हैं और यही निर्देशित प्रवाह विद्युत धारा कहलाता है। धातुओं में धारा का वाहक मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं, जबकि विद्युत अपघट्यों में धन और ऋण दोनों आयन धारा का वहन करते हैं। विद्युत धारा की दिशा धन आवेश के प्रवाह की दिशा में मानी जाती है, जिसे पारंपरिक दिशा कहते हैं। वास्तव में इलेक्ट्रॉन विपरीत दिशा में प्रवाहित होते हैं।

विद्युत धारा की SI इकाई एम्पियर (A) है। यदि किसी चालक के परिच्छेद से 1 सेकंड में 1 कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है, तो धारा 1 एम्पियर होती है। धारा मापने के लिए अमीटर का उपयोग किया जाता है, जिसे परिपथ में श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है। धारा का SI मात्रक एम्पियर महान वैज्ञानिक एंद्रे-मैरी एम्पियर के नाम पर रखा गया है। रेलवे के विद्युत प्रणालियों में बहने वाली धारा की सही माप और नियंत्रण सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।

इस अध्याय में हम विद्युत धारा की परिभाषा, उसका सूत्र I = Q/t, धारा की दिशा, धारा के प्रकार (दिष्ट धारा और प्रत्यावर्ती धारा), धारा के प्रभाव (तापीय, रासायनिक और चुंबकीय) तथा अमीटर द्वारा धारा मापन का अध्ययन करेंगे। धारा की गणना से जुड़े संख्यात्मक प्रश्न परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं, इसलिए सूत्रों का सही उपयोग सीखना आवश्यक है। यह अध्याय विभवांतर और प्रतिरोध जैसे आगे के अध्यायों की नींव रखता है।

2. विद्युत धारा की परिभाषा और सूत्र

किसी चालक के किसी भी अनुप्रस्थ परिच्छेद से एकांक समय में प्रवाहित होने वाले कुल आवेश को विद्युत धारा कहते हैं। इसे सूत्र द्वारा इस प्रकार व्यक्त करते हैं:

I = Q / t

जहाँ I विद्युत धारा (एम्पियर में), Q प्रवाहित आवेश (कूलॉम में) तथा t समय (सेकंड में) है। यदि धारा का परिमाण और दिशा समय के साथ स्थिर रहती है, तो उसे स्थिर (दिष्ट) धारा कहते हैं। धारा एक अदिश राशि है, परंतु इसकी दिशा प्रवाह की दिशा द्वारा बताई जाती है।

उदाहरण 1: किसी चालक के परिच्छेद से 5 सेकंड में 20 कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है। विद्युत धारा ज्ञात कीजिए।

हल: I = Q/t = 20/5 = 4 एम्पियर।

उदाहरण 2: 2 एम्पियर की धारा किसी तार में 10 सेकंड तक प्रवाहित की जाती है। प्रवाहित कुल आवेश ज्ञात कीजिए।

हल: Q = I × t = 2 × 10 = 20 कूलॉम।

इलेक्ट्रॉनों की संख्या से आवेश: यदि n इलेक्ट्रॉन प्रवाहित होते हैं, तो प्रवाहित आवेश Q = ne होगा। चूँकि e = 1.6 × 10⁻¹⁹ कूलॉम, इसलिए I = ne/t भी लिखा जा सकता है।

उदाहरण 3: किसी तार में 2 एम्पियर की धारा प्रवाहित हो रही है। 1 सेकंड में प्रवाहित इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए।

हल: n = I × t / e = 2 × 1 / (1.6 × 10⁻¹⁹) = 1.25 × 10¹⁹ इलेक्ट्रॉन।

3. धारा की दिशा और धारा के प्रभाव

धारा की दिशा: परंपरा के अनुसार विद्युत धारा की दिशा धन टर्मिनल से ऋण टर्मिनल की ओर मानी जाती है, जबकि वास्तव में इलेक्ट्रॉन ऋण टर्मिनल से धन टर्मिनल की ओर प्रवाहित होते हैं। इस प्रकार इलेक्ट्रॉनों की गति की दिशा धारा की दिशा के विपरीत होती है।

धारा के तीन मुख्य प्रभाव:

तापीय प्रभाव: जब धारा किसी प्रतिरोध से प्रवाहित होती है, तो ऊष्मा उत्पन्न होती है। इसी सिद्धांत पर विद्युत हीटर, गीजर, इस्त्री तथा फ्यूज तार कार्य करते हैं। तापीय प्रभाव के लिए जूल का नियम H = I²Rt है।

रासायनिक प्रभाव: धारा के प्रवाह से विद्युत अपघट्यों में रासायनिक परिवर्तन होते हैं, जैसे जल का विद्युत अपघटन तथा धातुओं पर विद्युतलेपन। इस सिद्धांत पर बैटरी चार्जिंग और इलेक्ट्रोप्लेटिंग कार्य करती है।

चुंबकीय प्रभाव: धारा प्रवाहित करने वाले चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। इसी प्रभाव पर विद्युत चुंबक, मोटर और घंटी कार्य करते हैं। यह प्रभाव 1820 में ओर्स्टेड द्वारा खोजा गया था।

4. धारा के प्रकार और धारा का मापन

दिष्ट धारा (DC): वह धारा जिसकी दिशा समय के साथ नहीं बदलती, दिष्ट धारा कहलाती है। बैटरी, सेल और दिष्टकारी द्वारा उत्पन्न धारा दिष्ट धारा होती है। रेलवे की सिग्नलिंग प्रणाली में DC का व्यापक उपयोग होता है।

प्रत्यावर्ती धारा (AC): वह धारा जिसकी दिशा और परिमाण समय के साथ आवर्त रूप से बदलते रहते हैं, प्रत्यावर्ती धारा कहलाती है। भारत में घरेलू आपूर्ति की आवृत्ति 50 हर्ट्ज़ है, जिसका अर्थ है कि धारा प्रति सेकंड 50 बार अपनी दिशा बदलती है। रेलवे की ट्रैक्शन प्रणाली में भी AC का उपयोग होता है।

धारा का मापन: विद्युत धारा मापने के लिए अमीटर का उपयोग किया जाता है। अमीटर को सदैव परिपथ में श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है, ताकि पूरी धारा अमीटर से होकर गुजरे। आदर्श अमीटर का प्रतिरोध शून्य होता है। धारा मापने के लिए अमीटर को धन और ऋण टर्मिनलों के साथ सही ध्रुवता में जोड़ना चाहिए।

उदाहरण 4: किसी परिपथ में 5 एम्पियर की धारा 0.5 घंटे तक प्रवाहित होती है। कुल प्रवाहित आवेश ज्ञात कीजिए।

हल: t = 0.5 × 3600 = 1800 सेकंड। Q = I × t = 5 × 1800 = 9000 कूलॉम।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: विद्युत धारा के सूत्र और मात्रक

राशि सूत्र SI मात्रक
विद्युत धारा I = Q/t एम्पियर (A)
आवेश Q = I × t कूलॉम (C)
इलेक्ट्रॉनों की संख्या n = Q/e = It/e विमाहीन
ऊष्मा (जूल का नियम) H = I²Rt जूल (J)

तालिका 2: दिष्ट धारा और प्रत्यावर्ती धारा की तुलना

गुण दिष्ट धारा (DC) प्रत्यावर्ती धारा (AC)
दिशा स्थिर रहती है समय के साथ बदलती है
परिमाण स्थिर आवर्त रूप से बदलता है
स्रोत बैटरी, सेल, दिष्टकारी प्रत्यावर्तित्र (जनरेटर)
उपयोग सिग्नलिंग, बैटरी चार्जिंग विद्युत आपूर्ति, ट्रैक्शन
आवृत्ति शून्य भारत में 50 हर्ट्ज़

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[विद्युत धारा] --> B[परिभाषा I = Q/t]
    A --> C[दिशा]
    A --> D[प्रकार]
    A --> E[प्रभाव]
    A --> F[मापन]
    B --> B1[मात्रक एम्पियर]
    C --> C1[पारंपरिक दिशा धन से ऋण]
    C --> C2[इलेक्ट्रॉन विपरीत दिशा में]
    D --> D1[दिष्ट धारा DC]
    D --> D2[प्रत्यावर्ती धारा AC 50 Hz]
    E --> E1[तापीय H = I²Rt]
    E --> E2[रासायनिक विद्युत अपघटन]
    E --> E3[चुंबकीय विद्युत चुंबक]
    F --> F1[अमीटर श्रेणी क्रम में]

