विद्युतचुंबकीय प्रेरण Notes

विद्युतचुंबकीय प्रेरण

विषय: रेलवे टेक्नीशियन ग्रेड 3 अध्याय: भौतिकी – विद्युत और चुंबकत्व विषय-वस्तु: 13.9 विद्युतचुंबकीय प्रेरण

1. परिचय

विद्युतचुंबकीय प्रेरण वह घटना है जिसमें बदलते चुंबकीय क्षेत्र के कारण किसी कुंडली या चालक में विद्युत वाहक बल (EMF) उत्पन्न हो जाता है। 1831 में माइकल फैराडे ने इस घटना की खोज की। फैराडे ने दिखाया कि जब किसी कुंडली के पास चुंबक को गतिमान किया जाता है, तो कुंडली में विद्युत धारा प्रेरित हो जाती है। यह धारा तब तक बहती है जब तक चुंबक गतिमान रहता है। चुंबक स्थिर होने पर कुंडली में कोई धारा उत्पन्न नहीं होती। इस खोज ने विद्युत जनित्र (जेनरेटर) के आविष्कार का मार्ग प्रशस्त किया।

विद्युतचुंबकीय प्रेरण विद्युत और चुंबकत्व के बीच के दोनों संबंधों का दूसरा पक्ष है। ओर्स्टेड ने दिखाया था कि विद्युत धारा चुंबकत्व उत्पन्न करती है, जबकि फैराडे ने सिद्ध किया कि चुंबकत्व विद्युत धारा उत्पन्न कर सकता है। यह खोज विद्युत शक्ति के बड़े पैमाने पर उत्पादन का आधार है। रेलवे की विद्युत प्रणालियों में ओवरहेड विद्युत लाइनों से ट्रेन के पैंटोग्राफ द्वारा विद्युत लेने तथा विद्युत इंजन में मोटर-जनित्र के सिद्धांत इसी पर आधारित हैं।

इस अध्याय में हम विद्युतचुंबकीय प्रेरण की अवधारणा, फैराडे के प्रयोग, फैराडे के नियम, लेंज का नियम, प्रेरित EMF का सूत्र e = -dΦ/dt, चुंबकीय फ्लक्स तथा AC जनित्र का सिद्धांत का अध्ययन करेंगे। यह अध्याय आगे के मोटर-जनित्र अध्याय का आधार है, इसलिए संकल्पनात्मक समझ अत्यंत आवश्यक है।

2. फैराडे के प्रयोग और नियम

फैराडे का पहला प्रयोग: एक कुंडली को गैल्वेनोमीटर से जोड़कर उसके पास छड़ चुंबक लाया जाता है। जब चुंबक को कुंडली की ओर ले जाया जाता है, तो गैल्वेनोमीटर की सुई विक्षेपित होती है, जो प्रेरित धारा को दर्शाती है। चुंबक स्थिर रहने पर सुई शून्य पर वापस आ जाती है। चुंबक को कुंडली से दूर ले जाने पर सुई विपरीत दिशा में विक्षेपित होती है। चुंबक की गति की गति बढ़ाने पर विक्षेपण बढ़ जाता है। यह सिद्ध करता है कि चुंबकीय क्षेत्र का परिवर्तन ही प्रेरित धारा का कारण है।

फैराडे का पहला नियम: जब किसी कुंडली या परिपथ से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स बदलता है, तो उस परिपथ में एक विद्युत वाहक बल प्रेरित होता है। प्रेरित EMF की अवधि फ्लक्स के परिवर्तन की अवधि के बराबर होती है। यदि परिपथ बंद है, तो इसमें प्रेरित धारा बहती है।

फैराडे का दूसरा नियम: किसी परिपथ में प्रेरित EMF का परिमाण, उस परिपथ से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर के अनुक्रमानुपाती होता है। गणितीय रूप में:

e = -N × (dΦ/dt)

जहाँ e प्रेरित EMF (वोल्ट), N कुंडली के फेरों की संख्या, dΦ/dt चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर है। ऋण चिह्न लेंज के नियम को दर्शाता है, जो बताता है कि प्रेरित EMF की दिशा परिवर्तन का विरोध करती है। प्रेरित EMF बढ़ाने के लिए फेरों की संख्या बढ़ाई जा सकती है, चुंबक की गति तेज की जा सकती है या मजबूत चुंबक का उपयोग किया जा सकता है।

उदाहरण 1: एक कुंडली से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स 2 सेकंड में 0.5 वेबर से बदलकर 2.5 वेबर हो जाता है। कुंडली में 100 फेरे हैं। प्रेरित EMF ज्ञात कीजिए।

हल: dΦ = 2.5 - 0.5 = 2.0 वेबर, dt = 2 सेकंड। e = -N(dΦ/dt) = -100 × (2/2) = -100 वोल्ट। प्रेरित EMF का परिमाण 100 वोल्ट है।

