विषय: रेलवे NTPC – तर्कशक्ति (रक्त संबंध और दिशा) अध्याय: 9.4 दूरी और दिशा विषय-वस्तु: दूरी-दिशा गणना
दूरी और दिशा का अध्याय दिशा ज्ञान का ही विस्तार है, जिसमें व्यक्ति द्वारा विभिन्न दिशाओं में तय की गई दूरियों को चित्र में दर्शाकर आरंभिक स्थान से अंतिम स्थिति की दूरी और दिशा ज्ञात की जाती है। रेलवे NTPC परीक्षा में इस विषय से प्रायः एक प्रश्न अवश्य आता है। इस अध्याय में केवल दिशा ही नहीं, बल्कि दूरी की गणना भी करनी होती है, इसलिए यह पिछले अध्याय की तुलना में थोड़ा अधिक गणनात्मक होता है।
इन प्रश्नों में व्यक्ति कुछ किलोमीटर एक दिशा में चलता है, फिर दाएं या बाएं मुड़कर कुछ और चलता है। कभी-कभी चार-पाँच मोड़ आ जाते हैं। अंत में पूछा जाता है कि व्यक्ति आरंभिक स्थान से कितनी दूर और किस दिशा में है, या फिर अंतिम बिंदु की स्थिति पूछी जाती है। जब दो लंबवत दूरियां ज्ञात हों तो पाइथागोरस प्रमेय से सीधी दूरी निकाली जाती है।
इस अध्याय में हम दूरी की गणना की विधि, पाइथागोरस प्रमेय का प्रयोग और हल किए गए उदाहरणों के माध्यम से समझेंगे। अंत में तालिकाएँ, माइंड मैप, आरेख, सामान्य गलतियाँ और परीक्षा युक्तियाँ दी गई हैं ताकि परीक्षा से पहले त्वरित पुनरावृत्ति हो सके।
दूरी-दिशा के प्रश्नों को हल करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करना चाहिए:
सीधी दूरी: यदि अंतिम बिंदु आरंभिक बिंदु के ठीक ऊपर या नीचे या बाएं या दाएं हो तो दूरी सीधे जोड़ या घटाव से मिल जाती है। जैसे 4 किमी पूर्व फिर 3 किमी पूर्व = कुल 7 किमी पूर्व। परंतु 4 किमी पूर्व फिर 3 किमी पश्चिम = 1 किमी पूर्व।
विपरीत दिशाओं का घटाव: यदि व्यक्ति एक दिशा में कुछ दूरी और फिर उसकी विपरीत दिशा में कुछ दूरी चले तो शुद्ध दूरी उनका अंतर होती है। दिशा उसी दिशा की होती है जिस दिशा में अधिक दूरी तय हुई हो।
लंबवत दूरी का मिलान: यदि दो दूरियां परस्पर लंबवत दिशाओं में हों, जैसे एक पूर्व में और एक उत्तर में, तो आरंभिक और अंतिम बिंदु के बीच सीधी दूरी पाइथागोरस प्रमेय से निकाली जाती है। ऐसे प्रश्नों में उत्तर प्रायः वर्गमूल वाले होते हैं, जैसे 5, 10, 13 किमी आदि।
दिशा का निर्धारण: अंतिम बिंदु आरंभिक बिंदु के जिस दिशा में हो, वही दिशा उत्तर होती है। उदाहरण के लिए यदि अंतिम बिंदु आरंभिक से उत्तर-पूर्व में है तो उत्तर लिखेंगे 'उत्तर-पूर्व'। ध्यान रखें कि पूछा गया उत्तर हमेशा 'आरंभिक स्थान के सापेक्ष अंतिम स्थिति' का होता है।
जब किसी व्यक्ति की गति में दो परस्पर लंबवत दिशाएं शामिल हों, तो सीधी दूरी ज्ञात करने के लिए पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग होता है। प्रमेय के अनुसार कर्ण का वर्ग, अन्य दो भुजाओं के वर्गों के योग के बराबर होता है।
विशेष स्थिति: यदि व्यक्ति दक्षिण-पूर्व दिशा में चलकर कुछ दूरी तय करता है तो उस दूरी को दो लंबवत घटकों (उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम) में बांटा जा सकता है। परंतु NTPC स्तर पर ऐसे प्रश्न कम आते हैं; अधिकतर प्रश्न केवल चार मुख्य दिशाओं पर आधारित होते हैं।
अंतिम स्थिति की दिशा: किसी प्रश्न में उत्तर 'पूर्व' जैसी एक दिशा में होता है, तो किसी में 'उत्तर-पूर्व' जैसी कोणीय दिशा में। जब दोनों लंबवत दूरियां बराबर हों तो दिशा सटीक कोणीय होती है, जैसे उत्तर-पूर्व। परंतु सामान्यतः NTPC के प्रश्नों में मुख्य दिशाएं ही अपेक्षित होती हैं।
उदाहरण 1: राम 4 किमी पूर्व की ओर चलता है, फिर 3 किमी उत्तर की ओर चलता है। वह आरंभिक स्थान से कितनी दूर है?