7. महत्वपूर्ण चित्र (SVG)

विद्युत धारा का प्रवाह + धन - ऋण धारा की दिशा (पारंपरिक) --> इलेक्ट्रॉनों की दिशा --> धारा की दिशा इलेक्ट्रॉनों की दिशा के विपरीत होती है I = Q / t (एम्पियर = कूलॉम / सेकंड) अमीटर परिपथ में श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है स्वर्ण नियम धारा की पारंपरिक दिशा इलेक्ट्रॉन प्रवाह के विपरीत होती है।

दिष्ट धारा और प्रत्यावर्ती धारा के ग्राफ 0 दिष्ट धारा (DC) प्रत्यावर्ती धारा (AC) भारत में AC आपूर्ति की आवृत्ति 50 हर्ट्ज़ होती है स्वर्ण नियम DC की दिशा नहीं बदलती, AC की दिशा आवर्त रूप से बदलती है।

8. सामान्य त्रुटियाँ

  1. धारा का सूत्र लिखते समय I = Q/t के स्थान पर I = Q × t लिखना सबसे आम गलती है।
  2. धारा की दिशा को इलेक्ट्रॉनों की गति की दिशा के बराबर मान लेना, जबकि यह विपरीत होती है।
  3. समय को सेकंड में बदलना भूल जाना; जैसे घंटों में दिया गया समय सीधे सूत्र में रखना।
  4. धारा का मात्रक एम्पियर लिखने के स्थान पर वोल्ट लिख देना।
  5. अमीटर को परिपथ में समानांतर क्रम में जोड़ना, जबकि इसे श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है।
  6. इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात करते समय आवेश को इलेक्ट्रॉन के आवेश से गुणा कर देना, जबकि भाग देना होता है।
  7. जूल के नियम H = I²Rt में धारा के वर्ग को लिखना भूल जाना।
  8. AC की आवृत्ति को 50 Hz के स्थान पर 100 Hz लिखना, जबकि भारत में 50 Hz होती है।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. धारा के प्रश्नों में पहले सभी राशियों को SI मात्रकों में बदलें, विशेषकर समय को सेकंड में।
  2. I = Q/t से आवेश, धारा और समय तीनों ज्ञात करने की प्रैक्टिस करें।
  3. इलेक्ट्रॉनों की संख्या के प्रश्न में n = It/e का प्रयोग करें और e का मान 1.6 × 10⁻¹⁹ लें।
  4. अमीटर (श्रेणी) और वोल्टमीटर (समानांतर) के जोड़ने के तरीके को स्पष्ट रूप से अलग समझें।
  5. तापीय, रासायनिक और चुंबकीय प्रभावों के उदाहरण अलग-अलग याद रखें।
  6. DC और AC की तुलना वाली तालिका को याद रखें, यह परीक्षा में अधिक पूछा जाता है।
  7. 1 एम्पियर = 1 कूलॉम प्रति सेकंड की परिभाषा शब्दों में लिखने में सक्षम हों।

10. निष्कर्ष

विद्युत धारा आवेशों का निर्देशित प्रवाह है, जिसकी SI इकाई एम्पियर है। इस अध्याय में हमने धारा के सूत्र I = Q/t, उसकी पारंपरिक दिशा, दिष्ट और प्रत्यावर्ती धारा के बीच अंतर तथा धारा के तापीय, रासायनिक और चुंबकीय प्रभावों का अध्ययन किया। धारा के मापन के लिए अमीटर को श्रेणी क्रम में जोड़ने की विधि भी सीखी। संख्यात्मक उदाहरणों से आवेश, धारा और इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना का अभ्यास किया। यह समझ रेलवे के विद्युत परिपथों के रखरखाव, निरीक्षण और सुरक्षित संचालन में अत्यंत उपयोगी है। आगे के अध्यायों में विभवांतर और प्रतिरोध की अवधारणाएँ इसी धारा के आधार पर विकसित होती हैं, इसलिए इस अध्याय की मूल बातों को भली-भांति आत्मसात करना आवश्यक है।