3. लेंज का नियम और चुंबकीय फ्लक्स

लेंज का नियम: यह नियम प्रेरित धारा की दिशा निर्धारित करता है। इसके अनुसार प्रेरित धारा की दिशा हमेशा ऐसी होती है कि वह उस परिवर्तन का विरोध करती है जिसके कारण वह उत्पन्न हुई है। उदाहरण के लिए, यदि चुंबक का N ध्रुव कुंडली की ओर लाया जा रहा है, तो कुंडली में ऐसी धारा प्रेरित होती है जो उस सिरे पर N ध्रुव बना दे, जिससे चुंबक के N ध्रुव का प्रवेश विरोधी हो। लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का परिणाम है। लेंज का नियम फ्लेमिंग के दक्षिण हस्त नियम के समतुल्य है, जिससे प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात होती है।

फ्लेमिंग का दक्षिण हस्त नियम: दाहिने हाथ की तर्जनी को चुंबकीय क्षेत्र (B) की दिशा में और अंगूठे को गति की दिशा में फैलाएँ, तो मध्यमा प्रेरित धारा की दिशा दर्शाती है। इस नियम का उपयोग जनित्र में प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए होता है।

चुंबकीय फ्लक्स: किसी सतह से गुजरने वाली चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की कुल संख्या को चुंबकीय फ्लक्स कहते हैं। इसका सूत्र Φ = B × A × cosθ है, जहाँ A क्षेत्रफल है। चुंबकीय फ्लक्स की SI इकाई वेबर (Wb) है। चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन ही प्रेरित EMF का कारण है।

उदाहरण 2: एक कुंडली में 50 फेरे हैं। चुंबकीय फ्लक्स 0.1 सेकंड में 0.4 वेबर से बदलकर 0.6 वेबर हो जाता है। प्रेरित EMF ज्ञात कीजिए।

हल: dΦ = 0.6 - 0.4 = 0.2 वेबर, dt = 0.1 सेकंड। e = -N(dΦ/dt) = -50 × (0.2/0.1) = -100 वोल्ट। परिमाण 100 वोल्ट।

4. AC जनित्र का सिद्धांत

विद्युतचुंबकीय प्रेरण का सबसे महत्वपूर्ण अनुप्रयोग AC जनित्र (प्रत्यावर्तित्र) है। AC जनित्र वह यंत्र है जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है। इसका सिद्धांत फैराडे के विद्युतचुंबकीय प्रेरण के नियम पर आधारित है।

AC जनित्र के मुख्य भाग: फील्ड चुंबक (प्रबल चुंबक), आर्मेचर (घूर्णन कुंडली), स्लिप रिंग और ब्रश। जब कुंडली चुंबकीय क्षेत्र में घूर्णन करती है, तो कुंडली से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स बदलता है, जिससे कुंडली में प्रेरित EMF उत्पन्न होता है। प्रत्येक आधे चक्र में प्रेरित धारा की दिशा बदलती है, इसलिए उत्पन्न धारा प्रत्यावर्ती (AC) होती है। कुंडली के प्रत्येक अर्ध-घूर्णन में फ्लक्स अधिकतम से शून्य और शून्य से अधिकतम होता है। जब कुंडली क्षेत्र के लंबवत होती है, तो प्रेरित EMF अधिकतम और जब समानांतर होती है, तो EMF शून्य होता है। भारत में विद्युत संयंत्रों में उत्पादित AC की आवृत्ति 50 हर्ट्ज़ होती है।

जनित्र में उत्पन्न EMF को प्रभावित करने वाले कारक: घूर्णन की गति, कुंडली के फेरों की संख्या, चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता और आर्मेचर का क्षेत्रफल। इनमें से किसी को भी बढ़ाने पर प्रेरित EMF बढ़ता है। जनित्र का सिद्धांत मोटर के सिद्धांत का विलोम है — मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है, जबकि जनित्र यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में।

उदाहरण 3: एक जनित्र की कुंडली में 200 फेरे हैं और कुंडली से संबद्ध फ्लक्स 0.05 सेकंड में 0.2 वेबर घट जाता है। प्रेरित EMF ज्ञात कीजिए।

हल: e = N × (dΦ/dt) = 200 × (0.2/0.05) = 200 × 4 = 800 वोल्ट।

5. त्वरित पुनरावृत्ति तालिकाएँ

तालिका 1: विद्युतचुंबकीय प्रेरण के नियम और सूत्र

संकल्पना विवरण / सूत्र SI मात्रक
चुंबकीय फ्लक्स Φ = BA cosθ वेबर (Wb)
फैराडे का दूसरा नियम e = -N(dΦ/dt) वोल्ट (V)
प्रेरित धारा दिशा लेंज का नियम -
फ्लेमिंग दक्षिण हस्त B तर्जनी, गति अंगूठा, धारा मध्यमा -

तालिका 2: मोटर और जनित्र की तुलना

गुण विद्युत मोटर जनित्र
ऊर्जा परिवर्तन विद्युत → यांत्रिक यांत्रिक → विद्युत
सिद्धांत चालक पर चुंबकीय बल विद्युतचुंबकीय प्रेरण
नियम फ्लेमिंग वाम हस्त फ्लेमिंग दक्षिण हस्त
आवश्यकता विद्युत आपूर्ति यांत्रिक गति