हल: दो लंबवत दूरियां 4 किमी और 3 किमी हैं। पाइथागोरस प्रमेय से सीधी दूरी = 5 किमी (4-3-5 त्रिगुट)। उत्तर: 5 किमी।
उदाहरण 2: सीता 5 किमी पश्चिम चलती है, फिर दाईं ओर मुड़कर 12 किमी चलती है। अब वह आरंभिक स्थान से कितनी दूर और किस दिशा में है?
हल: पश्चिम के बाद दाईं ओर मुड़ने पर उत्तर दिशा मिलती है। इस प्रकार 5 किमी पश्चिम और 12 किमी उत्तर लंबवत हैं। सीधी दूरी = 13 किमी (5-12-13 त्रिगुट)। दिशा: अंतिम बिंदु आरंभिक से उत्तर-पश्चिम में है। उत्तर: 13 किमी, उत्तर-पश्चिम।
उदाहरण 3: रवि 6 किमी दक्षिण चलता है, फिर बाईं ओर मुड़कर 8 किमी चलता है। उसकी आरंभिक स्थिति से दूरी और दिशा बताइए।
हल: दक्षिण के बाद बाईं ओर मुड़ने पर पूर्व मिलता है। अतः 6 किमी दक्षिण और 8 किमी पूर्व लंबवत हैं। सीधी दूरी = 10 किमी (6-8-10 त्रिगुट)। अंतिम बिंदु आरंभिक के दक्षिण-पूर्व में है। उत्तर: 10 किमी, दक्षिण-पूर्व।
उदाहरण 4: मोहन 2 किमी उत्तर चलता है, फिर 4 किमी पूर्व, फिर 2 किमी दक्षिण चलता है। वह आरंभिक स्थान से कितनी दूर और किस दिशा में है?
हल: उत्तर 2 किमी और दक्षिण 2 किमी आपस में समाप्त हो जाते हैं (शुद्ध = 0)। अतः केवल पूर्व की 4 किमी दूरी बचती है। उत्तर: 4 किमी पूर्व।
उदाहरण 5: एक व्यक्ति 10 किमी पूर्व, फिर 6 किमी दक्षिण, फिर 10 किमी पश्चिम चलता है। वह आरंभिक स्थान से कितनी दूर है?
हल: पूर्व 10 किमी और पश्चिम 10 किमी आपस में समाप्त हो जाते हैं। केवल दक्षिण की 6 किमी दूरी बचती है। उत्तर: 6 किमी दक्षिण।
| दूरियां (किमी) | सीधी दूरी | प्रयोग |
|---|---|---|
| 3 पूर्व, 4 उत्तर | 5 | 3-4-5 त्रिगुट |
| 5 पश्चिम, 12 उत्तर | 13 | 5-12-13 त्रिगुट |
| 6 पूर्व, 8 दक्षिण | 10 | 6-8-10 त्रिगुट |
| 7 पूर्व, 24 उत्तर | 25 | 7-24-25 त्रिगुट |
| 8 पूर्व, 15 उत्तर | 17 | 8-15-17 त्रिगुट |
| स्थिति | गणना | उदाहरण |
|---|---|---|
| एक ही दिशा में दो दूरियां | जोड़ें | 4 पूर्व + 3 पूर्व = 7 पूर्व |
| विपरीत दिशाओं में | घटाएं | 4 पूर्व + 3 पश्चिम = 1 पूर्व |
| लंबवत दिशाओं में | पाइथागोरस | 3 पूर्व + 4 उत्तर = 5 किमी |
| मुड़ने पर दिशा | दाएं = दक्षिणावर्त | पूर्व से दाएं = दक्षिण |
| मुड़ने पर दिशा | बाएं = वामावर्त | पूर्व से बाएं = उत्तर |
flowchart TD
A[दूरी और दिशा] --> B[आरंभिक बिंदु चुनें]
A --> C[प्रत्येक दूरी अंकित करें]
A --> D[मोड़ पर दिशा बदलें]
A --> E[अंतिम बिंदु पहचानें]
E --> F[एक ही दिशा में जोड़ें]
E --> G[विपरीत दिशा में घटाएं]
E --> H[लंबवत में पाइथागोरस]
H --> I[त्रिगुट याद रखें]
E --> J[दिशा निर्धारित करें]
दूरी और दिशा के प्रश्न चित्र बनाने की विधि से हल करने पर बहुत सरल हो जाते हैं। लंबवत दूरियों के लिए पाइथागोरस प्रमेय और त्रिगुटों का ज्ञान समय बचाता है, जबकि विपरीत दिशाओं में घटाव से शुद्ध दूरी मिलती है। इस विषय के प्रश्न नियमित अभ्यास से पूर्ण अंक दिलाने में सक्षम हैं, अतः परीक्षा से पहले कम से कम तीस-चालीस प्रश्न अवश्य हल करें।