6. माइंड मैप

flowchart TD
    A[विद्युतचुंबकीय प्रेरण] --> B[फैराडे की खोज]
    A --> C[फैराडे के नियम]
    A --> D[लेंज का नियम]
    A --> E[चुंबकीय फ्लक्स]
    A --> F[AC जनित्र]
    B --> B1[1831 में खोज]
    C --> C1[e = -N(dΦ/dt)]
    D --> D1[विरोध का सिद्धांत]
    D --> D2[ऊर्जा संरक्षण]
    E --> E1[Φ = BA cosθ]
    E --> E2[मात्रक वेबर]
    F --> F1[यांत्रिक से विद्युत]
    F --> F2[50 हर्ट्ज़ AC]

7. महत्वपूर्ण चित्र (SVG)

फैराडे का प्रेरण प्रयोग कुंडली N S छड़ चुंबक चुंबक की गति G प्रेरित EMF e = -N(dΦ/dt) चुंबक की गति पर प्रेरित धारा निर्भर करती है स्वर्ण नियम फ्लक्स का परिवर्तन ही प्रेरित EMF का कारण है।

AC जनित्र का कार्य सिद्धांत आर्मेचर कुंडली चुंबकीय क्षेत्र कुंडली चुंबकीय क्षेत्र में घूमती है फ्लक्स परिवर्तन से प्रेरित EMF उत्पन्न होता है आवृत्ति 50 हर्ट्ज़ (भारत में) स्वर्ण नियम जनित्र यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है।

8. सामान्य त्रुटियाँ

  1. प्रेरित EMF के सूत्र में ऋण चिह्न को छोड़ देना, जबकि ऋण चिह्न लेंज के नियम को दर्शाता है।
  2. फैराडे का प्रयोग समझने में यह भूलना कि चुंबक स्थिर रहने पर धारा प्रेरित नहीं होती।
  3. लेंज के नियम और फैराडे के नियम की अवधारणाओं को आपस में मिला देना — लेंज दिशा और फैराडे परिमाण देता है।
  4. चुंबकीय फ्लक्स का मात्रक टेस्ला लिखना, जबकि फ्लक्स का मात्रक वेबर है।
  5. फ्लेमिंग के वाम और दक्षिण हस्त नियमों में भ्रम — मोटर में वाम, जनित्र में दक्षिण।
  6. फ्लक्स परिवर्तन की दर में फेरों की संख्या को गुणा करना भूल जाना।
  7. AC जनित्र की आवृत्ति को 60 हर्ट्ज़ मानना, जबकि भारत में 50 हर्ट्ज़ है।
  8. मोटर और जनित्र के ऊर्जा परिवर्तन को उल्टा समझना।

9. परीक्षा युक्तियाँ

  1. फैराडे के नियम का सूत्र e = -N(dΦ/dt) और प्रत्येक राशि का मात्रक कंठस्थ करें।
  2. फ्लक्स Φ = BA cosθ और उसका मात्रक वेबर अलग से याद रखें।
  3. लेंज का नियम = ऊर्जा संरक्षण, यह संबंध वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में बार-बार पूछा जाता है।
  4. वाम हस्त (मोटर) और दक्षिण हस्त (जनित्र) नियमों को उनके अनुप्रयोग सहित याद रखें।
  5. प्रेरित EMF बढ़ाने के तीन उपाय — फेरे बढ़ाना, गति बढ़ाना, प्रबल चुंबक — तैयार रखें।
  6. संख्यात्मक प्रश्नों में फ्लक्स परिवर्तन (dΦ) को अंतिम और प्रारंभिक मानों के अंतर से ज्ञात करें।
  7. AC जनित्र के भाग — फील्ड चुंबक, आर्मेचर, स्लिप रिंग, ब्रश — को चित्र सहित याद रखें।

10. निष्कर्ष

विद्युतचुंबकीय प्रेरण आधुनिक विद्युत उत्पादन का आधार है। इस अध्याय में हमने फैराडे की खोज, उनके दो नियम और प्रेरित EMF के सूत्र e = -N(dΦ/dt) को समझा। लेंज का नियम द्वारा प्रेरित धारा की दिशा निर्धारण और ऊर्जा संरक्षण के साथ उसके संबंध का अध्ययन किया। चुंबकीय फ्लक्स की अवधारणा और उसकी गणना Φ = BA cosθ से सीखी। AC जनित्र के सिद्धांत, उसके भागों और यांत्रिक से विद्युत ऊर्जा के परिवर्तन को समझा। यह ज्ञान रेलवे की विद्युत आपूर्ति प्रणाली, विद्युत इंजनों के नियंत्रण और मोटर-जनित्र प्रणालियों के संचालन में सीधे उपयोग में आता है। विद्युतचुंबकीय प्रेरण की संकल्पनात्मक समझ के बिना आगे के मोटर-जनित्र और उनके अनुप्रयोगों का अध्ययन अधूरा रह जाता है, अतः इस अध्याय को गहराई से समझना आवश्यक है।